आर्थिक समृद्धि के साथ सामाजिक संतुलन से विकसित होगा भारत : डॉ. रंगनाथन
मेरठ। प्रख्यात वैज्ञानिक, लेखक, विचारक एवं मोटिवेशनल स्पीकर डॉ. आनंद रंगनाथन ने कहा कि 2047 के विकसित भारत की परिकल्पना तभी सफल होगी जब आर्थिक समृद्धि के साथ सामाजिक संतुलन और सभी के लिए समान सुविधाएं और न्याय की व्यवस्था हो। भ्रष्टाचार मुक्त भारत में न्याय प्रक्रिया में भी विलंब न हो।शनिवार को बीडीएस इंटरनेशनल स्कूल में आयोजित विशेष कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में उन्होंने ये बातें कहीं। यह सत्र बौद्धिक विमर्श, सामाजिक चिंतन और राष्ट्र निर्माण से जुड़े गंभीर विषयों पर केंद्रित रहा। डॉ. रंगनाथन ने न्यायालयों में रेप और पॉक्सो सहित संवेदनशील मामलों में इंसाफ मिलने में हो रही देरी पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि केवल राजनेताओं को दोष देना ठीक नहीं, न्यायपालिका में भ्रष्टाचार, नेपोटिज्म और कॉलेजियम सिस्टम जैसे मुद्दों पर भी गंभीर मंथन आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जब न्यायाधीश लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित नहीं होते तो उनकी जवाबदेही कैसे सुनिश्चित की जाए। सत्र के दौरान विद्यालय की छात्राओं अक्षरा और सिया ने विकसित भारत 2047 को लेकर सारगर्भित प्रश्न पूछे। छात्राओं ने पूछा कि विकसित भारत की परिकल्पना क्या है, सामाजिक समानता व समावेशी विकास क्यों आवश्यक है और इस लक्ष्य को पाने के लिए युवाओं की क्या भूमिका होनी चाहिए। इनके उत्तर में डॉ. रंगनाथन ने कहा कि विकसित भारत का अर्थ केवल आर्थिक वृद्धि नहीं है, बल्कि ऐसा राष्ट्र है जहां आर्थिक समृद्धि, सामाजिक न्याय, तकनीकी उन्नति और पर्यावरण संतुलन एक साथ हों। बढ़ती असमानता देश की एकता के लिए खतरा बन सकती है।डॉ. रंगनाथन ने शिक्षा और कौशल विकास, सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं, रोजगार सृजन, वैज्ञानिक अनुसंधान, डिजिटल व भौतिक अवसंरचना, सुशासन और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन को विकसित भारत की नींव बताया। कार्यक्रम में शिक्षाविद वागमिता त्यागी, राहुल केसरवानी, सपना आहुजा, रितु दीवान एवं सुधांशु शेखर सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. गोपाल दीक्षित ने अतिथियों का अभिनंदन किया। बीडीएस के डायरेक्टर आकर्ष मोहन ने कहा कि डॉ. आनंद रंगनाथन के विचार व्यक्ति को कर्म के लिए प्रेरित करते हैं। इस अवसर पर शिक्षा, आर्थिक असमानता, ग्लोबल हैप्पीनेस इंडेक्स और स्वास्थ्य चुनौतियों पर भी चर्चा हुई।जागरूक होना होगा, सरकार से सवाल करने होंगेमेरठ। डॉ. आनंद रंगनाथन ने कहा कि समाज में असली लड़ाई हिंदू-मुस्लिम की नहीं, बल्कि भेदभाव के खिलाफ है। डॉ. रंगनाथन ने आरटीई एक्ट पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि यह कानून केवल हिंदू संचालित स्कूलों पर क्यों लागू होता है, जबकि मुस्लिम और ईसाई स्कूलों को इससे छूट दी गई है। यह व्यवस्था संविधान के समानता के सिद्धांत के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि देश में मजबूत विपक्ष की कमी है। इसलिए अब आम जनता को ही सरकार से सवाल करने होंगे। लोकतंत्र तभी सशक्त बनेगा, जब नागरिक जागरूक होकर नीतियों पर प्रश्न उठाएंगे और सरकार को जवाबदेह बनाएंगे।एआई के दौर में तकनीकी रूप से अपडेट रहें युवाइस दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को लेकर भी युवाओं को चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि जिस काम में इंसान को 30 साल लगते हैं, एआई ने उसे मात्र 15 घंटे में पूरा कर दिखाया। एआई तेजी से सीख रहा है और हर क्षेत्र में अपना दखल बढ़ा रहा है। अगर समय रहते इसे नहीं समझा गया तो आने वाले वर्षों में मानव श्रम पर बड़ा संकट आ सकता है। युवाओं को तकनीक के साथ खुद को अपडेट रखना जरूरी है। जाग्रतिविहारमेंस्थितबीडीएसइंटरनेशनलस्कूलमेंआयोजितकार्यक्रमकेदौरानसांस्कृतिकगीतपर जाग्रतिविहारमेंस्थितबीडीएसइंटरनेशनलस्कूलमेंआयोजितकार्यक्रमकेदौरानसांस्कृतिकगीतपर जाग्रतिविहारमेंस्थितबीडीएसइंटरनेशनलस्कूलमेंआयोजितकार्यक्रमकेदौरानसांस्कृतिकगीतपर जाग्रतिविहारमेंस्थितबीडीएसइंटरनेशनलस्कूलमेंआयोजितकार्यक्रमकेदौरानसांस्कृतिकगीतपर
- Source: www.amarujala.com
- Published: Jan 18, 2026, 03:01 IST
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