अंतरराष्ट्रीय ग्रामीण महिला दिवस: पहाड़ की आर्थिकी की धुरी है नारी शक्ति, खेत से बाजार तक संभाल रहीं मोर्चा
हिमाचल प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की असली धुरी महिलाएं हैं। घर की जिम्मेदारियों से लेकर खेतों, सेब के बगीचों और पशुशालाओं तक उनकी मेहनत परिवारों की आजीविका को सहारा दे रही है। पहाड़ की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच महिलाएं कृषि और पशुपालन में श्रम देने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अपने उत्पाद बाजार तक पहुंचाकर सीधे कमाई भी कर रही हैं। उनकी यह भागीदारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की बढ़ती आर्थिक भूमिका को दर्शाती है। कुल्लू में महिलाएं रोजाना खेतों से सब्जियां लेकर बाजार पहुंचती हैं। मंडी के सेरी मंच पर महिलाएं पत्तल, अरबी और सब्जियां बेचती हैं। शिमला जिले के रामपुर में चाटी पुल पार से महिलाएं सब्जियां, दूध और छाछ लेकर आती हैं। धर्मशाला, पालमपुर, नगरोटा बगवां और आसपास के क्षेत्रों में भी महिलाएं अपने उत्पाद बेचकर परिवार की आय बढ़ा रही हैं। खेतों में फसल उगाने से लेकर उसे बाजार में बेचने तक की जिम्मेदारी निभाकर वे परिवार की आर्थिक जरूरतों में सीधा योगदान दे रही हैं।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Oct 14, 2026, 22:30 IST
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