मेरा गांव मेरी शान : 20 साल से सूखे पड़े मनेठी के जोहड़, पशुओं के लिए भी नहीं बचा पानी
कुंड। मनेठी गांव में जल संरक्षण के पारंपरिक स्रोत रहे जोहड़ पिछले करीब 20 वर्षों से पानी को तरस रहे हैं। गांव में स्थित ऐतिहासिक पक्का वाला जोहड़ आज भी उपेक्षा का शिकार है। कभी वर्षा जल और नहरी पानी से लबालब रहने वाले जोहड़ अब सूखे पड़े हैं। इससे ग्रामीणों के साथ-साथ पशुपालकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।गांव में कुल तीन जोहड़ हैं लेकिन किसी भी जोहड़ में पानी नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि समय पर सफाई और पानी की आपूर्ति नहीं होने के कारण जोहड़ों का अस्तित्व धीरे-धीरे समाप्त होता जा रहा है। कई स्थानों पर झाड़ियां उग आई हैं और जोहड़ों की हालत खस्ता हो चुकी है।मनेठी गांव की जल व्यवस्था मुख्य रूप से नहरी पानी पर आधारित है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जोहड़ों में नियमित रूप से नहरी पानी छोड़ा जाए तो जल संरक्षण के साथ भूजल स्तर में भी सुधार हो सकता है। इसके अलावा गांव के पशुओं के लिए भी पानी की स्थायी व्यवस्था बन सकती है। प्रशासन से कई बार लगा चुके हैं गुहारग्रामीणों का कहना है कि वे कई बार प्रशासन और संबंधित विभागों से जोहड़ों की सफाई और उनमें पानी भरवाने की मांग कर चुके हैं। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। जोहड़ों के सुधारीकरण की उठी मांग ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गांव के तीनों जोहड़ों की सुधारीकरण की मांग की है। साथ कहा है कि उनकी नियमित सफाई करवाई जाए और नहरी पानी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए ताकि जल संरक्षण को बढ़ावा मिले और पशुओं तथा ग्रामीणों को राहत मिल सके। यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाली पीढ़ी गांव के इस ऐतिहासिक जल धरोहर को केवल कहानियों में ही सुन पाएंगी।पशुपालकों की बढ़ी चिंताजोहड़ों में पानी नहीं होने का सबसे अधिक असर पशुपालकों पर पड़ रहा है। गर्मी के मौसम में पशुओं को पानी पिलाने के लिए ग्रामीणों को वैकल्पिक इंतजाम करने पड़ते हैं। कई बार दूर-दराज क्षेत्रों से पानी लाना पड़ता है जिससे अतिरिक्त खर्च और परेशानी बढ़ जाती है।गांव के जोहड़ कभी हमारी पहचान हुआ करते थे। बरसात और नहरी पानी से ये सालभर भरे रहते थे लेकिन पिछले करीब 20 वर्षों से सूखे पड़े हैं। कई बार प्रशासन को शिकायत दी गई लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं हुआ। - अनिल यादवजोहड़ों में पानी नहीं होने से पशुपालकों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। गर्मी के दिनों में पशुओं को पानी पिलाने के लिए दूर-दूर से पानी लाना पड़ता है। इससे समय और पैसा दोनों खर्च होते हैं। यदि गांव के जोहड़ों में नियमित पानी रहे तो पशुओं के लिए बेहतर व्यवस्था हो सकती है और हमारी समस्याएं काफी हद तक कम हो जाएंगी।- सहीराम यादवमनेठी का पक्का वाला जोहड़ कभी गांव की शान माना जाता था लेकिन आज उसकी हालत बेहद खराब है। जोहड़ में झाड़ियां उग आई हैं और देखभाल के अभाव में इसका स्वरूप बिगड़ता जा रहा है। प्रशासन को जल्द सुध लेनी चाहिए ताकि इस ऐतिहासिक धरोहर को बचाया जा सके और आने वाली पीढ़ियां भी इसका महत्व समझ सकें।- रविंदर यादवगांव में तीन जोहड़ होने के बावजूद किसी में पानी नहीं है। पहले इनसे भूजल स्तर को भी फायदा मिलता था लेकिन अब स्थिति बिल्कुल उलट है। यदि जोहड़ों को दोबारा विकसित किया जाए और उनमें पानी की व्यवस्था की जाए तो जल संकट कम होगा। महिलाओं को भी पानी संबंधी परेशानियों से राहत मिल सकेगी।- जगदीश प्रजापत अनिल यादव अनिल यादव अनिल यादव अनिल यादव अनिल यादव
- Source: www.amarujala.com
- Published: Jun 09, 2026, 18:07 IST
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