'राष्ट्रपति' नहीं हैं, पर राष्ट्रपति हैं…अब क्या होगा?: गृह मंत्रालय पहुंचा मामला, निर्णय पर निगाहें
छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के ग्राम घुटरा में एक ग्रामीण का नाम सरकारी दस्तावेज में 'राष्ट्रपति' दर्ज होने का मामला अब राष्ट्रपति सचिवालय तक पहुंच गया है। ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सौरव मिश्रा ने सांविधानिक पदों और राष्ट्रीय गरिमा से जुड़े शब्दों के व्यक्तिगत नाम के रूप में उपयोग पर रोक लगाने तथा स्पष्ट कानून बनाने की मांग उठाई है। राष्ट्रपति सचिवालय ने इस याचिका पर संज्ञान लेते हुए इसे गृह मंत्रालय सहित संबंधित मंत्रालयों को आवश्यक कार्रवाई के लिए प्रेषित कर दिया है। सांविधानिक पदों के नाम पर नियम बनाने की मांग सौरव मिश्रा ने अपनी याचिका में केंद्र सरकार से सांविधानिक और राष्ट्रीय पदों से जुड़े शब्दों के नाम के रूप में इस्तेमाल पर स्पष्ट दिशा-निर्देश तय करने का आग्रह किया है। उन्होंने अपनी मांग में 'राष्ट्रपति', 'प्रधानमंत्री', 'मुख्यमंत्री', 'राज्यपाल' और 'भारत' जैसे शब्दों के व्यक्तिगत नाम के रूप में इस्तेमाल को लेकर नियम निर्धारित करने की बात कही है। उन्होंने केंद्र सरकार से मौजूदा कानूनी व्यवस्था की समीक्षा करने का अनुरोध किया है। इसके अतिरिक्त, आवश्यकता अनुसार कानूनी विशेषज्ञों से विचार-विमर्श करके एक नया विधेयक या उपयुक्त कानूनी प्रावधान तैयार करने की मांग रखी है ताकि भविष्य में इस तरह के मामलों में किसी प्रकार का भ्रम या असमंजस न रहे। प्राथमिक स्कूल के दाखिला रजिस्टर में दर्ज विवरण ग्राम घुटरा के संबंधित ग्रामीण की पहचान सभी मुख्य सरकारी कागजातों में 'राष्ट्रपति' के नाम से ही अंकित है। प्राथमिक स्कूल के दाखिला रजिस्टर के अनुसार 14 जुलाई 1988 को उनका नाम 'राष्ट्रपति' के रूप में दर्ज किया गया था। इस मामले में स्कूल के प्रधानपाठक अनिल राय का कहना है कि विद्यालय के रिकॉर्ड में यही नाम लिखा हुआ है और नाम लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि या गलती होने की जानकारी सामने नहीं आई है। संबंधित व्यक्ति की शैक्षणिक अंकसूची और बैंक पासबुक में भी 'राष्ट्रपति' नाम ही दर्ज है। इस तरह देश के सर्वोच्च सांविधानिक पद से जुड़ा शब्द एक व्यक्ति की निजी पहचान बन गया है। बड़ा सवाल-क्या कोई नीति बनेगी राष्ट्रपति सचिवालय द्वारा सौरव मिश्रा की याचिका को संबंधित विभागों को भेजे जाने का अर्थ कानून बनाने की स्वीकृति देना नहीं है। अभी याचिका के आधार पर किसी नए कानून या नियम को मंजूरी मिलने की कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। अब गृह मंत्रालय और अन्य संबंधित केंद्रीय विभागों की ओर से की जाने वाली प्रतिक्रिया और निर्णय महत्वपूर्ण होंगे। यह देखना है कि संबंधित मंत्रालय इस मांग पर क्या निर्णय लेते हैं और क्या सांविधानिक पदों से जुड़े शब्दों के व्यक्तिगत उपयोग को लेकर कोई नीति बनती है।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Oct 18, 2026, 12:49 IST
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