हिमाचल: हाईकोर्ट ने कहा- गवाहों से जिरह सच के लिए हो, उत्पीड़न के लिए नहीं

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने आपराधिक मुकदमों में गवाहों से की जाने वाली जिरह (बहस) की सीमा को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि आरोपी को गवाह से असीमित या अप्रासंगिक पूछताछ करने का अधिकार नहीं है। जिरह का उद्देश्य सत्य को सामने लाना है, न कि गवाह का उत्पीड़न करना या अदालत का कीमती समय नष्ट करना। न्यायाधीश राकेश कैंथला की अदालत ने दिनेश चंद्र शर्मा की ओर से दायर याचिका को खारिज करते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) ऊना के आदेश को बरकरार रखा।अदालत ने कहा कि जजों और मजिस्ट्रेट को जिरह की अवधि और सीमा पर प्रभावी नियंत्रण रखना चाहिए। लंबी और अप्रासंगिक जिरह न केवल मुकदमेबाजी का खर्च बढ़ाती है, बल्कि जनता के समय और धन की भी बर्बादी करती है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jul 21, 2026, 17:35 IST
पूरी ख़बर पढ़ें »




हिमाचल: हाईकोर्ट ने कहा- गवाहों से जिरह सच के लिए हो, उत्पीड़न के लिए नहीं #CityStates #Shimla #HpCourtOrder #SubahSamachar