Cyber Crime: निष्क्रिय बैंक खाते क्यों बन रहे साइबर अपराधियों का हथियार, क्या जरा सी लापरवाही भारी पड़ेगी?

डिजिटल बैंकिंग के दौर में बैंक खाता सिर्फ पैसे रखने का माध्यम नहीं है, बल्कि आपकी वित्तीय पहचान से भी जुड़ा है। इसी वजह से लंबे समय से इस्तेमाल नहीं किए जा रहे बैंक खाते साइबर अपराधियों के लिए बड़ा मौका बन सकते हैं। ऐसे खातों का इस्तेमाल डिजिटल अरेस्ट, पार्ट-टाइम जॉब फ्रॉड और बेटिंग एप से जुटाई गई अवैध रकम को इधर-उधर भेजने के लिए किया जा रहा है। मनी म्यूल अकाउंट को आसान भाषा में ऐसा खाता समझ सकते हैं, जिसका इस्तेमाल ठग किसी और के अवैध पैसे को आगे पहुंचाने के लिए करते हैं। टेक कंपनी mFilterIt ने मार्च 2026 में 5,24,121 म्यूल खातों की पहचान किए जाने की जानकारी दी है। यानी मामला छोटा नहीं है और बैंक खाताधारकों के लिए सतर्क रहना जरूरी है। अगर आपके खाते का इस्तेमाल धोखाधड़ी में हुआ तो क्या होगा सबसे बड़ी परेशानी यह है कि अगर किसी साइबर अपराध की रकम आपके खाते में पहुंचती है तो जांच की शुरुआती कड़ी आपके बैंक खाते तक आ सकती है। भले ही खाताधारक ने खुद कोई अपराध न किया हो, लेकिन खाता उसके नाम पर होने के कारण उससे पूछताछ और जांच हो सकती है। साइबर सेल की कार्रवाई में खाता फ्रीज किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में सामान्य बैंकिंग गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। दिए गए विवरण के अनुसार पैन और आधार से जुड़ी वित्तीय गतिविधियों पर भी असर पड़ने की आशंका रहती है, जिससे भविष्य में कर्ज या क्रेडिट कार्ड लेने में परेशानी हो सकती है। इसलिए किसी भी व्यक्ति को अपना बैंक खाता, पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड, नेट बैंकिंग जानकारी या अन्य बैंकिंग साधन किसी दूसरे व्यक्ति को इस्तेमाल करने के लिए नहीं देना चाहिए। निष्क्रिय बैंक खाता कब माना जाता है और इसमें क्या जोखिम है आरबीआई के अनुसार बचत या चालू खाते में ग्राहक की ओर से दो साल से अधिक समय तक कोई लेनदेन नहीं होने पर उसे निष्क्रिय या इनऑपरेटिव माना जाता है। बैंक की ओर से ब्याज जमा होना या सेवा शुल्क काटा जाना ग्राहक की ओर से किया गया लेनदेन नहीं माना जाता। निष्क्रिय खाते का मतलब यह नहीं है कि उसमें जमा पैसा खत्म या जब्त हो गया है। इसका मतलब यह है कि बैंक लेनदेन की अनुमति देने से पहले अतिरिक्त जांच कर सकता है। समस्या तब बढ़ती है जब खाताधारक लंबे समय तक खाते पर ध्यान ही नहीं देता। मोबाइल नंबर या ईमेल पर आने वाले अलर्ट नजरअंदाज होने लगते हैं और खाते की गतिविधियों की नियमित निगरानी नहीं होती। इसी लापरवाही का फायदा साइबर अपराधी उठा सकते हैं। ठग निष्क्रिय खातों तक कैसे पहुंच सकते हैं लंबे समय से इस्तेमाल नहीं किए जा रहे खातों पर खाताधारक की निगरानी कम हो जाती है। इसी स्थिति का फायदा अपराधी उठा सकते हैं। दिए गए विवरण के अनुसार फिशिंग या बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत जैसे तरीकों से बैंक खातों से जुड़ी जानकारी अपराधियों तक पहुंचने का खतरा रहता है। कई बार ग्रामीण या कम जानकारी रखने वाले लोगों को थोड़े पैसे देने का लालच देकर उनके खाते की नेट बैंकिंग जानकारी, पासबुक या एटीएम कार्ड इस्तेमाल करने के लिए लिया जा सकता है। बाद में उसी खाते से अवैध रकम का लेनदेन किया जाता है। खाताधारक को शुरुआत में इसकी जानकारी नहीं होती, लेकिन जांच होने पर खाता उसके नाम पर होने के कारण परेशानी उसी के सामने आ सकती है। इसलिए किसी भी लालच में बैंक खाता दूसरे व्यक्ति को इस्तेमाल करने देना बेहद जोखिम भरा है। अगर खाता निष्क्रिय हो गया है तो उसे दोबारा कैसे चालू करें अगर आपका बैंक खाता निष्क्रिय हो गया है तो उसे फिर से सक्रिय कराया जा सकता है। इसके लिए खाताधारक अपनी होम ब्रांच या बैंक की उपलब्ध सुविधा के अनुसार दूसरी शाखा में आवेदन कर सकता है और केवाईसी प्रक्रिया पूरी कर सकता है। बैंक में सुविधा उपलब्ध होने पर वीडियो आधारित ग्राहक पहचान प्रक्रिया का विकल्प भी अपनाया जा सकता है। खाता सक्रिय होने के बाद मोबाइल नंबर, ईमेल, पैन, पता और नामांकन जैसी जानकारी की जांच कर लेना जरूरी है। इसके साथ ही हाल के लेनदेन की जानकारी भी देखनी चाहिए। अगर खाते में कोई ऐसी एंट्री दिखाई देती है जिसे आपने नहीं किया है तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बैंक को तुरंत इसकी जानकारी देनी चाहिए और साइबर अपराध की आशंका होने पर राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर सूचना देनी चाहिए। क्या पुराने और बेकार बैंक खाते को बंद करा देना बेहतर है जिस बैंक खाते की भविष्य में जरूरत नहीं है और जिसका वेतन, ईएमआई, निवेश, बीमा प्रीमियम, सरकारी लाभ या कर भुगतान जैसी किसी जरूरी सेवा से संबंध नहीं है, उसे औपचारिक रूप से बंद कराना बेहतर विकल्प हो सकता है। केवल खाते में पैसा निकालकर उसे शून्य कर देना खाता बंद करना नहीं माना जाता। खाता बंद कराने से पहले उसमें मौजूद रकम निकालनी चाहिए। अगर कोई स्थायी निर्देश या ऑटो डेबिट लगा है तो उसे दूसरे खाते में स्थानांतरित करना चाहिए। जारी किए गए चेक की स्थिति भी जांचनी चाहिए। इसके बाद बैंक की निर्धारित प्रक्रिया के तहत खाता बंद कराना चाहिए। इससे ऐसे खाते के लंबे समय तक अनदेखे पड़े रहने का जोखिम कम किया जा सकता है। क्या हर बैंक खाते पर नियमित नजर रखना जरूरी है हां, अपने सभी बैंक खातों की समय-समय पर समीक्षा करना वित्तीय सुरक्षा का जरूरी हिस्सा है। साल में कम से कम एक बार यह जरूर देखना चाहिए कि आपके नाम पर कितने बैंक खाते हैं और उनमें कौन-कौन से खाते वास्तव में इस्तेमाल हो रहे हैं। चालू खातों में मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी अपडेट रखना चाहिए। एसएमएस और दूसरे बैंक अलर्ट सक्रिय रहने चाहिए। बैंक स्टेटमेंट की नियमित जांच करने से किसी अनजान लेनदेन का पता समय रहते चल सकता है। जिन खातों की जरूरत है, उन्हें नियमित रूप से खुद इस्तेमाल करना चाहिए। साथ ही बैंकिंग से जुड़ी गोपनीय जानकारी को सुरक्षित रखना चाहिए। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर खाते में पैसा मंगाना या भेजना भी जोखिम पैदा कर सकता है। खाते को म्यूल बनने से रोकने के लिए किन बातों का ध्यान रखें जिन खातों की जरूरत नहीं है, उन्हें बैंक की निर्धारित प्रक्रिया के तहत बंद कराएं। जरूरी खाते को सक्रिय रखें और समय-समय पर स्वयं लेनदेन की स्थिति जांचें। मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी बैंक रिकॉर्ड में अपडेट रखें। एसएमएस और अन्य बैंक अलर्ट हमेशा सक्रिय रखें। बैंक स्टेटमेंट नियमित रूप से जांचें और अनजान लेनदेन पर तुरंत बैंक को सूचना दें। पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड और नेट बैंकिंग की जानकारी किसी दूसरे व्यक्ति को इस्तेमाल के लिए न दें। किसी अनजान व्यक्ति के कमीशन या पैसे देने के लालच में अपना बैंक खाता इस्तेमाल करने की अनुमति न दें। ओटीपी और बैंकिंग से जुड़ी गोपनीय जानकारी किसी से साझा न करें। म्यूल अकाउंट से बचने के लिए वित्तीय स्वच्छता क्यों जरूरी है म्यूल अकाउंट अपने-आप अपराध का माध्यम नहीं बनता, लेकिन खाते की लंबे समय तक अनदेखी जोखिम जरूर बढ़ा सकती है। खासकर ऐसे पुराने खातों पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है जिनका इस्तेमाल नहीं हो रहा और जिनके अलर्ट भी खाताधारक नहीं देखता। वित्तीय स्वच्छता का सीधा नियम है कि जितने बैंक खाते हों, उनकी जानकारी खुद के पास स्पष्ट हो और हर खाते की गतिविधि पर नजर रखी जाए। अगर किसी खाते की जरूरत नहीं है तो उसे सिर्फ खाली छोड़ने के बजाय बैंक की प्रक्रिया के तहत बंद कराना बेहतर है। याद रखें, बैंक खाता आपके नाम और पहचान से जुड़ा होता है। इसलिए उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी आपकी है। किसी दूसरे को खाते का इस्तेमाल करने देना या बैंकिंग जानकारी साझा करना भविष्य में बड़ी कानूनी और वित्तीय परेशानी खड़ी कर सकता है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Aug 10, 2026, 05:47 IST
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