Una News: घंडावल की मीना कचनार के अचार से कर रहीं अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत
नारी (ऊना)। जब मन में कार्य करने का जज्बा और लगन हो तो असंभव काम भी संभव हो जाते हैं। घंडावल क्षेत्र में जंगलों में पाई जाने वाली कचनार कलियां और फूल और जिसे स्थानीय भाषा में कराली भी कहा जाता है, को इकट्ठा करके उसमें लहसुन, अदरक, राई, धनिया, मेथी डालकर एक प्रकार का अचार बनाया जा रहा है। यह अचार डायबिटीज, बीपी, पेट खराब के एक औषधि की तरह है। क्षेत्र की मीना कचनार का अचार बनाकर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं। मीना का कहना है कि इस कार्य के लिए 10 महिलाएं मेरे साथ जुड़ी हुई हैं जो कि जंगल से कचनार के फूल और कलियां इकट्ठा करके लाती हैं। इन्हें भी एक प्रकार का रोजगार मिला हुआ है। 600 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी उन्हें दी जाती है। इस औषधि रूपी अचार की ऑनलाइन भी बहुत डिमांड है। शहरी लोग खुद घर पर आकर अचार ले जा रहे हैं। इसकी कीमत 600 से 800 रुपये प्रति किलोग्राम है। यह केवल मेहनत का काम है। जो महिलाएं फूल और कलियां तोड़ कर लाती हैं, वे स्वयं भी इस कार्य से जुड़ गई हैं और प्रतिदिन तुड़ाई की मजदूरी के अलावा 500 से 700 रुपये कमा रही हैं। इन महिलाओं में पूजा देवी, पूनम रानी, सरोज देवी, और माला कुमारी शामिल हैं। मीना का कहना है कि इस अचार की मांग बहुत है। बड़ी मुश्किल से ही मांग पूरी की जा रही है क्योंकि इन्हें तोड़ना ही मुश्किल कार्य है। उसे घर पर ही तैयार करके बिक्री हो जाती है।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Mar 23, 2026, 19:19 IST
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