Jantar Mantar: देखो-देखो कौन आया... कॉकरोच आया, कॉकरोच आया; अभिजीत दीपके बोले- यह तो सिर्फ एक ट्रेलर
देखो-देखो कौन आया. कॉकरोच आया, कॉकरोच आया जैसे नारों के बीच युवाओं ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में शामिल युवाओं ने शिक्षा से जुड़े मुद्दों और परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की। आयोजकों की ओर से बीती शाम जारी अपील को ध्यान में रखते हुए कई युवा हाथों में फूल और किताबें लेकर प्रदर्शन स्थल पहुंचे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने का प्रयास है। प्रदर्शन खत्म होने के बाद अभिजीत दीपके ने अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट कर कहा है कि आज का प्रदर्शन तो सिर्फ एक ट्रेलर था। प्रदर्शन में मध्य-प्रदेश, हैदराबाद, बेंगलुरु, बिहार और उत्तर प्रदेश समेत देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे सीजेपी समर्थकों ने भाग लिया। युवाओं के अलावा बड़ी संख्या में अभिभावकों ने भी प्रदर्शन को समर्थन दिया। उनका कहना था कि शिक्षा और छात्रों के भविष्य से जुड़े सवाल किसी एक वर्ग का नहीं, बल्कि पूरे समाज का मुद्दा हैं। इसलिए वे छात्रों की मांगों के साथ खड़े हैं। मंच पर जेन-जी युवाओं को संबोधित करते हुए पार्टी के सूत्रधार अभिजीत दीपके ने कहा, पिछले 5, 10 दिन से लोग मुझसे सवाल कर रहे थे कि सोशल मीडिया पर पेज चलाकर क्या होगा। उन लोगों को कैमरा घुमाकर ये दिखा दीजिए कि जंतर मंतर पर कितने कॉकरोच घर से बाहर निकल कर आएं हैं। प्रदर्शन खत्म होने पर अभिजीत दीपके ने एक्स पर लिखा, मैं अपने माता-पिता से मिलने घर जा रहा हूं पिछले 15 दिनों में उन्हें बहुत तकलीफ हुई है। धमकियों की वजह से उन्हें घर छोड़ना पड़ा। उन्हें वापस घर ले जाऊंगा। आज का प्रोटेस्ट तो बस एक ट्रेलर था। इतनी बड़ी संख्या में आने के लिए धन्यवाद। काला हिट लेकर जताया कॉकरोचों का विरोध प्रदर्शन के दौरान अलग-अलग गुटों की ओर से खलल डालने की कई बार कोशिशें भी की गईं। इस दौरान एक व्यक्ति हाथ में काला हिट (कीटनाशक स्प्रे) के साथ विरोध जताने पहुंचा। प्रदर्शनकारियों ने इसे व्यवस्था के खिलाफ प्रतीकात्मक विरोध का हिस्सा माना। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि आंदोलन को प्रभावित करने और मुद्दे को राजनीतिक रंग देने के लिए विभिन्न दलों के लोग भी पहुंचे, लेकिन इससे युवाओं के संकल्प और एकजुटता पर कोई असर नहीं पड़ा। मैं भारत के हैदराबाद से हूं, न कि पाकिस्तान के बंगलूरू से आए एक युवा ने कहा, कि वो खास तौर पर सीजेपी पार्टी को समर्थन देने के लिए इतनी दूर से आए हैं। नीट परीक्षा में हुई गड़बड़ी कोई छोटी-मोटी चूक नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य को चौपट करने जैसा है। हैदराबाद से आए अजय ने कहा, कि परीक्षाओं में हुई धांधली को लेकर इस्तीफे के जरिये जवाबदेही देनी होंगी। कई बार लोग हम जैसे युवा जो सिस्टम के खिलाफ आवाज उठाते हैं, उन्हें पाकिस्तानी कह देते हैं। तो आपको बता दूं, मैं भारत के हैदराबाद से हूं, न कि पाकिस्तान के। दिल्ली के वजीराबाद से आए मुकेश ने कहा, कि जैसी स्थिति हमारे देश में युवाओं की है, वो किसी भी देश में नहीं। छात्र आत्महत्या करने पर मजबूर हो गए हैं। लेकिन इतनी बड़ी गड़बड़ी के बाद भी कोेई इसकी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं, जो कि शर्मनाक है। बिहार से आए आशुतोष ने कहा कि, जवाब तो देना पड़ेगा। हम जेन-जी नहीं लेकिन इनके साथ हैं : अभिभावक प्रदर्शन के दौरान काफी संख्या में बुजुर्गों और अभिभावकों ने अपनी हाजिरी दर्ज कराई। उन्होंने कहा, कि यह हमारे बच्चों के भविष्य का सवाल है। इसलिए हमारा पूरा समर्थन है। इस प्रदर्शन में शामिल अभिभावक, जो पेशे से शिक्षिका थीं, उन्होंने कहा, हमें खुशी है, कि आज की जनरेशन शांतिपूर्ण तरीके से बात को रखने में विश्वास रखती हैै। यहां बच्चों के साथ उनके भविष्य का मजाक बनाया गया, लेकिन फिर भी ये युवा हाथों में फूल लिए अपने मुद्दे की बात कर रहे हैं। जनप्रतिनिधियों के बच्चे सरकारी स्कूल में हों : वांगचुक सोनम वांगचुक के जंतर-मंचर पहुंचते ही युवाओं में अजब-सा उत्साह देखने को मिला। उनके जंतर-मंतर पहुंचते ही रह-रहकर उनके समर्थन में नारे लगने लगे। जेन-जी युवाओं ने कहा, एजुकेशन मिनिस्टर कैसा हो सोनम वांगचुक जैसा हो। इस पर सोनम ने लोगों को रोका और कहा कि मेरी कोई इच्छा नहीं है। युवा आगे आएं। विकसित भारत के कारखाने गांव के विद्यालय हैं जो भी जन प्रतिनिधि है उनके बच्चे सरकारी स्कूल में हों। सिस्टम में बदलाव तभी आएगा जब उनके बच्चे निजी नहीं सरकारी स्कूल में पढ़ेंगे। सोनम वांगचुक ने मंच से लोगों को संबोधित करते हुए कहा, कि आज हमने शांतिपूर्वक अपनी बात रखी है। सरकार ने कॉकरोच को पनपने दिया है। हम प्रदर्शन नहीं आग्रह करने आए हैं। आगे भी हमें उम्मीद है सरकार सकारात्मक काम करेगी। इस्तीफे की बात हो रही है, लेकिन जिम्मेदारी की भी बात हो। दो गुटों में हुई बहस तकरीबन दो बजे प्रदर्शन के दौरान दो गुटों में बहस हो गई, जिसके बाद डीसीपी मामले को सुलझाने में लगे हैं। गौरतलब है कि कुछ लोग आरएसएस के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे तो कुछ अन्य लोगों ने उन्हें मना किया जिसमें बहस बढ़ गई तो डीसीपी को मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्हें बता दो, डरते नहीं हमइस्तीफा दें शिक्षामंत्री : अभिजीत मेरी मां को डर था कि वापस लौटूंगा तो जेल में डाल दिया जाऊंगा। जंतर-मंतर पर अभिजीत दीपके ने कहा, ये मेरी मां का अकेले का डर नहीं है। इस देश में जो भी बच्चा, स्टूडेंट, युवा राजनीति के ऊपर और सरकार के खिलाफ बोलेगा तो उसकी मां को डर लगता है कि मेरे बेटे को कहीं ये अंदर यानी जेल में न डाल दें। कब तक हम ऐसे डर में जिएंगे, एक बार इनको बता दो कि इनकी डर की राजनीति से हम अब नहीं डरने वाले हैं। उन्होंने कहा कि कॉकरोच जनता पार्टी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही है। सीजेपी ने समर्थकों से कहा है कि आंदोलन को प्रेम और शांति से आगे बढ़ाना है। मंच पर जब अभिजीत बोल रहे थे उस दौरान खूब नारे लगे, नहीं डरेंगे नहीं डरेंगे, तुम्हारी राजनीति से नहीं डरेंगे, धर्म की राजनीति बंद करो, हिंदू-मुसलमान की राजनीति बंद करो। इसके बाद अभिजीत दीपके ने कहा, पिछले 5, 10 दिन से लोग मुझसे सवाल कर रहे थे कि सोशल मीडिया पर पेज चलाकर क्या होगा। उन लोगों को कैमरा घुमाकर ये दिखा दीजिए कि जंतर मंतर पर कितने कॉकरोच घर से बाहर निकल कर आएं हैं। उन्होंने दावा किया, महज एक-दो दिन में हमारे साथ लाखों स्टूडेंट्स होंगे। ये कॉकरोच जनता पार्टी कोई प्लान की हुई पार्टी नहीं है। ये हर एक स्टूडेंट की आवाज है, जो सरकार से नाराज है। उन्होंने कहा, 10-12 साल से इन लोगों ने हमें हिंदू-मुसलमान की राजनीति में फंसा कर रखा, इससे किसे फायदा हुआ। क्या हिंदू-मुसलमान करने से देश में किसी को भी नौकरियां मिलीं।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Jun 07, 2026, 02:29 IST
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