Ganga Iftar Party Controversy: गंगा में इफ्तार पार्टी के आरोपियों की ओर से शिकायतकर्ता को धमकी!

वाराणसी में एक नाव पर इफ्तार पार्टी के दौरान गंगा में मांसाहारी भोजन फेंकने के आरोप में 14 युवकों की गिरफ्तारी पर अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी ने कहा, ''हमें अदालत में भी धमकियां दी जा रही हैं। जिस तरह से उन्होंने मीडिया के सामने अदालत में धमकियां दी हैं, शिकायतकर्ता को लगातार फोन पर धमकियां मिल रही हैं। यह कृत्य निंदनीय है। इन सभी लोगों पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया जाना चाहिए। वहीं अधिवक्ता नित्यानंद राय ने कहा, ''जैसा कि हमने पहले बताया था, इस मामले में निर्णायक मोड़ नाव चलाने वाले थे। जांच अधिकारी द्वारा रिपोर्ट संख्या 4 में दर्ज रंजन साहनी और अनिल साहनी के बयान लोक अभियोजक द्वारा अदालत में पढ़े गए। बयान में कहा गया कि नाव उनकी मर्जी के खिलाफ जबरन ले ली गई थी। वीएनएस का मामला अब धारा 308.5 के तहत है, जिसमें अधिकतम 10 साल की सजा का प्रावधान है। इसलिए, इस मामले में वीएनएस की धारा 308.5 लागू होती है, जिसके तहत सजा 10 साल से अधिक कारावास की हो सकती है। “इफ्तार पार्टी” आयोजन को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस मामले में अब नया मोड़ तब आया जब शिकायत करने वाले व्यक्ति ने आरोप लगाया कि घटना से जुड़े आरोपियों की ओर से उसे धमकियां दी जा रही हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि उसने धार्मिक भावनाओं और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दे को उठाते हुए प्रशासन से कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन इसके बाद उसे फोन कॉल और अन्य माध्यमों से डराने-धमकाने की कोशिश की जा रही है। बताया जा रहा है कि यह मामला तब सामने आया जब कुछ लोगों द्वारा गंगा नदी के बीच नाव पर इफ्तार पार्टी आयोजित करने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इसके बाद इस पर आपत्ति जताई गई और स्थानीय प्रशासन से शिकायत की गई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उसने कानून के तहत उचित कार्रवाई की मांग की, लेकिन अब उसी को निशाना बनाया जा रहा है। इस घटनाक्रम के बाद पुलिस ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि शिकायतकर्ता की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं और धमकी देने के आरोपों की भी गंभीरता से जांच की जा रही है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि किसी भी व्यक्ति को कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं, इस पूरे मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर भी तनाव की स्थिति बनी हुई है। प्रशासन लोगों से शांति बनाए रखने की अपील कर रहा है और सोशल मीडिया पर भ्रामक या भड़काऊ सामग्री साझा न करने की सलाह दी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जाएगी, ताकि किसी भी प्रकार की अफवाह या गलतफहमी को दूर किया जा सके।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Mar 20, 2026, 03:12 IST
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