Panipat News: बापौली की सीएचसी में दो साल से लटका ऑक्सीजन प्लांट
उमेश त्यागी/विपिन त्यागीबापौली। बापौली कस्बे के अंतर्गत आने वाले करीब 40 गांवों की स्वास्थ्य जिम्मेदारी इसी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पर है। वर्ष 2012 में मरीजों को आधुनिक सुविधाओं की सोच के साथ इसका नया भवन बनाया। सीएचसी अब खुद वेंटिलेटर पर नजर आ रहा है। कोरोना काल में ऑक्सीजन प्लांट की शुरुआत बड़े जोर-शोर से की गई थी। वह दो साल बीत जाने के बाद भी अधर में लटका है। बिजली और पाइपलाइन के कनेक्शन न होने के कारण यह प्लांट चालू नहीं हो सका है।सीएचसी में मेडिकल अधिकारी (एमओ) के कुल सात पद स्वीकृत हैं। इनमें से छह पद लंबे समय से रिक्त हैं। सीएचसी में 40 गांवों के मरीजों का जिम्मा महज एक डॉक्टर के भरोसे है। इतना ही नहीं, टेस्ट के लिए सीएचसी में लैब टेक्नीशियन के दो पद हैं। पिछले एक महीने से दोनों ही पद रिक्त होने के कारण मरीजों को टेस्ट के लिए निजी लैब में जेब ढीली करनी पड़ रही है। अस्पताल में छह महीने पहले नई एक्सरे मशीन तो लगा दी गई, लेकिन तकनीकी कारणों या स्टाफ की कमी से आज तक इसमें एक भी एक्सरे नहीं हो सका है। भल्लौर मुख्य गांव से करीब एक किलोमीटर दूर स्थित है। मरीजों को अस्पताल तक आने-जाने के लिए कोई ऑटो या बस सुविधा नहीं है। इससे बुजुर्गों, गर्भवती और गंभीर मरीजों को पैदल या निजी वाहनों से जाना पड़ता है।40 गांवों के केंद्र बिंदु बापौली सीएचसी में डॉक्टरों के पद खाली हैं। एक डॉक्टर इतने मरीजों को कैसे संभालेगा लैब बंद होने से गरीब मरीजों को बाहर से महंगे दामों पर खून की जांच करानी पड़ती है। -श्याम लाल फौजीअस्पताल को गांव से एक किलोमीटर दूर भल्लौर रोड पर बना तो दिया, लेकिन वहां तक जाने का कोई साधन नहीं है। पैदल चलने में सांस फूलती है। मुख्य चौक से आने-जाने के लिए साधन शुरू कराना जरूरी है। -रमेश फौजी सीएचसी की बिल्डिंग तो बड़ी है, लेकिन रात के समय यहां कोई डॉक्टर नहीं मिलता। महिला डॉक्टर न होने से गर्भवती महिलाओं को सीधे पानीपत रेफर कर दिया जाता है। एंबुलेंस में महिलाओं की जान पर बन आती है। -मनोज कुमार सीएचसी में छह महीने पहले आई एक्सरे मशीन सफेद हाथी साबित हो रही है। जब मशीन चालू ही नहीं करनी थी तो जनता का पैसा क्यों बर्बाद किया गया एक छोटे से एक्सरे के लिए भी हमें शहर तक भागना पड़ता है। -शिवचरण गांव में जब तक समय पर इलाज नहीं मिलता, तब तक गांव का विकास अधूरा कहा जाएगा। कोरोना काल में बनाया गया ऑक्सीजन प्लांट आज तक चालू न होना प्रशासनिक लापरवाही का सबसे बड़ा प्रमाण कहा जा सकता है। -राजू रावल कोरोना काल में ऑक्सीजन प्लांट बनाना शुरू किया था। यह काम दो साल बीत जाने के बाद भी अधर में लटका है। बिजली और पाइपलाइन के कनेक्शन न होने के कारण यह प्लांट चालू नहीं हो सका है। -पुष्पेंद्र राजू रावल- फोटो : जमीन विवाद में दादा की चार गोलियां मारकर हत्या राजू रावल- फोटो : जमीन विवाद में दादा की चार गोलियां मारकर हत्या राजू रावल- फोटो : जमीन विवाद में दादा की चार गोलियां मारकर हत्या राजू रावल- फोटो : जमीन विवाद में दादा की चार गोलियां मारकर हत्या राजू रावल- फोटो : जमीन विवाद में दादा की चार गोलियां मारकर हत्या राजू रावल- फोटो : जमीन विवाद में दादा की चार गोलियां मारकर हत्या
- Source: www.amarujala.com
- Published: Jun 26, 2026, 02:50 IST
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