ऑर्कुट की वापसी: 30 करोड़ लोगों को जोड़ने वाला सोशल नेटवर्क क्यों हुआ बंद, अब कैसे कर रहा लौटने की तैयारी?
अगर आपने 2000 के दशक में इंटरनेट चलाना शुरू किया था, तो आपको वो दिन जरूर याद होंगे जब स्कूल या कॉलेज के बाद साइबर कैफे जाकर अपना स्क्रैपबुक चेक करना दिन का सबसे जरूरी काम हुआ करता था। यह वो दौर था जब मार्क जकरबर्ग का नाम दुनिया ने नहीं सुना था और इंटरनेट की दुनिया पर गूगल के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ऑर्कुट (Orkut) का एकछत्र राज था। 2004 में लॉन्च हुए इस प्लेटफॉर्म ने 30 करोड़ यूजर्स का आंकड़ा पार कर लिया था। भारत और ब्राजील में तो इसका क्रेज दीवानगी की हद तक था। लेकिन फिर ऐसा क्या हुआ कि देखते ही देखते यह प्लेटफॉर्म इतिहास के पन्नों में दफन हो गया और अब इसके वापस लौटने की क्या सुगबुगाहट है आइए एक्सप्लेनर में समझते हैं कि ऑरकुट इतना लोकप्रिय कैसे हुआ, गूगल ने इसे बंद क्यों किया और अब इसकी वापसी की तैयारी किस तरह चल रही है। Orkut: शुरुआत और वो सुनहरा दौर ऑरकुट की शुरुआत जनवरी 2004 में हुई थी। इसे तुर्की मूल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर ऑरकुट ब्यूयुक्कोकटेन ने गूगल में काम करते हुए एक साइड प्रोजेक्ट के तौर पर बनाया था। उस समय गूगल के कर्मचारियों को अपने काम के समय का 20% हिस्सा नए आइडिया पर काम करने की छूट थी। ऑरकुट इसी पहल का नतीजा था। शुरुआत में इस प्लेटफॉर्म पर अकाउंट बनाना हर किसी के लिए आसान नहीं था। यूजर को किसी मौजूदा सदस्य के इनविटेशन की जरूरत पड़ती थी। बाद में रजिस्ट्रेशन सबके लिए खोल दिया गया। धीरे-धीरे ऑरकुट भारत और ब्राजील जैसे देशों में बेहद लोकप्रिय हो गया। देखते ही देखते, कुछ साल में इस सोशल नेटवर्क प्लेटफॉर्म से 30 करोड़ यूजर्स जुड़ चुके थे। ऑरकुट की लोकप्रियता की वजह सिर्फ दोस्तों से जुड़ना नहीं था। इसमें कई ऐसे फीचर थे, जो उस दौर के इंटरनेट यूजर्स के लिए नए और मजेदार थे। स्क्रैपबुक: दोस्तों की प्रोफाइल पर सार्वजनिक मैसेज छोड़ सकते थे। इसे स्क्रैप कहा जाता था। टेस्टिमोनियल: दोस्त एक-दूसरे के बारे में कुछ अच्छा लिख सकते थे। प्रोफाइल पर दिखाने से पहले उसे स्वीकार करना पड़ता था। कम्युनिटी: एक जैसी पसंद और रुचि वाले लोग ग्रुप बना सकते थे। म्यूजिक, फिल्म, कॉलेज, शहर और रोजमर्रा की आदतों जैसे विषयों पर हजारों कम्युनिटी थीं। प्रोफाइल विजिट: यूजर देख सकते थे कि उनकी प्रोफाइल किसने देखी है। फ्रेंड लिस्ट: दोस्तों को जोड़कर अपना ऑनलाइन नेटवर्क तैयार किया जा सकता था। इन फीचर्स ने ऑरकुट को सिर्फ एक वेबसाइट नहीं, बल्कि लोगों के लिए ऑनलाइन मिलने-जुलने की जगह बना दिया था। गूगल के मुताबिक, इसके सार्वजनिक कम्युनिटी आर्काइव में 5.1 करोड़ कम्युनिटी, 12 करोड़ टॉपिक और एक अरब से ज्यादा इंटरैक्शन दर्ज थे। ऑरकुट की लोकप्रियता क्यों घटने लगी ऑरकुट का बंद होना किसी एक वजह का नतीजा नहीं था। सोशल मीडिया की दुनिया तेजी से बदल रही थी और इस बदलाव के साथ ऑरकुट अपनी पकड़ बनाए नहीं रख सका। इसके पीछे कुछ अहम कारण थे। फेसबुक से मिली कड़ी टक्कर ऑरकुट के लोकप्रिय होने के कुछ ही समय बाद फेसबुक भी तेजी से आगे बढ़ने लगा। फेसबुक का इंटरफेस, फोटो शेयरिंग, न्यूज फीड और दोस्तों के साथ बातचीत का तरीका धीरे-धीरे ज्यादा लोगों को पसंद आने लगा। खासकर स्मार्टफोन और मोबाइल इंटरनेट के विस्तार के साथ फेसबुक ने अपनी पहुंच बढ़ाई। भारत और ब्राजील में ऑरकुट की मजबूत मौजूदगी थी, लेकिन फेसबुक ने इन्हीं बाजारों में उसे चुनौती दी। 2011 के आखिर तक फेसबुक ब्राजील में ऑरकुट से आगे निकल चुका था। इस बदलाव ने ऑरकुट के लिए खतरे की घंटी बजा दी थी। नए फीचर्स और अनुभव में पिछड़ना सोशल मीडिया यूजर्स की जरूरतें बदल रही थीं। लोग फोटो, वीडियो और अपडेट शेयर करने के साथ-साथ अपने दोस्तों की गतिविधियां एक ही जगह देखना चाहते थे। फेसबुक इस तरह के अनुभव को लगातार बेहतर बना रहा था। दूसरी ओर, ऑरकुट अपने पुराने फीचर्स और पहचान के साथ आगे बढ़ता रहा। ऐसे में नए यूजर्स को आकर्षित करना और पुराने यूजर्स को बनाए रखना उसके लिए मुश्किल होता गया। यह कहना सही नहीं होगा कि सिर्फ एक फीचर की कमी से ऑरकुट पीछे हुआ, लेकिन बदलते सोशल मीडिया अनुभव के साथ तालमेल न बैठा पाना उसके कमजोर पड़ने की बड़ी वजहों में शामिल था। गूगल की बदती प्राथमिकताओं का असर ऑरकुट की गिरती लोकप्रियता के बीच गूगल ने अपने दूसरे प्लेटफॉर्म पर ज्यादा ध्यान देना शुरू किया। कंपनी यूट्यूब, ब्लॉगर और अपने नए सोशल नेटवर्क गूगल प्लस को आगे बढ़ाना चाहती थी। गूगल ने 30 जून 2014 को ऑरकुट बंद करने का एलान किया। कंपनी ने अपने आधिकारिक ब्लॉग में कहा था कि यूट्यूब, ब्लॉगर और गूगल प्लस जैसे प्लेटफॉर्म पर कम्युनिटी की ग्रोथ ऑरकुट से ज्यादा हो रही है। इसलिए कंपनी अपने संसाधन इन सेवाओं को बेहतर बनाने में लगाएगी। स्पैम और फर्जी गतिविधियों की चुनौती ऑरकुट जैसे बड़े सोशल नेटवर्क के सामने फर्जी प्रोफाइल, स्पैम और आपत्तिजनक कंटेंट को संभालने की चुनौती भी थी। समय के साथ ऑनलाइन सुरक्षा और कंटेंट मॉडरेशन की जरूरत बढ़ रही थी। ऐसे माहौल में यूजर का भरोसा बनाए रखना किसी भी सोशल नेटवर्क के लिए जरूरी था। हालांकि, ऑरकुट के बंद होने के लिए गूगल ने इन समस्याओं को आधिकारिक वजह नहीं बताया था। कंपनी का सार्वजनिक तर्क दूसरे प्लेटफॉर्म की तेज ग्रोथ और संसाधनों को वहां लगाने का फैसला था। गूगल ने ऑरकुट कब बंद किया गूगल ने 30 जून 2014 को घोषणा की थी कि ऑरकुट 30 सितंबर 2014 से काम करना बंद कर देगा। इस घोषणा के बाद नए अकाउंट बनाने की सुविधा भी बंद कर दी गई थी। यूजर्स को अपनी प्रोफाइल, फोटो और पोस्ट डाउनलोड करने के लिए Google Takeout का विकल्प दिया गया था। 30 सितंबर 2014 को ऑरकुट की सेवा आधिकारिक तौर पर बंद हो गई। हालांकि, गूगल ने इसकी सार्वजनिक कम्युनिटी पोस्ट को आर्काइव में सुरक्षित रखा। आज भी ऑरकुट के पुराने कम्युनिटी पेजों का सार्वजनिक रिकॉर्ड देखा जा सकता है, लेकिन पहले की तरह अकाउंट चलाना या नई पोस्ट करना संभव नहीं है। अब ऑरकुट की वापसी कैसे हो रही है करीब 12 साल बाद अक्टूबर 2026 में ऑरकुट एक बार फिर चर्चा में आ गया है। इसके संस्थापक ऑरकुट ब्यूयुक्कोकटेन ने लोगों से अपील की है कि वे Orkut.com पर जाकर इसके नए रूप को समर्थन दें। इसके लिए वेबसाइट पर एक कैंपेन शुरू किया गया है, जिसका मकसद ऐसे सोशल नेटवर्क की मांग समझना है जो असली लोगों, दोस्ती और कम्युनिटी को प्राथमिकता दे। इस पहल के तहत यूजर वेबसाइट पर अपना नाम, ईमेल और देश की जानकारी देकर समर्थन दर्ज करा सकते हैं। इसके बाद उन्हें एक डिजिटल सपोर्टर कार्ड मिलता है, जिसे दोस्तों के साथ शेयर किया जा सकता है। इससे दूसरे लोग भी इस मुहिम से जुड़ सकते हैं। इस कैंपेन के तहत प्लेटफॉर्म को वापस लाने के लिए 160 से ज्यादा देशों से समर्थन जुटाने की कोशिश की जा रही है। यहां एक बात समझना जरूरी है कि वेबसाइट पर नाम दर्ज करना किसी नए ऑरकुट अकाउंट के लिए रजिस्ट्रेशन नहीं है। यह एक संभावित नए सोशल नेटवर्क के समर्थन में चलाया जा रहा अभियान है। अभी तक नए प्लेटफॉर्म की लॉन्च डेट, एप, फीचर्स या उपलब्धता की घोषणा नहीं हुई है। नया ऑरकुट पुराने से कैसे अलग हो सकता है ऑरकुट के संस्थापक का कहना है कि पिछले दो दशकों में सोशल मीडिया का फोकस लोगों को जोड़ने से हटकर यूजर्स का ज्यादा से ज्यादा ध्यान खींचने पर चला गया है। आज कई प्लेटफॉर्म ऐसे एल्गोरिदम पर काम करते हैं, जो यूजर की पसंद और गतिविधियों के आधार पर उसे लगातार नया कंटेंट दिखाते हैं। ब्यूयुक्कोकटेन को चिंता है कि AI से तैयार पोस्ट, फर्जी अकाउंट, बॉट और डीपफेक के बढ़ते इस्तेमाल से यह पहचानना मुश्किल हो रहा है कि ऑनलाइन बातचीत के दूसरी तरफ असली इंसान है या नहीं। उनका प्रस्ताव है कि नया सोशल नेटवर्क वास्तविक लोगों और उनके बीच भरोसेमंद रिश्तों को प्राथमिकता दे। उनकी सोच में कम्युनिटी की भूमिका अहम होगी। यानी यूजर सिर्फ एक ऐसी फीड का हिस्सा न हो, जहां वह पोस्ट देखता और स्क्रॉल करता रहे, बल्कि अपनी पसंद के लोगों के साथ बातचीत करने वाली कम्युनिटी का सदस्य बने। उन्होंने दोस्ती, भरोसा, जिज्ञासा और आपसी जुड़ाव को प्लेटफॉर्म के प्रस्तावित विचारों के केंद्र में रखा है। क्या ऑरकुट की वापसी सफल हो पाएगी ऑरकुट की पुरानी लोकप्रियता और मौजूदा समर्थन यह जरूर दिखाते हैं कि लोगों के बीच उस दौर के सोशल मीडिया को लेकर अब भी यादें और दिलचस्पी है। लेकिन किसी पुराने प्लेटफॉर्म को याद करना और उसे रोजाना इस्तेमाल करना, दोनों अलग बातें हैं। आज सोशल मीडिया का बाजार पहले से कहीं ज्यादा प्रतिस्पर्धी है। फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स, रेडिट और दूसरे प्लेटफॉर्म के पास पहले से बड़ा यूजर बेस है। ऐसे में नए ऑरकुट को लोगों के लिए कुछ ऐसा पेश करना होगा, जो उन्हें इन प्लेटफॉर्म से अलग और उपयोगी लगे। इसके अलावा फर्जी अकाउंट, डेटा प्राइवेसी, कंटेंट मॉडरेशन और एआई से तैयार कंटेंट की पहचान जैसी चुनौतियों का समाधान भी जरूरी होगा। सिर्फ पुरानी यादों के सहारे कोई सोशल नेटवर्क लंबे समय तक नहीं चल सकता। फिलहाल ऑरकुट की वापसी को एक कोशिश और शुरुआती समर्थन जुटाने की मुहिम के तौर पर देखना चाहिए, न कि पुराने प्लेटफॉर्म की आधिकारिक री-लॉन्चिंग के रूप में। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ऑरकुट एक बार फिर लोगों को उसी तरह जोड़ पाएगा, जैसे उसने 2000 के दशक में किया था।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Nov 01, 2026, 17:49 IST
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