Israel Iran War: इस्राइल-ईरान युद्ध के बीच दिग्विजय ने याद दिलाई सरकार को राहुल गांधी की चेतावनी!
दिग्विजय सिंह ने हाल ही में कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और इज़राइल तथा ईरान के बीच तेज़ होते संघर्ष के बीच सरकार को पहले दी गई राहुल गांधी की चेतावनी याद रखनी चाहिए। उनका कहना है कि वर्तमान अंतरराष्ट्रीय हालात इस बात की पुष्टि करते हैं कि भारत को अपनी विदेश नीति में स्पष्ट, संतुलित और सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। दरअसल, राहुल गांधी ने कुछ दिन पहले ही भारत सरकार से अपील की थी कि वह पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव पर स्पष्ट रुख अपनाए और वहां रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे। उन्होंने कहा था कि अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ती सैन्य कार्रवाई पूरे क्षेत्र को बड़े युद्ध की ओर धकेल सकती है, जिससे लाखों लोगों के साथ-साथ विदेशों में काम कर रहे भारतीय भी प्रभावित हो सकते हैं। दिग्विजय सिंह ने इसी संदर्भ में कहा कि राहुल गांधी पहले ही चेतावनी दे चुके थे कि इस तरह के सैन्य हमले और जवाबी कार्रवाई क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ा देंगे। उनके अनुसार, अगर समय रहते वैश्विक शक्तियां और प्रभावित देश संवाद और कूटनीति का रास्ता नहीं अपनाते तो यह संघर्ष और व्यापक हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत को अपने पारंपरिक सिद्धांत—अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान, देशों की संप्रभुता और विवादों का शांतिपूर्ण समाधान—पर मजबूती से कायम रहना चाहिए। राहुल गांधी ने भी अपने बयान में कहा था कि किसी देश की संप्रभुता का उल्लंघन करने वाले हमले स्थिति को और खराब करेंगे और हिंसा का जवाब हिंसा ही पैदा करेगा, इसलिए संवाद और संयम ही समाधान का रास्ता है। कांग्रेस नेताओं का मानना है कि भारत जैसे बड़े लोकतांत्रिक देश को वैश्विक संकटों पर स्पष्ट और नैतिक रुख रखना चाहिए। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से यह भी सवाल किया कि क्या भारत सरकार इस तरह के हमलों का समर्थन करती है या वह अंतरराष्ट्रीय कानून और शांति के पक्ष में खड़ी है। उनका कहना है कि भारत की चुप्पी अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसकी छवि को प्रभावित कर सकती है और इसलिए सरकार को स्पष्ट रूप से अपनी स्थिति बतानी चाहिए। इस तरह, दिग्विजय सिंह ने मौजूदा इज़राइल-ईरान तनाव के बीच राहुल गांधी की पहले दी गई चेतावनी का हवाला देते हुए सरकार से आग्रह किया है कि वह सक्रिय कूटनीतिक पहल करे, क्षेत्र में शांति बहाल करने के प्रयासों का समर्थन करे और साथ ही पश्चिम एशिया में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए। उनका कहना है कि भारत की विदेश नीति का मूल उद्देश्य हमेशा शांति, संतुलन और मानवीय मूल्यों की रक्षा रहा है, और इस संकट के समय भी उसी दिशा में काम करने की
- Source: www.amarujala.com
- Published: Mar 05, 2026, 01:47 IST
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