Income Tax: नए आयकर ड्राफ्ट नियम तैयार, एचआरए क्लेम के लिए बताना होगा मकान मालिक से रिश्ता; जानिए क्या अपडेट
सरकार ने नए आयकर अधिनियम, 2025 के तहत ड्राफ्ट नियम और फॉर्म जारी कर दिए हैं, जो 1 अप्रैल 2026 से प्रभाव में आएंगे। छह दशक पुराने कानून की जगह लेने वाले इस नए अधिनियम में कर चोरी रोकने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कई कड़े प्रावधान किए गए हैं। इन नए फॉर्म्स में नौकरीपेशा लोगों के लिए मकान किराया भत्ता (एचआरए) क्लेम करने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया गया है, वहीं कंपनियों और उनके ऑडिटर्स की विदेशी आय और ऑडिट रिपोर्टिंग पर जवाबदेही भी काफी बढ़ा दी गई है। एचआरए क्लेम में फर्जीवाड़े पर लगेगी लगाम फर्जी रेंटल क्लेम को रोकने के लिए सरकार ने नया 'फॉर्म 124' पेश किया है। इसके तहत अब करदाताओं को नियोक्ता के पास एचआरए छूट का दावा करते समय यह अनिवार्य रूप से बताना होगा कि मकान मालिक के साथ उनका क्या रिश्ता है। नांगिया ग्लोबल एडवाइजर्स के पार्टनर संदीप झुनझुनवाला के अनुसार, इस नए नियम से बिना स्वामित्व या वास्तविक भुगतान के किए जाने वाले कृत्रिम और फर्जी दावों की सटीक पहचान हो सकेगी और जरूरत पड़ने पर उन्हें खारिज किया जा सकेगा। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस व्यवस्था से वास्तविक किराएदारों के हितों की पूरी तरह से रक्षा होगी। कंपनियों और ऑडिटर्स की बढ़ी जिम्मेदारी कॉर्पोरेट टैक्स अनुपालन को सख्त बनाते हुए नए टैक्स ऑडिट 'फॉर्म 26' में भी अहम बदलाव किए गए हैं। अब कंपनियों के लिए यह खुलासा करना अनिवार्य कर दिया गया है कि क्या वैधानिक ऑडिटर की किसी प्रतिकूल टिप्पणी, योग्यता या आपत्ति का कंपनी की आय, नुकसान या बुक प्रॉफिट पर कोई प्रभाव पड़ रहा है। झुनझुनवाला ने बताया कि कंपनियों को अब अपनी इनकम टैक्स रिटर्न फाइनल करने से पहले किसी भी ऑडिट टिप्पणी के टैक्स प्रभाव का बारीकी से आकलन करना होगा और भविष्य के मुकदमों से बचने के लिए स्पष्ट दस्तावेज बनाए रखने होंगे। इसके साथ ही, विदेशी आय पर टैक्स क्रेडिट (एफटीसी) प्रस्तावित फॉर्म 44 के जरिए एकाउंटेंट्स और ऑडिटर्स की जिम्मेदारी बढ़ाई गई है। एकाउंटेंट्स को अब विदेशी टैक्स सर्टिफिकेट, भुगतान प्रमाण, एक्सचेंज रेट रूपांतरण और ट्रीटी पात्रता शर्तों की स्वतंत्र रूप से जांच करनी होगी। झुनझुनवाला के मुताबिक, यह प्रावधान उन मामलों में ऑडिटर्स के लिए बड़ी चुनौती पैदा करेगा जहां विदेशी क्षेत्राधिकार बिना स्पष्ट ब्रेकअप के समेकित टैक्स स्टेटमेंट जारी करते हैं। पैन डुप्लीकेशन और डेटा स्टोरेज पर सख्ती डेटाबेस की अखंडता बनाए रखने और पहचान में हेरफेर रोकने के लिए, कंपनियों को अब पैन आवेदन करते समय यह घोषणा करनी होगी कि उनके पास पहले से कोई पैन मौजूद नहीं है। डुप्लीकेट आवेदनों से बचने के लिए संस्थाओं को आवेदन से पहले अपनी शाखाओं या पूर्ववर्ती संस्थाओं की आंतरिक जांच करनी होगी। इसके अलावा, टैक्स ऑडिट रिपोर्ट में अब कंपनियों को अपने एकाउंटिंग सॉफ्टवेयर, क्लाउड स्टोरेज (आईपी एड्रेस और देश सहित) के साथ-साथ भारत में स्थित फिजिकल बैकअप सर्वर का पूरा पता देना भी अनिवार्य होगा। सरकार हितधारकों के परामर्श के बाद अगले महीने इन ड्राफ्ट नियमों और फॉर्म्स को अंतिम रूप देकर अधिसूचित करेगी। यह साफ है किनई कर व्यवस्था अधिक डेटा-संचालित होगी, इसमेंफर्जी दावों की गुंजाइश कम होगी और संस्थागत जवाबदेही का स्तर कहीं अधिक ऊंचा होगा।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Feb 25, 2026, 14:46 IST
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