Budget 2026: बजट कैसे तैयार होता है, क्या-क्या तैयारियां होती हैं, सबसे लंबा बजट भाषण किसका? जानें सबकुछ

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 01 फरवरी 2026 को बजट पेश करेंगी। यह मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का तीसरा बजट होगा। हालांकि बजट हर साल एक फरवरी को पेश किया जाता है, लेकिन इसकी तैयारी कई महीनों पहले शुरू हो जाती है। इसलिए यह समझना जरूरी है कि बजट का संवैधानिक आधार क्या है, इसे कैसे तैयार किया जाता है और इससे जुड़ी अहम बातें क्या हैं। बजट क्या है और भारतीय संविधान इसे कैसे परिभाषित करता है भारतीय संविधान में 'बजट' शब्द का सीधे तौर पर उल्लेख नहीं है, लेकिन संविधान के अनुच्छेद 112 में 'वार्षिक वित्तीय विवरण' का प्रावधान किया गया है। इसके तहत सरकार को हर साल अपनी आय और व्यय का पूरा विवरण संसद के सामने रखना होता है। संविधान के अनुसार बजट पेश करने का अधिकार राष्ट्रपति को है, लेकिन राष्ट्रपति स्वयं बजट पेश नहीं करते, बल्कि किसी मंत्री के माध्यम से इसे संसद में प्रस्तुत कराया जाता है। आम तौर पर वित्त मंत्री ही बजट पेश करते हैं, हालांकि 2019 में अरुण जेटली की अस्वस्थता के कारण पीयूष गोयल ने अंतरिम बजट प्रस्तुत किया था। बजट शब्द की उत्पत्ति 'बजट' शब्द की उत्पत्ति फ्रांसीसी शब्द Bougette से हुई है, जिसका अर्थ चमड़े का बैग होता है। पुराने समय में सरकार और उद्योगपति अपने वित्तीय दस्तावेज चमड़े के बैग में रखते थे, इसलिए यह शब्द प्रचलित हुआ। ब्रिटेन में इस शब्द का व्यापक उपयोग हुआ और वहीं से यह भारत तक पहुंचा। क्या होता है बजट बजट सरकार का एक साल का वित्तीय खाका होता है, जिसमें आने वाले वित्त वर्ष की अनुमानित आय और खर्च का विवरण दिया जाता है। सरकार टैक्स, रेलवे किराया और विभिन्न मंत्रालयों से होने वाली आय का अनुमान लगाती है, साथ ही विकास योजनाओं, कल्याणकारी कार्यक्रमों और प्रशासनिक कार्यों पर होने वाले खर्च का आकलन करती है। इन्हीं आंकड़ों को वित्त मंत्री बजट भाषण के माध्यम से संसद के सामने प्रस्तुत करते हैं। भारत में बजट कौन तैयार करता है भारत में बजट तैयार करने की प्रक्रिया काफी व्यापक और जटिल होती है। बजट निर्माण में मुख्य भूमिका वित्त मंत्रालय की होती है, लेकिन इसमें नीति आयोग और विभिन्न मंत्रालयों की भी अहम भागीदारी रहती है। अलग-अलग मंत्रालय अपने-अपने विभागों के लिए अनुमानित खर्च का प्रस्ताव वित्त मंत्रालय को भेजते हैं। इन प्रस्तावों के आधार पर वित्त मंत्रालय खर्च का प्रारूप तैयार करता है। इसके बाद वित्त मंत्रालय के अंतर्गत आर्थिक मामलों के विभाग का बजट सेक्शन पूरे बजट को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया शुरू करता है। बजट तैयार करने की प्रक्रिया: प्रमुख चरण बजट तैयार करने की प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होती है, जिसमें सरकार विभिन्न विभागों, विशेषज्ञों और हितधारकों से विचार-विमर्श करती है। पहला चरण सबसे पहले बजट सेक्शन सभी केंद्रीय मंत्रालयों, राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, स्वायत्त संस्थानों, विभागों और सशस्त्र बलों को एक सर्कुलर जारी करता है। इसमें उन्हें अगले वित्त वर्ष के लिए अपने अनुमानित खर्च (एस्टिमेट) तैयार करने का निर्देश दिया जाता है। जब मंत्रालय और विभाग अपनी मांगें प्रस्तुत कर देते हैं, तो वित्त मंत्रालय का व्यय विभाग उनके साथ बातचीत और समन्वय की प्रक्रिया शुरू करता है। दूसरा चरण इस चरण में आर्थिक मामलों का विभाग और राजस्व विभाग विभिन्न हितधारकों जैसे किसानों, व्यापारियों, उद्योगपतियों, अर्थशास्त्रियों और सिविल सोसाइटी संगठनों से संवाद करते हैं और उनसे बजट को लेकर सुझाव मांगे जाते हैं। इस प्रक्रिया को प्री-बजट चर्चा कहा जाता है। इन चर्चाओं के आधार पर वित्त मंत्री कर (टैक्स) से जुड़े प्रस्तावों पर अंतिम निर्णय लेते हैं। बजट को अंतिम रूप देने से पहले सभी महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर प्रधानमंत्री से भी चर्चा की जाती है। तीसरा और अंतिम चरण अंतिम चरण में वित्त मंत्रालय बजट से जुड़े सभी विभागों से आय और खर्च से संबंधित आंकड़े और विवरण एकत्र करता है। इन आंकड़ों के आधार पर अगले वित्त वर्ष के लिए सरकार की अनुमानित आय और व्यय की योजना तैयार की जाती है। इसके बाद सरकार राज्यों, बैंकरों, कृषि क्षेत्र के प्रतिनिधियों, अर्थशास्त्रियों और व्यापार संगठनों के साथ अंतिम दौर की बैठक करती है, जिसमें टैक्स में छूट और आर्थिक सहायता जैसे मुद्दों पर विचार किया जाता है। अंततः वित्त मंत्रालय संशोधित अनुमानों के आधार पर बजट को अंतिम रूप देता है और वित्त मंत्री के बजट भाषण की तैयारी की जाती है। बजट पेश होने से पहले क्यों होता है 'हलवा समारोह' केंद्रीय बजट पेश होने से पहले वित्त मंत्रालय में एक विशेष परंपरा निभाई जाती है, जिसे 'हलवा समारोह' कहा जाता है। यह समारोह इस बात का प्रतीक होता है कि बजट को अंतिम रूप दे दिया गया है और उसकी छपाई की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस अवसर पर बजट तैयार करने में शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रति सरकार आभार व्यक्त करती है। दरअसल, बजट प्रक्रिया से जुड़े अधिकारी संसद में बजट पेश होने तक एक तरह से 'लॉक-इन' रहते हैं और इस दौरान उन्हें अपने परिवार और बाहरी दुनिया से सीमित संपर्क रखने के निर्देश होते हैं, ताकि बजट से जुड़ी जानकारी गोपनीय बनी रहे। हलवा समारोह के जरिए सरकार उनकी कड़ी मेहनत और समर्पण को सम्मान देती है। साथ ही यह परंपरा यह भी दर्शाती है कि देश के सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक दस्तावेज को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jan 29, 2026, 12:35 IST
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