अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा: सात दिन तपस्वियों की तरह रहते हैं देवी-देवता के कारकून, खाने-पीने के नियम भी कड़े

अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा में देवी-देवताओं की मौजूदगी के बीच देव परंपराओं का निर्वहन करने वाले कारकूनों की जीवनशैली भी अनूठी है। उत्सव के सात दिन तक देवताओं के मुख्य कारकून तपस्वियों की तरह रहते हैं। देव नियमों में बंधे इन कारकूनों को अपने आराध्य के अस्थायी शिविर में रहकर चाकरी करनी पड़ती है। उनके खानपान से लेकर रहने तक के नियम निर्धारित होते हैं। वे शिविर में बना भोजन ही खाते हैं और परंपरा के अनुसार बाहर होटल-ढाबों में चाय-पानी तक से परहेज करते हैं।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Oct 23, 2026, 23:09 IST
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