धमतरी में पटवारियों का उग्र प्रदर्शन: प्रशासन के नोटिस की कॉपियां फूंकीं, काम पर लौटने से किया इनकार

जिले में 22 दिनों से चल रही पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल अब शासन और प्रशासन के साथ आर-पार की जंग में बदल चुकी है। जिला प्रशासन द्वारा आंदोलनकारी पटवारियों को 48 घंटे के भीतर काम पर लौटने का कड़ा नोटिस जारी किया गया है। इस आधिकारिक आदेश में साफ चेतावनी दी गई है कि यदि तय समय सीमा के भीतर पटवारी अपने दायित्वों पर वापस नहीं लौटते हैं, तो उनके खिलाफ बर्खास्तगी और निलंबन जैसी सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन के इस अल्टीमेटम ने आंदोलन की आग में घी डालने का काम किया है। इस दमनकारी नीति से आक्रोशित होकर धमतरी के गांधी मैदान में डटे राजस्व पटवारी संघ के करीब 148 पटवारियों ने सरेआम प्रशासनिक नोटिस की कॉपियां जलाकर अपना उग्र विरोध दर्ज कराया और जमकर नारेबाजी की। पटवारी संघ का सीधा आरोप है कि सरकार और प्रशासन उनके साथ तानाशाही रवैया अपना रहे हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि वर्तमान में लागू किया गया 'PV ऐप' और इसके जरिए होने वाला डिजिटल क्रॉप सर्वे पूरी तरह से अव्यावहारिक और त्रुटिपूर्ण है। इस मानसूनी सीजन में जब जिले के अधिकांश खेत भारी जलभराव और गहरे कीचड़ से लबालब भरे हुए हैं, तब पटवारियों को अपनी जान जोखिम में डालकर खेतों के बीच जाकर बायोमेट्रिक सर्वे करने के लिए विवश किया जा रहा है। इसके अलावा उन पर एसएससी पंजीयन, किसान पंजीयन, वेकेट क्लेम, राष्ट्रीय जनगणना और विभिन्न प्रकार के प्रमाणपत्रों के ऑनलाइन सत्यापन का अतिरिक्त बोझ डाल दिया गया है, जिससे सभी कर्मचारी भारी मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं। ये भी पढ़ें:जांजगीर-चांपा: पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी, पदाधिकारियों पर कार्रवाई का विरोध पटवारियों की स्पष्ट मांग है कि इस अव्यवहारिक PV ऐप में तुरंत सुधार कर इसे व्यावहारिक बनाया जाए, जोखिमभरी स्थिति में बायोमेट्रिक सर्वे को तत्काल बंद किया जाए, आंदोलन के दौरान पटवारियों पर की गई सभी दमनात्मक कार्रवाइयां और निलंबन आदेश वापस लिए जाएं, लंबे समय से लंबित वेतन विसंगति का त्वरित निराकरण हो और उनकी समयबद्ध पदोन्नति की प्रक्रिया में ठोस पहल की जाए। पटवारी संघ ने दो टूक शब्दों में ऐलान कर दिया है कि जब तक उनकी ये जायज मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक उनका यह आंदोलन और उग्र रूप धारण करेगा लेकिन वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे। दूसरी ओर इस लंबे खिंचते गतिरोध की सबसे भारी कीमत धमतरी के गरीब किसानों और आम जनता को चुकानी पड़ रही है। किसान पंजीयन, धान खरीदी की तैयारियां, नामांतरण, सीमांकन और जरूरी प्रमाणपत्रों का काम पूरी तरह ठप होने से ग्रामीण हर रोज दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। अब देखना होगा कि 48 घंटे के इस अल्टीमेटम के बाद प्रशासन क्या रुख अपनाता है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Nov 03, 2026, 17:24 IST
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