UP : भूमि अधिग्रहण मामले में मदरसा जामिया अरबिया की याचिका खारिज, कोर्ट ने कहा- अब हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुरादाबाद के मंगूपुरा गांव में भूमि अधिग्रहण को चुनौती देने वाली मदरसा जामिया अरबिया हयातुल उलूम की याचिका को खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति विवेक सरन की खंडपीठ ने यह निर्णय सुनाते हुए स्पष्ट किया कि अधिग्रहण की कार्यवाही बहुत पहले पूरी हो चुकी है और अब इसमें हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। यह मामला मुरादाबाद विकास प्राधिकरण की ओर से नया मुरादाबाद योजना के तहत आवासीय और व्यावसायिक कॉलोनी विकसित करने के लिए भूमि के अधिग्रहण से जुड़ा था। याचिकाकर्ता मदरसे ने तर्क दिया था कि उनकी भूमि पर 1979-80 से शैक्षणिक संस्थान चल रहा है। उन्हें मुआवजा नहीं मिला और भौतिक कब्जा भी नहीं लिया गया। ऐसे में अधिग्रहण की कार्यवाही नए भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 के अनुसार रद्द किया जाना चाहिए। अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता ने इस अधिग्रहण को चुनौती देने के लिए पहले भी चार बार याचिकाएं दायर की थीं, जो अलग-अलग समय पर निस्तारित या खारिज कर दी गई थीं। प्राधिकरण की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि भूमि का कब्जा 7 नवंबर 2000 को ही लिया जा चुका था। निर्धारित मुआवजे की राशि भी सरकारी खजाने में जमा करा दी गई थी। अधिगृहीत भूमि पर पहले ही एक आवासीय कॉलोनी विकसित की जा चुकी है। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के इंदौर डेवलपमेंट अथॉरिटी बनाम मनोहर लाल मामले के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 उन मामलों को पुनर्जीवित करने के लिए नहीं किया जा सकता जो पहले ही समाप्त हो चुके हैं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि एक बार जब भूमि का कब्जा लेकर वह राज्य में निहित हो जाती है, तो उसे अधिग्रहण से मुक्त नहीं किया जा सकता। इसी के साथ कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Apr 29, 2026, 17:41 IST
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