तस्वीरें: राम सिंह पठानिया ने फूंका था अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह का पहला बिगुल, इन सपूतों की भी रही भूमिका

वजीर राम सिंह पठानिया भारत की आजादी की लड़ाई का इतिहास केवल दिल्ली, मुंबई, कोलकाता या पंजाब तक सीमित नहीं है। हिमालय की गोद में बसे हिमाचल प्रदेश ने भी स्वतंत्रता संग्राम में उल्लेखनीय भूमिका निभाई। यहां के वीरों ने अंग्रेजी हुकूमत और रियासती दमन के खिलाफ संघर्ष का बिगुल फूंका और देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।हिमाचल के स्वतंत्रता संग्राम का जिक्र वजीर राम सिंह पठानिया के बिना अधूरा है। नूरपुर रियासत के वीर सेनानी राम सिंह पठानिया को अंग्रेजों के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह का अग्रदूत माना जाता है। वर्ष 1848-49 में उन्होंने अंग्रेजी शासन के खिलाफ विद्रोह का नेतृत्व किया और नूरपुर किले पर कब्जा कर स्वतंत्र शासन की घोषणा तक कर दी। राम सिंह पठानिया ने स्थानीय राजाओं और जनता को संगठित कर अंग्रेजों को चुनौती दी। हालांकि अंग्रेजों ने इस विद्रोह को दबा दिया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया, लेकिन उनका संघर्ष 1857 की क्रांति से पहले अंग्रेजी सत्ता के खिलाफ उठी सबसे बड़ी आवाजों में गिना जाता है। इतिहासकार उन्हें उत्तर भारत में औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध प्रारंभिक क्रांतिकारियों में शामिल करते हैं।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Aug 14, 2026, 22:48 IST
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