नई लैब, नई सोच: आईआईटीआर ने भविष्य की ओर बढ़ाया कदम
लखनऊ। भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान में शनिवार को बियॉन्ड डायमंड जुबिली कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें संस्थान के भविष्य के शोध कार्यों और नए सहयोगों की दिशा को बताया गया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि सीएसआईआर की महानिदेशक डॉ. एन. कलैसेल्वी रहीं।डॉ. कलैसेल्वी ने संस्थान में नई आणविक विषविज्ञान प्रयोगशाला का उद्घाटन किया और नमो-पटल परियोजना की आधारशिला रखी। यह केंद्र दवाओं, रसायनों और अन्य उत्पादों की सुरक्षा जांच के लिए काम करेगा। इसके साथ ही अलीगंज स्थित नए अतिथि गृह का भी उद्घाटन किया गया। उन्होंने दृष्टि नामक इमेजिंग सुविधा की सराहना की, जहां आधुनिक माइक्रोस्कोप से सूक्ष्म स्तर पर शोध किया जा सकेगा। यह सुविधा प्रदेश के वैज्ञानिकों और शोध छात्रों के लिए उपयोगी होगी।कार्यक्रम में निर्माण सुविधा की शुरुआत की गई, जिसका उद्देश्य शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स को उनके विचारों को उपयोगी तकनीक में बदलने में मदद करना है। संस्थान ने राम मनोहर लोहिया अस्पताल, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय सहित चार संस्थानों के साथ शैक्षणिक सहयोग के लिए समझौते किए।इस अवसर पर आईआईटीआर को आईएसओ 17034 के तहत विशेष मान्यता मिलने की घोषणा की गई। साथ ही पॉपफास-गार्ड नामक नई जल शुद्धिकरण तकनीक का लोकार्पण किया गया, जो पानी से हानिकारक रसायनों को प्रभावी ढंग से हटाने में सक्षम है। संस्थान के निदेशक डॉ. भास्कर नारायण ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Jan 17, 2026, 19:47 IST
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