आप भी रात भर चार्ज पर छोड़ देते हैं फोन?: जान लें एडैप्टिव चार्जिंग से जुड़ा नियम, वरना घट सकती है बैटरी लाइफ

रात का समय है, आप अपने फोन में अलार्म सेट करते हैं, देखते हैं कि बैटरी 23 प्रतियात बची है, उसे बिस्तर के पास चार्जर में प्लग करते हैं और सो जाते हैं। सुबह जागने तक आपका फोन सात से आठ घंटे चार्जर से जुड़ा रहता है, जो कि किसी भी फास्ट चार्जर से 100 प्रतिशत फुल होने में लगने वाले समय से काफी ज्यादा है। अक्सर हम सुनते हैं कि फोन को रात भर चार्जिंग पर छोड़ना उसकी बैटरी के लिए खतरनाक हो सकता है। लिथियम-आयन बैटरियों का रसायन सीमित शेल्फ लाइफ के साथ आता है और बार-बार जीरो से 100 प्रतिशत के चार्ज-डिस्चार्ज साइकिल से इसकी उम्र कम होने लगती है। पहले सलाह दी जाती थी कि बैटरी की लंबी उम्र के लिए 20-80 वाले फॉर्मूले को अपनाने की सलाह दी जाती थी यानी कि बैटरी हमेशा 20 से 80 प्रतिशत के बीच ही रखें। सिद्धांत रूप में आज भी बैटरी का केमिकल प्रोसेस वही है, लेकिन आधुनिक स्मार्टफोन्स के स्मार्ट चार्जिंग कंट्रोल्स ने इस समस्या का काफी हद तक समाधान निकाल लिया है। क्या रातभर फोन चार्ज करना सुरक्षित है आधुनिक स्मार्टफोन में चार्जिंग कंट्रोल पहले की तुलना में काफी बेहतर है। फोन लंबे समय तक चार्जर से कनेक्ट रहने पर हर समय अधिकतम गति से चार्ज नहीं करता। कई डिवाइस यूजर की चार्जिंग आदतों को समझकर चार्जिंग को रोक या धीमा कर सकते हैं। इसका मकसद बैटरी को लंबे समय तक 100 फीसदी पर रखने का समय कम करना है। जैसे मान लीजिए आईफोन का ऑप्टीमाइज्ड बैटरी चार्जिंग फीचर लंबे चार्जिंग सेशन के दौरान करीब 80 फीसदी पर चार्जिंग रोक सकता है और यूजर के सामान्य तौर पर फोन निकालने के समय के करीब दोबारा चार्ज करके 100 फीसदी पूरा करता है। एपल ने यह फीचर iOS 13 के दौर में पेश किया था। इसलिए अगर आपका फोन आधुनिक चार्जिंग मैनेजमेंट सपोर्ट करता है तो रातभर चार्जर से कनेक्ट रहने का मतलब यह नहीं है कि बैटरी लगातार 100 फीसदी पर पूरी गति से चार्ज होती रहेगी। 80 फीसदी चार्ज करने की सलाह क्यों दी जाती है लिथियम-आयन बैटरी की क्षमता समय के साथ कम होना सामान्य है। हर पूरा चार्ज साइकिल बैटरी की क्षमता को थोड़ा प्रभावित करता है। हालांकि, चार्ज साइकिल का मतलब सिर्फ एक बार 0 से 100 फीसदी चार्ज करना नहीं है। कुल मिलाकर बैटरी की 100 फीसदी क्षमता इस्तेमाल होने पर एक चार्ज साइकिल पूरी होती है। इसी वजह से लंबे समय तक बैटरी को बहुत ज्यादा चार्ज लेवल पर रखने का समय कम करना बैटरी की लंबी उम्र के लिए मददगार हो सकता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर फोन को हमेशा ठीक 80 फीसदी तक ही चार्ज करना जरूरी है। अगर 80 फीसदी चार्ज आपकी रोज की जरूरत के लिए पर्याप्त है तो यह एक अच्छा विकल्प हो सकता है। वहीं, अगर आपको पूरे दिन फोन चलाना है या यात्रा के दौरान चार्जर उपलब्ध नहीं होगा, तो ज्यादा चार्ज रखना ज्यादा व्यावहारिक हो सकता है। आईफोन में कैसे काम करता है ऑप्टिमाइज्ड बैटरी चार्जिंग एपल के स्मार्टफोन्स में ऑप्टिमाइज्ड बैटरी चार्जिंग यूजर की रोजाना चार्जिंग आदतों को सीखता है। जब फोन अनुमान लगाता है कि वह लंबे समय तक चार्जर से जुड़ा रहेगा, तो यह 80 फीसदी के बाद चार्जिंग को कुछ समय के लिए रोक सकता है। इसके बाद फोन आमतौर पर उस समय के करीब 100 फीसदी तक पहुंचने की कोशिश करता है जब यूजर उसे चार्जर से हटाता है। आईफोन 15 और उसके बाद के मॉडल में यूजर चार्ज लिमिट भी सेट कर सकता है। इसमें 80 से 100 फीसदी के बीच 5 फीसदी के अंतराल में लिमिट चुनी जा सकती है। यानी जरूरत के हिसाब से 80%, 85%, 90%, 95% या 100% जैसी लिमिट रखी जा सकती है। अगर कम चार्ज लिमिट सेट है तो आईफोन कभी-कभी बैटरी की चार्ज रीडिंग को सही बनाए रखने के लिए खुद को 100 फीसदी तक चार्ज कर सकता है। सैमसंग फोन में भी मिलते हैं बैटरी प्रोटेक्शन फीचर सिर्फ आईफोन में ही नहीं, एंड्रॉयड में भी यह फीचर है। सैमसंग गैलेक्सी फोन में बैटरी प्रोटेक्शन फीचर बैटरी की चार्जिंग को नियंत्रित करने के लिए दिया जाता है। नए गैलेक्सी मॉडल और सॉफ्टवेयर वर्जन के अनुसार इसके विकल्प अलग हो सकते हैं। सैमसंग के मौजूदा बैटरी प्रोटेक्शन सिस्टम में मैक्सीमम मोड के तहत 80%, 85%, 90% या 95% जैसी चार्जिंग लिमिट चुनी जा सकती है। इससे फोन चुनी गई सीमा तक पहुंचने के बाद चार्जिंग रोक देता है। इसके अलावा स्लीप या एडैप्टिव जैसे मोड यूजर की नींद या इस्तेमाल की आदतों के आधार पर चार्जिंग को एडजस्ट कर सकते हैं। स्लीप टाइम के दौरान चार्जिंग करीब 80 फीसदी पर रुक सकती है और जागने के समय के करीब 100 फीसदी तक पहुंचने के लिए चार्जिंग दोबारा शुरू हो सकती है। गूगल पिक्सल में एडैप्टिव चार्जिंग गूगल पिक्सल फोन में भी चार्जिंग ऑप्टिमाइजेशन का विकल्प मिलता है। एडैप्टिव चार्जिंग यूजर की चार्जिंग आदतों को सीखकर लंबे चार्जिंग सेशन के दौरान फोन को लंबे समय तक 100 फीसदी पर रखने से बचाता है। अगर फोन रातभर चार्जिंग पर लगा है तो यह आमतौर पर यूजर के फोन निकालने के समय के करीब 100 फीसदी तक चार्ज पूरा करने की कोशिश करता है। गूगल के अनुसार इस फीचर को यूजर की चार्जिंग आदतें सीखने में करीब 14 दिन लग सकते हैं। पिक्सल 6a और उसके बाद के डिवाइस में बैटरी को 80 फीसदी तक सीमित करने का विकल्प भी मिलता है। यह उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है जिनके लिए दिन खत्म होने तक 80 फीसदी से कम चार्ज पर्याप्त रहता है। आईफोन 17 का एडैप्टिव पावरक्या करता है आईफोन 17 सीरीज के साथ एपल ने एडैप्टिव पावर फीचर भी दिया है। यह चार्जिंग लिमिट तय करने वाला फीचर नहीं है, बल्कि दिन के दौरान बैटरी खपत को मैनेज करने के लिए बनाया गया है। यह यूजर के सामान्य बैटरी इस्तेमाल को समझकर अनुमान लगाता है कि कब अतिरिक्त बैटरी की जरूरत पड़ सकती है और जरूरत के अनुसार परफॉर्मेंस, स्क्रीन ब्राइटनेस और बैकग्राउंड एक्टिविटी जैसे पहलुओं में बदलाव कर सकता है। यह जरूरत पड़ने पर लो पावर मोड भी सक्रिय कर सकता है। इसलिए एडैप्टिव पावर को ऑप्टिमाइज्ड चार्जिंग या चार्ज लिमिट का विकल्प समझना सही नहीं होगा। तीनों फीचर्स का उद्देश्य अलग है। क्या हमेशा 80% पर चार्ज करना बेहतर है एक्पर्ट्स के अनुसार ऐसा जरूरी नहीं है। 80 फीसदी चार्ज लिमिट बैटरी की लंबी उम्र और रोजाना मिलने वाली बैटरी क्षमता के बीच एक तरह का समझौता है। अगर आपका फोन 80 फीसदी चार्ज में आसानी से पूरा दिन निकाल देता है तो कम चार्ज लिमिट इस्तेमाल करना समझदारी हो सकती है। इससे बैटरी को ज्यादा चार्ज लेवल पर लंबे समय तक रखने का समय कम किया जा सकता है। हालांकि अगर आप यात्रा कर रहे हैं, लंबे समय तक चार्जर से दूर रहने वाले हैं या दिनभर ज्यादा फोन इस्तेमाल करते हैं, तो 100 फीसदी तक चार्ज करना ज्यादा उपयोगी हो सकता है।इसलिए हर यूजर के लिए 80 फीसदी को अनिवार्य नियम मानना जरूरी नहीं है। असली दुश्मन हो सकती है गर्मी चार्जिंग के दौरान सिर्फ प्रतिशत पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। बैटरी की उम्र पर तापमान का भी बड़ा असर पड़ सकता है। लिथियम-आयन बैटरियां ज्यादा तापमान के प्रति संवेदनशील होती हैं। खासकर जब फोन गर्म वातावरण में हो और उसी समय चार्ज भी हो रहा हो, तो बैटरी पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। आधुनिक फोन तापमान बढ़ने पर खुद चार्जिंग की गति कम कर सकते हैं या कुछ परिस्थितियों में चार्जिंग को सीमित कर सकते हैं। गूगल भी बताता है कि कुछ स्थितियों में लंबे समय तक चार्जिंग और ज्यादा तापमान होने पर पिक्सल अपने आप चार्जिंग को करीब 70-80 फीसदी तक सीमित कर सकता है। इसलिए फोन को गर्म कार में छोड़ना या सीधी धूप में रखना बैटरी के लिए अच्छा नहीं है। रातभर चार्ज करते किन बातों का ध्यान रखना चाहिए अगर आप रात में फोन चार्ज करते हैं तो उसे तकिए, कंबल या किसी अन्य बिस्तर के सामान के नीचे दबाकर न रखें। ऐसी स्थिति में फोन के आसपास गर्मी जमा हो सकती है और तापमान बढ़ सकता है। फोन को ऐसी जगह रखना बेहतर है जहां हवा का प्रवाह बना रहे और वह अतिरिक्त गर्मी को बाहर निकाल सके। तो क्या रातभर फोन चार्ज कर सकते हैं हां, जानकारों के अनुसार आधुनिक स्मार्टफोन में आम तौर पर रातभर चार्जिंग करना संभव है। मौजूदा फोन में चार्जिंग को नियंत्रित करने वाले कई स्मार्ट फीचर्स मौजूद हैं, जो लंबे समय तक चार्जर से जुड़े रहने के दौरान बैटरी को मैनेज करते हैं। एपल, सैमसंग और गूगल तीनों अपने डिवाइस में अलग-अलग तरह के चार्जिंग ऑप्टिमाइजेशन और बैटरी प्रोटेक्शन विकल्प देते हैं। आपको रात में ठीक 80 फीसदी पर फोन निकालने के लिए अलार्म लगाने की जरूरत नहीं है। इसके बजाय अपने फोन की बैटरी या चार्जिंग सेटिंग्स में जाकर देखें कि ऑप्टिमाइज्ड चार्जिंग, एडैप्टिव चार्जिंग, बैटरी प्रोटेक्शन या चार्ज लिमिट जैसा कौन-सा विकल्प उपलब्ध है। अगर 80 फीसदी चार्ज आपके रोजाना इस्तेमाल के लिए पर्याप्त है तो कम चार्ज लिमिट चुन सकते हैं। वहीं, अगर पूरे दिन ज्यादा बैटरी की जरूरत होती है तो 100 फीसदी तक चार्ज करना व्यावहारिक हो सकता है। सबसे जरूरी बात फोन को अनावश्यक गर्मी से बचाएं। स्मार्ट चार्जिंग फीचर बैटरी की उम्र को बेहतर तरीके से मैनेज करने में मदद कर सकते हैं, लेकिन वे बैटरी की प्राकृतिक उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को पूरी तरह खत्म नहीं करते। इसलिए सही चार्जिंग सेटिंग और तापमान का ध्यान रखना, दोनों ही जरूरी हैं।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Sep 29, 2026, 11:14 IST
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