एमपी: एक्सप्रेस-वे पर हादसे रोकने का नया प्लान, कैमरों से पहले पकड़ी जाएगी ओवरस्पीड और ड्राइवर की लापरवाही

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर हादसा होने के बाद राहत पहुंचाने की व्यवस्था तो पहले से है, अब हादसा होने से पहले उसे रोकने पर जोर दिया जा रहा है। मध्यप्रदेश के करीब 240 किलोमीटर हिस्से में तीन साल के दौरान करीब 1300 से ज्यादा हादसों के बाद नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एचएचएआई) निगरानी व्यवस्था को अगले स्तर पर ले जाने की तैयारी में है। इसमें कैमरों से वाहनों की रफ्तार पर नजर रखने से लेकर ड्राइवर के नींद में होने की स्थिति में उसे अलर्ट करने तक के उपाय शामिल हैं। एक्सप्रेस-वे पर अभी कैमरे, रडार, पेट्रोलिंग वाहन और दूसरी सुरक्षा व्यवस्थाएं मौजूद हैं। इसके बावजूद हादसों का सिलसिला जारी है। ऐसे में अब सिर्फ घटना की निगरानी करने के बजाय वाहन की गति और ड्राइवर के व्यवहार को लगातार मॉनिटर करने की दिशा में काम किया जा रहा है। ये भी पढ़ें-11 करोड़ का फर्जीवाड़ा पकड़ा:एक ही व्यक्ति की चार फर्मों ने GeM पर लगाई बोली, महंगे दाम पर बेचे कंप्यूटर-UPS कैमरे सिर्फ रिकॉर्ड नहीं करेंगे, कार्रवाई भी कराएंगे एनएचएआई एक्सप्रेस-वे पर लगे कैमरों का एक्सेस पुलिस को देने की तैयारी कर रहा है। अभी इन कैमरों से मिलने वाली जानकारी सीधे पुलिस की कार्रवाई से नहीं जुड़ी है। एक्सेस मिलने के बाद कैमरों से वाहनों की गति रिकॉर्ड की जा सकेगी और निर्धारित सीमा से ज्यादा रफ्तार वाले वाहनों पर ऑनलाइन चालान की कार्रवाई की जा सकेगी। इस व्यवस्था का मकसद यह है कि ओवरस्पीडिंग के मामले में पुलिस को मौके पर वाहन रोकने का इंतजार न करना पड़े। कैमरे वाहन की गति और नंबर प्लेट रिकॉर्ड करेंगे और उसी आधार पर कार्रवाई की जा सकेगी। ये भी पढ़ें-एमपी:जहां-जहां पड़े कान्हा के चरण,वहां बनेगा श्रीकृष्ण तीर्थ; सीएम मोहन यादव बोले-मध्यप्रदेश से रहा गहरा नाता लंबी सड़क पर नींद बनी बड़ी चुनौती एक्सप्रेस-वे की डिजाइन ही ऐसी है कि लंबी दूरी तक सड़क सीधी और अपेक्षाकृत खाली रहती है। यही सुविधा कई बार ड्राइवर के लिए जोखिम बन जाती है। लगातार एक जैसी सड़क पर लंबे समय तक वाहन चलाने से थकान और नींद की स्थिति बन सकती है। एनएचएआई और निर्माण एजेंसी अब ऐसे सिस्टम पर भी काम कर रहे हैं, जिससे ड्राइवर को नींद आने या उसकी सतर्कता कम होने की स्थिति में अलर्ट किया जा सके। यह व्यवस्था खास तौर पर लंबी दूरी के सफर में हादसों को रोकने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ये भी पढ़ें-मध्य प्रदेश:47 साल बाद भी नर्मदा का पूरा पानी नहीं ले पाया MP, अब 2031 तक हर बूंद के इस्तेमाल की योजना रफ्तार के साथ लेन बदलना भी खतरा एक्सप्रेस-वे पर वाहनों के लिए अलग-अलग लेन निर्धारित हैं। कार के लिए अधिकतम 120, बस के लिए 100 और ट्रक के लिए 80 किलोमीटर प्रति घंटे की गति सीमा है। समस्या तब बढ़ती है जब तेज रफ्तार वाहन अचानक लेन बदलते हैं या गलत तरीके से ओवरटेक करते हैं। एचएचएआई के सामने चुनौती सिर्फ ओवरस्पीड रोकने की नहीं, बल्कि गलत लेन में चलने और अचानक लेन बदलने वाले वाहनों की पहचान करने की भी है। इसी वजह से निगरानी सिस्टम को ज्यादा सक्रिय बनाने पर जोर दिया जा रहा है। एक्सप्रेस-वे पर निगरानी का बड़ा नेटवर्क हादसों से निपटने के लिए एक्सप्रेस-वे पर 25 एंबुलेंस, 27 क्रेन और 27 रूट पेट्रोल वाहन तैनात हैं। निगरानी के लिए 901 PTZ कैमरे, 810 ANPR कैमरे और 160 रडार लगाए गए हैं। इसके अलावा 150 एक्टिव स्पीड डिस्प्ले, 262 वीडियो घटना पहचान प्रणाली और 82 परिवर्तनीय संदेश संकेत भी लगाए गए हैं।अब इन संसाधनों का इस्तेमाल केवल हादसा होने के बाद प्रतिक्रिया देने के लिए नहीं, बल्कि हादसे की आशंका पहले पहचानने और वाहन चालक पर तत्काल कार्रवाई करने के लिए करने की तैयारी है। ये भी पढ़ें-मध्यप्रदेश:बालाघाट में बच्चों की मौत के बाद सीएमएचओ हटाए गए, डिंडौरी से डॉ. मनोज पांडेय संभालेंगे जिम्मेदारी एमपी के हिस्से में 80 मौतें तीन साल में मध्यप्रदेश के करीब 240 किलोमीटर हिस्से में हुए लगभग 1300 से ज्यादा हादसों में करीब 80 लोगों की मौत हुई है, जबकि दो हजार से अधिक लोग घायल हुए। पूरे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर इसी अवधि में करीब 400 लोगों की जान गई है। हादसों के पीछे ओवरस्पीड, गलत लेन और ड्राइवर को नींद आने जैसे कारण सामने आए हैं।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Sep 02, 2026, 23:31 IST
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