ईरान को डर क्यों नहीं लगता?: अमेरिकी सैन्य घेरेबंदी, इस्राइल-ब्रिटेन खिलाफ, लेकिन खामेनेई के माथे पर शिकन नहीं

अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने पूरी ताकत झोंक दी है। ईरान को पत्थरों के युग में पहुंचाने की धमकी देने से बाज नहीं आ रहे हैं। इस्राइल अमेरिका की सीटी का इंतजार कर रहा है। ब्रिटेन भी हमले में साथ देगा, लेकिन ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह खामेनेई के माथे पर इसको लेकर कोई शिकन नहीं है। नर्व वॉर में कहीं भी झुकने का संकेत नहीं दे रहे हैं। कारण क्या है अमेरिका के राष्ट्रपति हर ढंग से ईरान को धमका रहे हैं। खामेनेई सत्ता परिवर्तन की मंशा जाहिर कर रहे हैं। राष्ट्रपति ट्रंप वैसे भी दबाव बनाने की कला में माहिर हैं। ट्रंप की मंशा है कि इस दबाव में ईरान अपने यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को रोक दे। परमाणु कार्यक्रम को व्यवहारिक रूप से अंतरराष्ट्रीय एजेंसी के दायरे में लाए। हाइपरसोनिक मिसाइल जैसे घातक कार्यक्रम से परहेज करे। दरअसल वह नख, दंत विहीन ईरान चाहते हैं। जबकि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई एक सीमा के बाद झुकने के लिए तैयार नहीं हैं। ट्रंप इस बहाने दुनिया को संदेश दे रहे हैं कि वह ईरान पर हमला नहीं करना चाहते, लेकिन ईरान उन्हें मजबूर कर रहा है। ईरान के नेता संदेश दे रहे हैं कि अमेरिका अनैतिक दादागिरी कर रहा है। अमेरिका नैतिक मर्यादा का पालन करे तो रास्ता निकले। खामेनेई कहते हैं कि उनका देश अनैतिक दादागिरी के आगे झुकने को तैयार नहीं है। पहले बात अमेरिका के तैयारी की ईरान के आसमान पर अमेरिका की निगहबानी है। उसके तीन तरफ समुद्र क्षेत्र में अमेरिकी पहरा है। परमाणु ईधन से चलने वाला विमान वाहक पोत अब्राहम लिंकन ओमान के पास अरब सागर में तैनात है। दुनिया का सबसे बड़ा विमान वाहक पोत यूएसएस जेराल्ड आर फोर्ड भी मार्च के पहले सप्ताह तक पहुंच जाएगा। ये अमेरिका के समुद्र में तैरने वाले दो चलते-फिरते युद्ध के मैदान हैं। जिनकी क्षमता किसी भी देश के सामरिक संतुलन को बिगाड़ देने की है। यह सभी अत्याधुनिक युद्ध तकनीक, उन्नत फाइटर जेट, हेलीकाप्टर, रेडार, इलेक्ट्रानिक वारफेयर प्रणाली, लाजिस्टिक सपोर्ट चेन समेत सैन्य आवश्यकताओं से पूर्ण हैं। एक दर्जन से अधिक नौसैनिक विध्वंसक, फ्रिगेट, युद्धपोत, पनडुब्बी, पानी के भीतर के टोही उपकरण हर हरकत पर नजर रख रहे हैं। जार्डन, सऊदी अरब, कतर जैसे देशों के एयरबेस पर अमेरिका ने एफ-35, एफ-15, एफ-22, एफ-16 फाइटर जेट तैनात कर रखे हैं। ईरान पर निगरानी, वॉर को बेअसर करने, धारदार घातक हमला करने के लिए थॉड प्रणाली, पैट्रिएट मिसाइल प्रतिरक्षी प्रणाली, ई-3 सेन्ट्री अवाक्स तैनात हैं। कतर, बहरीन, यूएई और जार्डन में 40-50 हजार अमेरिकी सैनिकों को बस एक हुक्म मिलने की देरी है। अमेरिका ईरान की हर गतिविधि पर नजर रखने के लिए कृतिम उपग्रहों को केन्द्रित कर चुका है। सामरिक और रणनीतिक विशेषज्ञों का अनुमान है कि बात नहीं बनी तो 10-15 मार्च के आसपास अमेरिका ईरान पर हमले की शुरुआत कर सकता है। अमेरिकी सैन्य बलों के आक्रामक होते ही इस्राइल ईरान पर हमला करने में जरा भी देर नहीं करेगा। अब बात ईरान कीक्या है ईरान की ताकत ईरान की सीमा तुर्किए, इराक, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, तुर्कमेनिस्तान से घिरी है। मलक्का जल डमरू(स्टेट ऑफ हार्मुज) के मुहाने पर बसा ईरान इसे बड़ी आसानी से ब्लाक कर सकता है। लाल सागर का क्षेत्र ईरान और उसके प्रक्सी के करीब-करीब नियंत्रण में रहता है। ईरान की भौगोलिक स्थिति और यहां के पहाड़ इसे काफी सुरक्षित बनाते हैं। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह खामेनेई की सबसे बड़ी ताकत वहां की जनता में अमेरिका से नाराजगी और खामेनेई के साथ एकजुटता है। अपने देश में क्रांति करने वाले खामेनेई ने बाद में इसके पॉवर स्ट्रक्चर को तरीके से डिजाइन किया। इस्लामिक रीवोल्यूशनरी गार्ड उनकी सबसे बड़ी ताकत हैं। हर मुसीबत के समय में अपने इस वफादार विंग को वह सुरक्षा की कमान देकर कमान एंड कंट्रोल सेन्टर में भूमिगत हो जाते हैं। माना यह जा रहा है खामेनेई के गले को यह आवाज उनका परमाणु हथियार कार्यक्रम और उसे ले जाने में सक्षम हाई स्पीड की हाइपरसोनिक मिसाइल प्रणाली दे रही है। खामेनेई इसी के बूते अमेरिका को धमकाते हैं। उसकी मिसाइलें 2000 किमी तक मार करने में सक्षम हैं। इनकी जद में इस्राइल और लगभग पूरा मध्य एशिया है। फतह-1, फतह-2 हाइपरसोनिक की गति मैक-15(ध्वनि से 15 गुणा अधिक) बताई जाती है। खैबर मिसाइल तबाही और दहशत के लिए जानी जाती है। सेजिल-2 का प्रयोग ईरान ने पिछली बार पहली बार इस्राइल के खिलाफ किया था। इसे रोक पाने में अमेरिका और इस्राइल न केवल नाकाम हुए बल्कि सभी कलाबाजियां धरी की धरी रह गईं। इसके अलावा उसके पास कई किस्म के घातक ड्रोन हैं। रूस की एस-400 मिसाइल प्रतिरक्षा प्रणाली समेत अन्य हैं। हालांकि वायुसेना समेत अन्य ताकत में अमेरिका के मुकाबले ईरान कहीं नहीं ठहरता। नर्व वॉर क्या होगा अंत यह सवाल भविष्य के गर्भ में है। फिलहाल नर्व वार चल रहा है। अमेरिका की धमकी है कि ईरान रास्ते पर नहीं आया तो उसे सुपर कब्रिस्तान बना देंगे। ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई कहते हैं कि 47 साल से अमेरिका का ऐसा सपना न तो पूरा हुआ और न होगा। अमेरिका ने अनाधिकार जुर्रत की तो लड़ाई क्षेत्र में फैलेगी और ईरान मजा चखाएगा। इस बीच में दोनों देशों के कूटनीति के सारथी वार्ता के जरिए समाधान की कोशिश में भी लगे हैं। माना जाता है कि ईरान को भरोसा है कि उसका साथ रूस और चीन जैसे देश देंगे और वह अमेरिका के मंसूबे कामयाब नहीं होने देगा।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Feb 20, 2026, 19:52 IST
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