Bihar News: मोदी सरकार का बड़ा दांव! 9,072 करोड़ की तीन परियोजनाएं मंजूर, 307 किमी बढ़ेगा ट्रैक नेटवर्क
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने रेल मंत्रालय की तीन अहम परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। इन परियोजनाओं पर करीब 9,072 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इनका मकसद रेलवे लाइनों की संख्या बढ़ाकर रेल नेटवर्क को मजबूत बनाना है। इन तीनों परियोजनाओं से भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में लगभग 307 किलोमीटर की बढ़ोतरी होगी। इससे यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलेगी और माल ढुलाई भी तेज होगी। इन तीन परियोजनाओं को मिली स्वीकृति सरकार ने जिन तीन परियोजनाओं को मंजूरी दी है, उनमें शामिल हैं: पुनारख-किऊल तीसरी और चौथी लाइन गोंडिया – जबलपुर लाइन दोहरीकरण गम्हरिया-चांडिल तीसरी और चौथी लाइन चार राज्यों के 8 जिलों को होगा सीधा लाभ ये परियोजनाएं महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, बिहार और झारखंड के 8 जिलों में फैली हुई हैं। इनसे करीब 5,407 गांवों में संपर्क बेहतर होगा। इन गांवों की कुल आबादी लगभग 98 लाख है। रेल लाइन बढ़ने से लोगों की आवाजाही आसान होगी और समय की बचत होगी। रेल क्षमता बढ़ेगी, भीड़भाड़ होगी कम नई लाइनों के बनने से ट्रेनों की संख्या बढ़ाई जा सकेगी। इससे यात्रियों और मालगाड़ियों की भीड़ कम होगी। रेलवे की सेवा ज्यादा भरोसेमंद और सुचारु बनेगी। सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं से रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। इससे क्षेत्र का विकास होगा और लोग आत्मनिर्भर बनेंगे। ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत तैयार की गई हैं। इसका उद्देश्य अलग-अलग परिवहन साधनों को जोड़कर संपर्क और परिवहन व्यवस्था को मजबूत बनाना है। इनसे लोगों, सामान और सेवाओं की आवाजाही बिना रुकावट के हो सकेगी। पर्यटन स्थलों को भी मिलेगा फायदा इन परियोजनाओं से कई प्रमुख पर्यटन स्थलों तक रेल संपर्क बेहतर होगा। इनमें जबलपुर का कचनार शिव मंदिर, बालाघाट का कान्हा राष्ट्रीय उद्यान, गंगुलपारा बांध और जलप्रपात, पेंच राष्ट्रीय उद्यान, धुआंधार जलप्रपात, बरगी बांध, गोमजी-सोमजी मंदिर, चंदिल बांध, दलमा हिल टॉप, हेसाकोचा जलप्रपात, रायजामा घाटी और दलमा वन्यजीव अभ्यारण्य शामिल हैं। बेहतर रेल सुविधा से पर्यटकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। माल ढुलाई में होगी बड़ी बढ़ोतरी ये रेल मार्ग कोयला, इस्पात, लौह अयस्क, सीमेंट, गिट्टी, पत्थर, फ्लाई ऐश, उर्वरक, चूना पत्थर, मैंगनीज, डोलोमाइट, खाद्यान्न और पेट्रोलियम उत्पाद जैसी वस्तुओं की ढुलाई के लिए बहुत जरूरी हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद हर साल करीब 52 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई संभव होगी। पर्यावरण को भी होगा फायदा रेलवे ऊर्जा की बचत करने वाला और पर्यावरण के अनुकूल साधन है। इन परियोजनाओं से तेल आयात में करीब 6 करोड़ लीटर की कमी आएगी। साथ ही कार्बन उत्सर्जन में लगभग 30 करोड़ किलोग्राम की कमी होगी, जो करीब एक करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है। सरकार का मानना है कि ये परियोजनाएं नए भारत के विकास और मजबूत बुनियादी ढांचे की दिशा में बड़ा कदम हैं।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Feb 24, 2026, 15:48 IST
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