जितिया व्रत की कथा: पढ़ें जीमूतवाहन, चील-सियारिन और परीक्षित से जुड़ी 3 पौराणिक कहानियां
जितिया व्रत को अलग-अलग क्षेत्रों में जिउतिया और जीवित्पुत्रिका व्रत के नाम से भी जाना जाता है। नाम भले ही अलग हों, लेकिन इस पर्व का भाव संतान की लंबी आयु, सुख, समृद्धि और सुरक्षा की कामना से जुड़ा है। वर्ष 2026 में जितिया व्रत 3 अक्तूबर, शनिवार को रखा जाएगा। इस दिन माताएं निर्जला उपवास करती हैं और विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने के साथ जितिया व्रत की कथा भी सुनती हैं। धार्मिक परंपरा में व्रत कथा का विशेष महत्व माना गया है, क्योंकि इसके माध्यम से व्रत से जुड़ी मान्यताओं और उसके पीछे छिपे त्याग, ममता तथा संतान-सुरक्षा के भाव को समझा जाता है। जितिया से जुड़ी कई कथाएं अलग-अलग क्षेत्रों में प्रचलित हैं। इनमें जीमूतवाहन और नागवंश की कथा, चील-सियारिन की लोककथा और महाभारत काल में अभिमन्यु के पुत्र परीक्षित से जुड़ा प्रसंग प्रमुख हैं। इन सभी कथाओं में किसी न किसी रूप में संतान की रक्षा और जीवन के लिए किए गए त्याग का भाव दिखाई देता है। इन कथाओं का पाठ करने से या सुनने से पूजा सफल मानी जाती है। यहां पढ़ें जितिया व्रत कथा
- Source: www.amarujala.com
- Published: Oct 02, 2026, 14:14 IST
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