हाईकोर्ट का आदेश : किन अपराधों में चयन रद्द होगा, किनमें नहीं, सरकार स्पष्ट नियम बनाए
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा है कि सरकार को ऐसी नीति बनानी चाहिए जिसमें स्पष्ट हो कि किन आपराधिक मामलों में चयनित अभ्यर्थी की नियुक्ति रद्द की जा सकती है, किन मामलों में नहीं। ऐसी नीति बनने से नियुक्ति प्राधिकारियों को भविष्य में निर्णय लेने में स्पष्टता रहेगी। यह आदेश न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता की एकलपीठ ने अनिल कुमार यादव की याचिका स्वीकार करते हुए दिया। कोर्ट ने याची के कांस्टेबल पद पर चयन को निरस्त करने के वाराणसी के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के 14 जनवरी 2007 के आदेश को रद्द कर दिया। याची के खिलाफ मारपीट, अपमान करना, धमकी देना, संपत्ति को नुकसान पहुंचाने आदि के आरोप में एफआईआर दर्ज थी। आरोप था कि उसने पुलिस भर्ती के आवेदन के दौरान इस आपराधिक मामले की जानकारी छिपाई थी। इस आधार पर याची के चयन को निरस्त कर दिया गया था। याची ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी। याची की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि याची के खिलाफ दर्ज अपराध मामूली प्रकृति के थे। केवल इस आधार पर चयन रद्द नहीं किया जा सकता कि अभ्यर्थी ने आवेदन में मामले का उल्लेख नहीं किया। यह भी कहा गया कि नौकरी न मिलने के भय के कारण याची से यह तथ्य आवेदन में अंकित नहीं हो पाया था, लेकिन इससे वह नियुक्ति के लिए अयोग्य नहीं हो जाता।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Sep 24, 2026, 13:30 IST
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