खुलासा: संभल में साल-दर-साल घटती गई हिंदू आबादी, पनपते गए आतंकी माड्यूल; अमेरिका तक पहुंचा लोकल टेरर नेटवर्क
संभल हिंसा की न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट में सनसनीखेज खुलासे हुए हैं। जांच में सामने आया है कि संभल में हिंदुओं की आबादी साल-दर-साल घटती गई और आतंकी संगठनों के माड्यूल पनपते गए। संभल के कुछ युवा पाकिस्तान और अफगानिस्तान के आतंकी संगठनों से जुड़ने के बाद अमेरिका की टॉप आतंकियों की लिस्ट में शुमार होते रहे। सूत्रों के मुताबिक रिपोर्ट में इस अंतरराष्ट्रीय टेरर माड्यूल का विस्तार से जिक्र किया गया है। आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक संभल में गजवा-ए-हिंद का मंसूबा भी पाला जा रहा था। इसके लिए दंगों में हिंदुओं, उनके धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया गया। लव जिहाद के जरिये हिंदू लड़कियों को निशाना बनाया गया। पूर्ववर्ती सरकारों में संभल के कुछ राजनीतिक लोगों ने अराजकता फैलाई और सरकारें उनके खौफ में शांत रहीं। सरकारों के संरक्षण में हिंदू प्रताड़ित किए जाते रहे। संभल में अराजकता का आलम यह था कि सीएए के विरोध में जबरन छह दिन तक बाजारों को बंद कराया गया। आजादी के बाद हुए 15 बड़े दंगों में कट्टरपंथी मुस्लिमों को खुला संरक्षण दिया गया और हिंदू पक्ष की ओर से मुकदमे तक दर्ज नहीं किए गए। मजबूरन दंगाइयों के डर से हिंदू परिवारों को पलायन के लिए मजबूर होना पड़ा और उनके पौराणिक तीर्थों पर दंगाइयों ने कब्जा कर लिया। कई आतंकी संगठनों में पैठ रिपोर्ट के मुताबिक संभल के कुछ युवाओं का ब्रेनवॉश कर उनकी भर्ती कुख्यात आतंकी संगठनों में की गई। इनमें हरकत-उल-मुजाहिदीन, तहरीक-ए-तालिबान, अल-कायदा, हिजबुल मुजाहिदीन, आईएस आदि शामिल हैं। इसके अलावा पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई ने भी संभल में अपना नेटवर्क बनाने में सफलता हासिल की। अमेरिका की वैश्विक आतंकियों की टॉप टेन लिस्ट में भी संभल का कनेक्शन सामने आया, जिसमें मौलाना आसिम उमर भी शामिल है। इसके अलावा अहमद रजा उर्फ शाहरुख, मोहम्मद आसिफ, मौलाना असीम, जफर मसूद जैसे नाम मुख्य हैं। लव जिहाद का शिकार बनीं हिंदू लड़कियां न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट में दर्ज बयानों से पता चला है कि संभल के एक हिंदू परिवार ने अपनी बेटी को लव जिहाद में खो दिया। वर्ष 2013-14 में जब उसका विवाह मुस्लिम युवक से हुआ तो वह अपने धर्म और घर-परिवार से दूर हो गई। एक गवाह ने बयान दिया कि उनकी छोटी पुत्री बचपन से ही धार्मिक संस्कारों वाली थी, लेकिन 2013-14 में संभल के दीपा सराय निवासी तुर्क युवक से विवाह के बाद सब बदल गया। उसने यमुनानगर से बीबीए और गाजियाबाद से एमबीए की पढ़ाई की थी। इसी दौरान उसका संपर्क तुर्क युवा से हुआ। दिल्ली में जिस पीजी में वह रहती थी, वहां उसके कमरे से उर्दू की किताबें मिलीं। यह मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट तक पहुंचा। अदालत में पति के पक्ष में बयान देने की वजह से परिवार केस हार गया। फैसले के बाद संभल में भव्य दावत-ए-वलीमा का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य हिंदू परिवार को अपमानित करना था। उनका कहना है कि संभल में जब भी कोई हिंदू लड़की मुस्लिम युवक से विवाह करती थी, तो बड़े स्तर पर दावत आयोजित कर हिंदू परिवारों को पलायन के लिए मजबूर किया जाता था।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Aug 30, 2025, 01:32 IST
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