High Court : अदालत डाकिया या दर्शक नहीं, मुकदमा वापसी पर दूसरे पक्ष के अधिकारों को भी देखना होता है
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अदालत कोई डाकिया या दर्शक नहीं, जो वादी की इच्छा पर निर्भर रहे। उसे न्याय हित में देखना होता है कि इससे किसी अन्य पक्ष के अधिकारों का हनन तो नहीं हो रहा है। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह, न्यायमूर्ति राजीव मिश्रा और न्यायमूर्ति अजय भनोट की पूर्ण पीठ ने वाराणसी की जीरा देवी व अन्य की याचिका सुनवाई के लिए एकल पीठ के पास भेज दी। एक संपत्ति के मालिकाना हक को लेकर मुन्नन देवी व अमरावती के बीच विवाद चल रहा था। मुन्नन देवी का आरोप था कि अमरावती ने धोखाधड़ी कर उनकी जमीन अपने नाम करा ली। इसे लेकर मुन्नन देवी ने ट्रायल कोर्ट में वाद दायर किया था, जो लंबित था। इसी बीच मुन्नन देवी ने जीरा देवी और घनश्याम पटेल को विवादित संपत्ति बेच दी। मुकदमा लंबित रहने के दौरान ही फरवरी 2013 में मुन्नन देवी की मृत्यु हो गई। इसके बाद उनकी बेटी फूलपत्ती वादी बनीं। उन्होंने पांच अप्रैल 2018 को बिना शर्त मुकदमा वापस लेने के लिए आवेदन किया, जिसे एडीजे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Feb 09, 2026, 14:47 IST
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