मौलिक लेखन के लिए साहित्य संवाद जरूरी : अग्निशेखर

कुल्लू। आज के दौर में पढ़ने की प्रवृत्ति कम हुई है। लोग किताबों के बजाय रील देखते हैं और जानकारी के लिए गूगल पर निर्भर हैं। ऐसे में कट-पेस्ट कर लेखन करने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। इससे बचने और मौलिक लेखन को बढ़ावा देने के लिए साहित्य संवाद जैसे आयोजन जरूरी हैं।यह बात जम्मू-कश्मीर के वरिष्ठ लेखक अग्निशेखर ने देव सदन में आयोजित दूसरे कुल्लू साहित्य-संवाद कार्यक्रम में कही। उन्होंने कहा कि मौलिक लेखन से नए विचार जन्म लेते हैं और सोचने की क्षमता बढ़ती है। इसलिए ऐसे आयोजनों की जरूरत है।भाषा एवं संस्कृति विभाग, कुल्लू और गुरुकुल बहुमुखी शिक्षा संस्था के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में साहित्य से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई। गुरुकुल बहुमुखी शिक्षा संस्था के महासचिव कैलाश गौतम ने बताया कि कार्यक्रम में तीन सत्र हुए। पहले सत्र में काव्य-संग्रह ढालपुर में चिनार का लोकार्पण किया गया। इसकी अध्यक्षता हिंदी साहित्य के आलोचक निरंजन देव शर्मा ने की।इस दौरान आनंद कुमार राय को कविताओं की समीक्षा के लिए सम्मानित किया गया। वहीं, डॉ. अजीत प्रियदर्शी को आलोचना, वल्लभ को काव्य-संग्रह पोतराज, पवन चौहान को बाल कथाओं, डॉ. सूरत ठाकुर को लोकसंस्कृति लेखन, इशिता आर गिरीश को कहानी लेखन, विजय विशाल को साहित्यिक आलोचना के लिए सम्मान दिया गया।डॉ. पान सिंह को कविता, संजू पॉल को चित्रकलाओं, डॉ. कल्याण सिंह को स्वास्थ्य सेवाओं, गंगा राम राजी को ऐतिहासिक उपन्यासों, निरंजन देव शर्मा को उपन्यास बाजार और अग्निशेखर को जीवनपर्यंत उपलब्धियों के लिए गुरुकुल सम्मान-2026 से सम्मानित किया गया। तीसरे सत्र में कवि सम्मेलन हुआ। इसमें विभिन्न कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Oct 02, 2026, 18:47 IST
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