Jammu News: जहां लगती थी भक्तों की कतार, वहां अब सिर्फ मलबा

-शहर के मंदिरों में भरा मलबा, हटाने में लगेगा कम से कम एक माह-बेलीचराना में भी हाल बेहाल, आंखों में आंसू लिए लोग वक्त गुजार रहे ग्राउंड रिपोर्ट:पीरखो, हरि की पौड़ी व बेलीचराना से अंकित कुमार मिश्रजम्मू। मंदिरों के शहर जम्मू में जहां रोज सुबह घंटे-घड़ियाल गूंजते और भक्तों की लंबी कतारें लगती थीं। वहां इन दिनों सिर्फ मलबा ही मलबा है। मंदिर प्रबंधन, स्थानीय लोग और भक्त बारी-बारी से इसकी सफाई करने में जुटे हैं। सभी एकसाथ भी जुट जाएं तो मलबे को हटाने में कम से कम एक माह लग जाएगा। वहीं शहर के रिहायशी इलाके बेलीचराना में भी लोग आंखों में आंसू लिए वक्त गुजार रहे हैं। चार दिन बाद भी उनकी मुश्किलें कम होने का काम नहीं ले रही हैं। मंदिर के महंत स्वामी महादेव सरस्वती ने बताया कि मलबा हटाने के लिए मंदिर की ओर से करीब 50 से अधिक लोगों को लगाया गया है लेकिन तीन दिन में केवल अभी प्रवेश द्वार ही साफ हुआ है। पूर्ण रूप से साफ होने में एक माह लग सकता है। इस कार्य को सफल बनाने के लिए जिला प्रशासन भी अपना अहम भूमिका निभा रहा है। मंदिर के सेवादार प्रवीण कुमार का कहना है कि जहां माथा टेकने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगती थी वहीं अब इन दिनों हाल ही में हुए तबाही का दृश्य देखने के लिए लोग आते हैं। इनसेटगाेशाला व पार्किंग में खड़ी गड़ियों को नुकसान पीरखो मंदिर के महंत राजिंदर नाथ ने बताया कि मंदिर के मुख्य द्वार पर भारी भूस्खलन होने से मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं का आवागमन पूरी तरह से ठप हो गया था। इससे पार्किंग स्थल में खड़ी कई गड़ियां मलबे में दबकर ध्वस्त हो गईं। वहीं इस मलबे को हटाने के लिए प्रशासन की ओर से लगातार पिछले तीन दिनों से प्रयास किया जा रहा है। कड़ी मशक्कत के बाद शुक्रवार को मंदिर के मुख्य द्वार तक श्रद्धालुओं का आवागमन बहाल किया गया लेकिन अभी पार्किंग में खड़ी गाड़ियों को मलबे से निकालने का काम जारी है। इस आपदा में गोशाला की एक गाय और एक बकरी मलबे में दबकर मर गई। तवी की उफान से ढह गया मंदिर का हिस्सा विक्रम चौक स्थित महाकाल शक्ति पीठ के महंत भरतदास ने बताया कि तवी नदी में उफान आने से मंदिर ही नहीं बल्कि मंदिर के समीप स्थित आरती घाट भी पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त हो गया है। इसको लेकर अभी तक कोई प्रशासनिक कार्रवाई नहीं की गई। इससे मंदिर में रोजाना आने वाले श्रद्धालुओं के अंदर डर बना रहता है।श्रीराम मंदिर आश्रम के महंत केशव दास ने बताया कि तवी की तबाही से मंदिर बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इससे मंदिर के अंदर रखा सारा सामान मलबे में तब्दील होकर नष्ट हो गया। चार दिन हुए पर मुश्किलें मानो बढ़ती जा रही हैं पीरखो के स्थानीय निवासी मानिक चंद का कहना है कि बीते चार दिन से लगे हैं। सुबह होते ही मलबा हटाने का काम शुरू कर देते हैं। वहीं चेतन का कहना है कि मुश्किलें घटने के बजाय बढ़ती दिख रही हैं। संवाद----------------बाढ़ के एक झटके में बह गई जिंदगी भर की कमाईजम्मू। शहर के बेलीचराना में रहने वाले लोगों को तवी नदी के उफान से मिले जख्म अभी भी हरे हैं, मौजूदा हालात यह है कि इन लोगों का मकान, दुकान और जिंदगी भर की जमा पूंजी तवी में बह चुकी है। अब इन्हें नए सिरे से दोबारा जिंदगी शुरुआत करनी है। ऐसे में इन लोगों का कहना है कि यहां पर हम लोगों की सुध लेने के लिए कोई नही आता है और जो आलाकमान आते भी हैं वो केवल ब्रिज से होकर लौट जाते हैं। इससे पिछले तीन दिनों से हम सभी लोगों काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मशकूर अहमद ने बताया कि तवी के इस विकराल रुप को हमने पहली बार देखा। पानी का बहाव इतना तेज था कि हमारा मकान इसमें बह गया। इससे काफी परेशानी हो रही है। रोती बिलखती हुई सलीमा ने बताया कि इस तबाही से हमारे पति और बेटों ने मिलकर तवी के किनारे तीन मकान बनाए थे और तवी की तबाही ने एक ही झटके में हमारे पति व बेटे के जिदंगी भर की कमाई अपने साथ बहा ले गई और मौजूदा हालात यह है कि इस मलबे के नीचे दबे कुछ जरुरी सामानों को ढूंढना पड़ रहा है। करीब 48 वर्षीय गुलाम रसूल का कहना है कि हम लोगों की सुध लेने के लिए यहां पर न कोई अभी तक कोई प्रशासनिक अधिकारी आए और न ही कोई नेता या मंत्री। हालात बदतर हो गए हैं। काफी परेशानियों से जूझना पड़ रहा है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Aug 30, 2025, 03:15 IST
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