धीरेंद्र प्रकरण: अधिवक्ता की मौत से बागेश्वर में गम और गुस्सा, हिरासत में संदिग्धों से पूछताछ में खुलेंगे राज
17 दिन से लापता अधिवक्ता और पूर्व सभासद धीरेंद्र परिहार का शव मंगलवार शाम गोमती नदी किनारे मिलने से सनसनी फैल गई। घटना से बागेश्वर में शोक और आक्रोश का माहौल है। पुलिस ने एक महिला समेत दो संदिग्धों को हिरासत में लिया है। पुलिस ने सर्विलांस व कॉल हिस्ट्री के आधार पर हिरासत में लिए गए दोनों संदिग्धों से पूछताछ के बाद उनकी निशानदेही पर नगर के सैम मंदिर वार्ड की सीमा से लगे थुणाई क्षेत्र में गोमती नदी किनारे तलाश अभियान चलाया। नदी से निकाले गए शव की शिनाख्त परिजनों ने धीरेंद्र परिहार के रूप में की। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पंचनामा भरा और पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया। बुधवार को पोस्टमार्टम होगा और पुलिस पूरे मामले का खुलासा करेगी। फिलहाल हत्या की वजह, वारदात के तरीके और अन्य आरोपियों की भूमिका का खुलासा नहीं हुआ है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार शव क्षत-विक्षत अवस्था में था और उसका एक हाथ व पैर नहीं था। लापता बेटे की वापसी की राह देख रहे माता नंदी परिहार, पिता गोविंद सिंह परिहार, भाई पंकज और बहन दीक्षा का रो-रोकर बुरा हाल है। जिला अस्पताल परिसर में परिजनों की चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो गया। शव मिलने के बाद जिला अस्पताल की मोर्चरी के बाहर भी लोगों की भीड़ जुटी रही। स्थानीय व्यापारियों, अधिवक्ताओं और नागरिकों ने घटना पर गहरा रोष जताते हुए आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई और सख्त सजा की मांग की। सीएमएस डॉ. जीएस जोशी ने बताया कि विशेषज्ञों की निगरानी में पोस्टमार्टम कराया जाएगा। मंत्री, विधायकों की मौजूदगी में हंगामा हुआ तो हरकत में आई पुलिस धीरेंद्र परिहार की खोजबीन में पुलिस की कथित शिथिलता से नाराज अधिवक्ताओं ने मंगलवार दोपहर नुमाइशखेत मैदान में आयोजित राज्यस्तरीय सरस मेले के शुभारंभ कार्यक्रम में प्रदर्शन किया। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश रौतेला के नेतृत्व में जिलेभर से पहुंचे अधिवक्ताओं ने मेले के मुख्य द्वार पर धरना देकर नारेबाजी की। इस दौरान केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री और सांसद अजय टम्टा, विधायक पार्वती दास, कपकोट विधायक सुरेश गढ़िया, डीएम अपूर्वा पांडेय और दायित्वधारी शिव सिंह बिष्ट भी मौके पर मौजूद थे। अधिवक्ताओं ने जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों का घेराव कर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि सोमवार को साथी अधिवक्ता की तलाश में प्रगति जानने के लिए एसपी कार्यालय पहुंचने पर उन्हें इंतजार कराया गया और अधिकारियों ने समय पर मुलाकात नहीं की। हंगामे की सूचना पर एसपी मौके पर पहुंचे। अधिवक्ताओं और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक हुई। इसके बाद एसपी ने अगले 24 घंटे में मामले का खुलासा कर लापता अधिवक्ता को खोज निकालने का भरोसा दिया। आश्वासन के बाद अधिवक्ताओं ने धरना समाप्त किया। सीसीटीवी फुटेज से मिला अहम सुराग धीरेंद्र के परिजनों के अनुसार, धीरेंद्र पहले भी कई बार बिना बताए घर से चले जाते थे और कुछ दिन बाद लौट आते थे। इसी उम्मीद में परिवार ने शुरुआती दिनों में इंतजार किया लेकिन संपर्क नहीं होने पर पुलिस को सूचना दी। 31 अक्तूबर को पुलिस से मदद मांगी गई। जांच के दौरान एक मोहल्ले में लगे सीसीटीवी कैमरों को आग लगाने का फुटेज पुलिस के हाथ लगा। बताया जा रहा है कि फुटेज में कैमरों को जलाने और संदिग्ध गतिविधियों में एक महिला की आकृति दिखाई दी। इसी सुराग के आधार पर पुलिस ने महिला और एक अन्य पुरुष को हिरासत में लिया। मंगलवार को दोनों की निशानदेही पर शव बरामद किया गया। पुलिस सूत्रों के अनुसार, मामले में अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है। आरोपियों की पैरवी नहीं करेंगे बागेश्वर के अधिवक्ता अधिवक्ता धीरेंद्र परिहार की हत्या के विरोध में जिला बार एसोसिएशन ने बड़ा निर्णय लिया है। एसोसिएशन से संबद्ध कोई भी अधिवक्ता हत्याकांड में संलिप्त आरोपियों की पैरवी नहीं करेगा। एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश रौतेला ने बताया कि सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया है। उन्होंने घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए सभी आरोपियों को शीघ्र गिरफ्तार कर उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की। साथ ही पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए हर लोकतांत्रिक और विधिक संघर्ष जारी रखने की बात कही। अधिवक्ता धीरेंद्र परिहार बार एसोसिएशन के सदस्य होने के साथ ही पुस्तकालय अध्यक्ष भी थे। पूरी घटना के चार प्रमुख दिन 17 अक्तूबर- वरिष्ठ अधिवक्ता और पूर्व सभासद धीरेंद्र परिहार शाम के समय अपने घर से अचानक संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हुए। 31 अक्तूबर- 14 दिनों तक स्वतः घर लौटने के इंतजार के बाद, परिजनों ने कोतवाली में गुमशुदगी दर्ज कराई और पुलिस जांच शुरू हुई। 02 नवंबर - ठोस सुराग न मिलने से गुस्साए अधिवक्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने एसबीआई तिराहे पर चक्का जाम किया। 03 नवंबर- डिगर पातल की गहरी खाई से अधिवक्ता का शव रेस्क्यू कर बाहर निकाला गया और मोर्चरी पहुंचाया गया। 17 दिनों से जारी तलाश का दुखद अंत होने से परिजनों में चीख-पुकार मच गई। संवाद इन सवालों के जवाब मिलना बाकी - 17 अक्तूबर को लापता हुए अधिवक्ता की गुमशुदगी 14 दिन बाद दर्ज हुई, तब तक पुलिस ने क्या कोई कदम उठाया - गुमशुदगी दर्ज होने के बाद पुलिस ने शुरुआती दिनों में क्या कार्रवाई की - सीसीटीवी कैमरों को आग लगाने की घटना की जानकारी पुलिस को कब मिली - कैमरों को जलाने के पीछे कौन था और ऐसा करने का मकसद क्या था गोमती से बरामद शव की शिनाख्त धीरेंद्र परिहार के रूप में परिजनों ने की है। पुलिस टीमें हर पहलू और साक्ष्य की बारीकी से पड़ताल कर रही हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद अपराध के पूरे घटनाक्रम से पर्दा उठाया जाएगा। -अजय साह, सीओ बागेश्वर
- Source: www.amarujala.com
- Published: Nov 04, 2026, 11:11 IST
धीरेंद्र प्रकरण: अधिवक्ता की मौत से बागेश्वर में गम और गुस्सा, हिरासत में संदिग्धों से पूछताछ में खुलेंगे राज #CityStates #Bageshwar #Nainital #Uttarakhand #UttarakhandNews #UkNews #BageshwarCrimeNews #AdvocateDhirendraParihar #SubahSamachar
