जस्टिस सत्यवीर सिंह : जिस लाइब्रेरी में रातें गुजारकर संवारते थे भविष्य, उसी में होगा न्यायमूर्ति का अभिनंदन

कुछ सपने सुविधाओं के सहारे नहीं, बल्कि मेहनत, अनुशासन और शिक्षा के प्रति समर्पण से पूरे होते हैं। न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह की जीवन यात्रा इसकी मिसाल है। अलीगढ़ की अतरौली तहसील के छोटे से गांव नहल में किसान परिवार में जन्मे सत्यवीर सिंह ने अपनी लगन और परिश्रम से इलाहाबाद हाईकोर्ट की गरिमामयी पीठ तक का सफर तय किया। अब अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में सर सैयद डे के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उनका स्वागत होगा। यह उनके लिए उस परिसर में लौटने जैसा है, जहां उनकी शैक्षणिक यात्रा के महत्वपूर्ण अध्याय लिखे गए। जिस लाइब्रेरी में गढ़ा भविष्य, वहीं होगा अभिनंदन न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह के विद्यार्थी जीवन में एएमयू की मौलाना आजाद लाइब्रेरी की खास भूमिका रही है। परास्नातक की पढ़ाई के दौरान वह रात 9:30 बजे से सुबह 5:30 बजे तक लाइब्रेरी में अध्ययन करते थे। किताबों के बीच बिताए गए ये घंटे उनके जीवन की अमूल्य पूंजी बने। 24 घंटे खुलने वाली इस लाइब्रेरी ने उन्हें केवल पढ़ने की जगह ही नहीं दी, बल्कि समानता, सहयोग और आपसी अपनत्व का अनुभव भी कराया। वहां अमीर-गरीब, जाति और मजहब के भेद से ऊपर उठकर विद्यार्थी साथ पढ़ते और साथ भोजन करते थे। न्यायमूर्ति सिंह के लिए यह अनुभव आज भी विशेष महत्व रखता है। लाइब्रेरी में कभी उन्हें आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आने का एहसास नहीं हुआ। विद्यार्थियों के बीच पारिवारिक अपनत्व और समानता का भाव ऐसा था, जिसने उनके जीवन पर गहरी छाप छोड़ी।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Oct 17, 2026, 14:26 IST
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