गणतंत्र दिवस: परेड का मुख्य आकर्षण सेना के रोबोटिक म्यूल, जल्द दुर्गम इलाकों में छिपे आतंकियों का होगा खात्मा

इस बार कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस परेड का मुख्य आकर्षण सेना के रोबोटिक म्यूल भी होंगे। सेना के मुताबिक यह रोबोटिक म्यूल आने वाले दिनों में सैनिकों के लिए कॉम्बैट सपोर्ट की भूमिका भी निभाएंगे। यहां तक कि आतंकियों की घेराबंदी के बाद इनको करीबी लड़ाई में फायर स्पोर्ट के लिए भी तैयार किया जा रहा है। इसके लिए इनको पूरी तरह एआई से एकीकृत करने पर कार्य जारी है। आने वाले दिनों में यह रोबोटिक म्यूल आतंकरोधी अभियानों में खासकर जम्मू-कश्मीर के दुर्गम और घने जंगल वाले इलाकों में सैनिकों से पहले आगे जाते नजर आएंगे। यह संदिग्ध इलाकों की जांच कर दुश्मन की मौजूदगी की जानकारी देंगे और जरूरत पड़ने पर सैन्य निगरानी में फायरिंग भी करेंगे। यदि कोई आतंकवादी किसी इमारत या कमरे में छुपा है, तो सैनिकों को भेजने के बजाय म्यूल को अंदर भेजा जा सकता है। इसमें लगे 360-डिग्री कैमरे और थर्मल सेंसर अंधेरे या धुएं में भी आतंकी की सटीक स्थिति बता सकते हैं। हालांकि इन रोबोटिक म्यूल्स पर लगी राइफलें पूरी तरह मानवीय नियंत्रण में संचालित होंगी और फायरिंग का अंतिम निर्णय सैनिक ही लेंगे। सेना के मुताबिक इनका मकसद किसी पैदल सैनिक की जगह लेना नहीं, बल्कि खतरनाक परिस्थितियों में सैनिकों की जान को जोखिम से दूर रखना है। सैन्य भाषा में इनको फोर्स मल्टीप्लायर के रूप में देखा जा रहा है। ये भी पढ़ें:गणतंत्र दिवस: कई बदलावों का साक्षी बनेगा देश, सिमरन रचेंगी इतिहास, कर्तव्य पथ पर गूंजेगी वंदे मातरम की धुन 12 से 15 किलो तक रसद व गोला-बारूद उठाने में सक्षम फिलहाल इनका उपयोग दुर्गम इलाकों में सैनिकों की मदद के लिए किया जा रहा है। यह म्यूल 12 से 15 किलो तक का रसद, गोला-बारूद या मेडिकल किट आदि उठा सकते हैं। यह म्यूल सीढ़ियां चढ़ने, पथरीले पहाड़ों और बर्फीले इलाकों में चलने में माहिर हैं। खास बात यह है कि यह म्यूल -40 डिग्री सेंटिग्रेड की ठंड से लेकर 55 डिग्री की तेज धूप में भी आराम से काम कर सकते हैं। साथ ही इनका उपयोग राहत और बचाव संबंधी कार्य में भी किया जा रहा है। ये भी पढ़ें:Simran Bala: कौन हैं सिमरन बाला 26 जनवरी को कर्तव्य पथ पर क्या खास करने वाली है ये CRPF अधिकारी एआई से एकीकृत होंगे सेना ने बताया कि वह 2026 और 2027 को नेटवर्किंग और डाटा सेंट्रिसिटी वर्ष के तौर पर मना रही है। इस दौरान बड़े पैमाने पर विभिन्न प्रणालियां एक दूसरे से एकीकृत की जानी हैं। सेना के एक अधिकारी ने कहा कि किसी सैनिक की तरह आतंकी मुठभेड़ में रोबोटिक म्यूल का इस्तेमाल करने से पहले इसको कृत्रिम बुद्धिमता (एआई) से पूरी तरह जोड़ना होगा। अन्य वीडियो

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jan 22, 2026, 04:00 IST
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