बारूद के ढेर पर गुजरती जिंदगी, मजबूरी में जान दांव पर लगा रहे परिवार

दिवाली की आहट के साथ ही ग्रामीण इलाकों की तंग झोपड़ियों में बारूद का खेल शुरू हो जाता है। यह बारूद परिवारों के लिए पेट की आग बुझाने और पुश्तैनी हुनर को सहेजने का एकमात्र सहारा है। प्रशासन ने जिले में 21 लाइसेंस तो जारी किए, लेकिन सुरक्षित तरीके से काम करने के लिए कभी ट्रेनिंग नहीं दी।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Nov 04, 2026, 11:11 IST
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