मोमेंटम इन्वेस्टिंग: ट्रेंड्स को मुनाफे में बदलने की रणनीति, शेयर पहचानने के लिए करें इन फिल्टर का इस्तेमाल
बचपन से हमें सिखाया गया है कि सस्ता खरीदो और महंगा बेचो। निवेश की दुनिया में इसे वैल्यू इन्वेस्टिंग कहते हैं। आज के दौर में एक नई और आक्रामक रणनीति मोमेंटम इन्वेस्टिंग की खूब चर्चा है। इसका मंत्र है, महंगा खरीदो और उससे भी ज्यादा महंगे पर बेचो। दिग्गज एक्सपर्ट कहते हैं, जब बाजार किसी शेयर को ऊपर ले जा रहा है, तो बाजार से बहस मत करो, उसके साथ चलो। यह मोमेंटम इन्वेस्टिंग का मूल मंत्र है। मोमेंटम निवेशक अस्थिरता को दोस्त मानते हैं। स्थिर बाजार में ज्यादा कमाई नहीं होती, उतार-चढ़ाव वाले शेयर ही अल्फा रिटर्न पैदा करने का मौका देते हैं। मोमेंटम इन्वेस्टिंग का सीधा सिद्धांत है-महंगा खरीदो और उससे भी कहीं ज्यादा महंगे पर बेचो (Buy High, Sell Higher)। यह उन खिलाड़ियों के लिए है, जो चलती ट्रेन में चढ़ना जानते हैं और सही स्टेशन पर उतरना भी। क्यों है 2026 की यह सबसे हॉट रणनीति आज के दौर में डाटा और सूचनाएं बिजली की रफ्तार से दौड़ती हैं। मोमेंटम इन्वेस्टिंग इसी रफ्तार का फायदा उठाती है। पिछले 15 वर्षों का रिकॉर्ड उठाकर देखिए, जहां Nifty 50 ने करीब 13.2% का रिटर्न दिया, वहीं Nifty 200 Momentum 30 Index ने 23.8% का रिटर्न देकर सबको चौंका दिया। ये भी पढ़ें:सोने ने बदल दी किस्मत:बेतहाशा तेजी से अमीर हुए भारतीय परिवार, संपत्ति 117 लाख करोड़ बढ़ी मोमेंटम इन्वेस्टिंग कैसे काम करती है निवेशक उन शेयरों की तलाश करते हैं, जिन्होंने पिछले 3-12 महीनों में लगातार ऊपर की ओर रुझान दिखाया है। यह माना जाता है कि मजबूत मांग के कारण कीमतें बढ़ती रहेंगी। बाजार प्रतिभागी अक्सर जीतने वाले शेयरों के पीछे भागते हैं और हारने वालों को बेचते हैं। यह भेड़चाल ऐसी प्रवृत्तियां पैदा करती है, जो हफ्तों या महीनों तक बनी रह सकती हैं। वैल्यू इन्वेस्टिंग के विपरीत, जो वर्षों तक चल सकती है, मोमेंटम रणनीतियां कम समय सीमा पर काम करती हैं। मोमेंटम स्टॉक्स को पहचानने के लिए करें इन 4 फिल्टर का इस्तेमाल RSI (Relative Strength Index): अगर किसी शेयर का RSI 60 के ऊपर है, तो उसमें स्वस्थ मोमेंटम है। लेकिन 70 के पार जाते ही सावधान हो जाएं, क्योंकि यह ओवरबॉट जोन है। मूविंग एवरेज : शेयर 50-डे और 200-डे के एवरेज प्राइस से ऊपर चल रहा है, तो यह मजबूती का संकेत है। वॉल्यूम : बढ़ती कीमतों के साथ ट्रेडिंग वॉल्यूम भी बढ़ रहा है, तो यह निवेशकों की वास्तविक रुचि दर्शाता है। सेक्टर की ताकत: पूरा सेक्टर प्रदर्शन कर रहा है, तो सफलता की संभावना ज्यादा। मुनाफे को लॉक करने के लिए जरूरी है स्टॉप-लॉस का उपयोग स्टॉप-लॉस ऑर्डर मोमेंटम इन्वेस्टिंग के लिए सुरक्षा जाल है। यदि शेयर की कीमत पूर्व-निर्धारित स्तर से नीचे गिरती है, तो ये अपने आप बिक्री कर देते हैं, जिससे लाभ सुरक्षित रहता है और नुकसान सीमित होता है। ट्रेलिंग स्टॉप-लॉस: जैसे-जैसे शेयर बढ़ता है, यह ऊपर की ओर होता जाता है, जिससे आगे के लाभ की गुंजाइश बनी रहती है और मौजूदा मुनाफा लॉक होता है। फिक्स्ड स्टॉप-लॉस : नुकसान को सीमित करने के लिए खरीद मूल्य से नीचे एक पूर्व-निर्धारित प्रतिशत (जैसे 8-10%)। उदाहरण के लिए, यदि आपने 100 रुपये में एक शेयर खरीदा और 10% पर ट्रेलिंग स्टॉप-लॉस सेट किया, तो कीमत 90 रुपये होने पर ऑर्डर ट्रिगर हो जाएगा। यदि शेयर 120 रुपये तक बढ़ जाता है, तो स्टॉप-लॉस बढ़कर 108 हो जाएगा, जिससे आपका मुनाफा सुरक्षित रहेगा। शेयर की तेजी को पकड़ो, शेयर को नहीं मोमेंटम इन्वेस्टर वह नहीं है, जो शेयर से प्यार करे, बल्कि वह है, जो सिर्फ उसकी रफ्तार से प्यार करे। जैसे ही रफ्तार थमे, ईगो छोड़कर तुरंत बाहर निकल आएं। यह उनको फायदा पहुंचाता है, जो मजबूत ट्रेंड्स को जल्दी पहचान लेते हैं और मोमेंटम खत्म होने से पहले बाहर निकल जाते हैं। मोमेंटम इन्वेस्टिंग कमजोर दिल वालों के लिए नहीं है। मोमेंटम इन्वेस्टिंग के फायदे यह बढ़ते बाजार में आपके रिटर्न की रफ्तार को रॉकेट बना सकता है। यह व्यावहारिक मनोविज्ञान का फायदा उठाता है, इसलिए अक्सर छोटे से मध्यम समय में सटीक बैठता है। ये भी पढ़ें:विदेशी मुद्रा भंडार में उछाल, जानिए कितने अरब डॉलर हुआ और कितने महीनों के लिए है पर्याप्त कुछ जोखिम भी हैं अत्यधिक निगरानी: आपको हर पल ट्रेंड पर नजर रखनी होगी। अचानक यू-टर्न: वैश्विक घटना या नीतिगत बदलाव से मोमेंटम खत्म। हाई ट्रांजेक्शन कॉस्ट: बार-बार खरीद-बेच से ब्रोकरेज व टैक्स बढ़ता है।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Jan 19, 2026, 04:40 IST
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