Bihar: एसकेएमसीएच में पहली बार मिला विल्सन रोग का मरीज, 20 हजार में किसी एक को होती है यह दुर्लभ बीमारी

मुजफ्फरपुर के श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज अस्पताल (एसकेएमसीएच) में इलाज के दौरान एक 16 वर्षीय किशोर में विल्सन रोग की पुष्टि हुई है। मरीज सीतामढ़ी जिले का रहने वाला है। डॉक्टरों का कहना है कि यह बेहद दुर्लभ बीमारी है और लगभग 20 हजार लोगों में किसी एक को ही होती है। जांच में हुई बीमारी की पुष्टि चिकित्सकों के अनुसार मरीज को पहले पेट दर्द की शिकायत थी। जांच के दौरान उसके शरीर में विल्सन रोग के लक्षण मिले और बाद में जांच में इसकी पुष्टि हो गई। फिलहाल मरीज का इलाज विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में किया जा रहा है। क्या है विल्सन रोग डॉक्टरों के अनुसार विल्सन रोग एक दुर्लभ जेनेटिक बीमारी है। इस बीमारी में शरीर की तांबा (कॉपर) को सही तरीके से नियंत्रित करने की क्षमता प्रभावित हो जाती है। इसके कारण शरीर के लीवर, मस्तिष्क और आंखों जैसे महत्वपूर्ण अंगों में तांबा जमा होने लगता है, जिससे गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं। एक साल से थी बीमारी एसकेएमसीएच के उपाधीक्षक डॉ. सतीश कुमार सिंह ने बताया कि मरीज करीब एक साल से इस बीमारी से पीड़ित था। बीमारी के कारण उसके व्यवहार में चिड़चिड़ापन भी आ गया था। अल्ट्रासाउंड में लीवर की समस्या आई सामने डॉ. सतीश कुमार सिंह ने बताया कि जब मरीज के पेट का अल्ट्रासाउंड कराया गया तो उसके लीवर में गंभीर समस्या दिखाई दी। इसके बाद डॉक्टरों को विल्सन रोग का संदेह हुआ और आगे की जांच में इसकी पुष्टि हो गई। अब मरीज का लगातार इलाज किया जा रहा है और उसे नियमित दवाएं दी जा रही हैं। समय-समय पर उसकी जांच भी की जाएगी। ये भी पढ़ें-Bihar:पहले बच्चे के जन्म का था इंतजार, पति ने गर्भवती पत्नी की ले ली जान; हत्या के बाद किसे लगाया फोन विशेषज्ञ डॉक्टर कर रहे निगरानी मरीज का इलाज कई विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम कर रही है। इसमें आई एक्सपर्ट सहित अन्य विशेषज्ञ चिकित्सक लगातार उसकी निगरानी कर रहे हैं। क्या हैं इस बीमारी के लक्षण डॉक्टरों के अनुसार इस बीमारी के प्रमुख लक्षणों में लगातार पेट दर्द, शरीर में कंपकंपी, व्यवहार में अचानक बदलाव, भूख कम लगना और आंखों में तांबा जमा होने के कारण रिंग जैसी आकृति बनना शामिल है। आनुवंशिक बीमारी है विल्सन रोग चिकित्सकों ने बताया कि यदि माता और पिता दोनों में दोषपूर्ण जीन मौजूद हो, तो उनके बच्चे में यह बीमारी होने की संभावना रहती है। इसलिए इसे एक दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी माना जाता है। पहली बार मिला ऐसा मरीज एसकेएमसीएच के डॉक्टरों के अनुसार मेडिकल कॉलेज में पहली बार विल्सन रोग का मरीज सामने आया है। इस बीमारी का इलाज काफी महंगा होता है और इसकी दवाएं भी बेहद खर्चीली होती हैं। अस्पताल ने मुफ्त दी 60 हजार रुपये की दवा मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए एसकेएमसीएच प्रशासन ने उसे लगभग 60 हजार रुपये की दवाएं मुफ्त उपलब्ध कराई हैं। फिलहाल डॉक्टर लगातार उसकी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jun 26, 2026, 19:16 IST
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