Lucknow News: समकालीन चुनाैतियों का समाधान है भारतीय ज्ञान परंपरा

लखनऊ। नेशनल पीजी. कॉलेज के इतिहास विभाग की ओर से बृहस्पतिवार को भारतीय ज्ञान परंपरा: ऐतिहासिक आधार एवं अंतर्विषयक दृष्टिकोण विषय पर संगोष्ठी हुई। इसका उद्देश्य भारतीय ज्ञान प्रणाली (आईकेएस) की ऐतिहासिक गहराई, समकालीन प्रासंगिकता और उच्च शिक्षा में उसकी अंतर्विषय संभावनाओं को रेखांकित करना था।मुख्य अतिथि हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने कहा कि भारतीय ज्ञान प्रणाली एक सतत और समृद्ध बौद्धिक परंपरा है, जो दर्शन, विज्ञान, गणित, चिकित्सा, शासन, पारिस्थितिकी और नैतिकता जैसे अनेक क्षेत्रों को समाहित करती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय ज्ञान केवल आध्यात्मिक चिंतन तक सीमित नहीं है, बल्कि बाह्य और आंतरिक ज्ञान के संतुलित समन्वय पर आधारित है। चार्वाक दर्शन से लेकर वसुधैव कुटुम्बकम् जैसी सार्वभौमिक अवधारणाएं इसकी व्यापकता को दर्शाती हैं।वर्ण व्यवस्था के बारे में उन्होंने बताया कि शास्त्रों में यह गुण और कर्म पर आधारित थी, न कि जन्म पर। ऋषि वशिष्ठ की गुरुकुल परंपरा का उदाहरण देते हुए उन्होंने समानता और भेदभाव-रहित शिक्षा की भारतीय परंपरा पर प्रकाश डाला।भारत का रहा है वैश्विक योगदानराज्यपाल ने भारत की प्राचीन वैज्ञानिक उपलब्धियों- दशमलव प्रणाली, खगोल विज्ञान, आयुर्वेद, शल्य चिकित्सा और कौटिल्य के अर्थशास्त्र का उल्लेख करते हुए इनके वैश्विक योगदान को रेखांकित किया।राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपराएं समग्र, अनुभवात्मक और कौशल-आधारित शिक्षा की भावना के अनुरूप हैं। प्राचार्य प्रो. देवेंद्र के. सिंह ने अजंता की गुफाओं की स्थापत्य कला पर प्रकाश डाला। पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ. अशोक बाजपेयी ने यूजीसी की ओर से भारतीय ज्ञान प्रणाली को पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने के पहल की सराहना की। कार्यक्रम में बोर्ड ऑफ गवर्नेंस के सदस्य रणविजय सिंह, सुधीर हलवासिया सहित अनेक शिक्षाविद् उपस्थित रहे। नेशनल पीजी. कॉलेज के इतिहास विभाग की ओर सेसंगोष्ठी हुई। नेशनल पीजी. कॉलेज के इतिहास विभाग की ओर सेसंगोष्ठी हुई। नेशनल पीजी. कॉलेज के इतिहास विभाग की ओर सेसंगोष्ठी हुई। नेशनल पीजी. कॉलेज के इतिहास विभाग की ओर सेसंगोष्ठी हुई। नेशनल पीजी. कॉलेज के इतिहास विभाग की ओर सेसंगोष्ठी हुई। नेशनल पीजी. कॉलेज के इतिहास विभाग की ओर सेसंगोष्ठी हुई। नेशनल पीजी. कॉलेज के इतिहास विभाग की ओर सेसंगोष्ठी हुई। नेशनल पीजी. कॉलेज के इतिहास विभाग की ओर सेसंगोष्ठी हुई। नेशनल पीजी. कॉलेज के इतिहास विभाग की ओर सेसंगोष्ठी हुई। नेशनल पीजी. कॉलेज के इतिहास विभाग की ओर सेसंगोष्ठी हुई। नेशनल पीजी. कॉलेज के इतिहास विभाग की ओर सेसंगोष्ठी हुई। नेशनल पीजी. कॉलेज के इतिहास विभाग की ओर सेसंगोष्ठी हुई। नेशनल पीजी. कॉलेज के इतिहास विभाग की ओर सेसंगोष्ठी हुई।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Feb 06, 2026, 03:29 IST
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