High Court : पैर ही नहीं दुर्घटना ने नाबालिग से छीन ली शादी की संभावनाएं, तीन गुना मुआवजा अदा करने का आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सड़क दुर्घटना में पैर गंवा चुके नाबालिग को मिलने वाली मुआवजा राशि को तीन गुना बढ़ा कर ब्याज समेत अदा करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि हादसे से न सिर्फ पीड़ित को शारीरिक क्षति पहुंची है, बल्कि स्थाई दिव्यांगता ने उसकी शादी की संभावनाओं को भी खत्म कर दिया है। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति संदीप जैन की अदालत ने प्रयागराज के पीड़ित संगम लाल की ओर से मुआवजा बढ़ाने की अपील स्वीकार कर ली साथ ही मुआवज घटाने की मांग वाली बीमा कंपनी की अपील खारिज कर दिया। मामला 2009 का है। ट्रक की चपेट में आने से 16 वर्षीय संगम लाल गंभीर रूप से घायल हो गया था। दुर्घटना में उसका दाहिना पैर घुटने से कट गया, जबकि बाएं पैर की दो उंगलियां भी काटनी पड़ीं। इस हादसे ने उसके शारीरिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक भविष्य को भी प्रभावित किया। मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण ने 2015 में दिए गए अपने फैसले में घायल को 5,03,310 रुपये का मुआवजा सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित प्रदान किया था। इस फैसले से असंतुष्ट होकर बीमा कंपनी ने मुआवजा घटाने के लिए और पीड़ित ने मुआवजा बढ़ाने के लिए अलग-अलग अपीलें दाखिल की थीं। कोर्ट ने मुआवजा राशि की तीन गुना बढ़ते हुए 16,59,510 रुपये तय कर दिए। बीमा कंपनी को यह राशि दावा दाखिल करने की तारीख से सात प्रतिशत ब्याज के साथ पीड़ित की अदा करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि विवाह केवल एक व्यक्तिगत घटना नहीं, बल्कि सामाजिक स्वीकृति, भावनात्मक सुरक्षा और भविष्य की स्थिरता से जुड़ा विषय है। जब कोई किशोर स्थायी विकलांगता का शिकार होता है, तो समाज का दृष्टिकोण, पारिवारिक आशंकाएं और आत्मविश्वास की कमी उसकी शादी की संभावनाओं को गंभीर रूप से प्रभावित करती हैं। इस वास्तविकता से अदालत आंख नहीं मूंद सकती।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jan 17, 2026, 22:04 IST
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