उपलब्धि: भारतीय स्टार्टअप अब एआई से अंतरिक्ष और डिफेंस तक; इनोवेशन, निवेश और जोखिम की क्षमता बढ़ी

भारत की उद्यमशील यात्रा में स्टार्टअप इंडिया के दस वर्ष पूरे होना केवल एक सरकारी पहल की सालगिरह नहीं है, बल्कि यह उस गहरे संरचनात्मक बदलाव का संकेत है, जिसने भारत की अर्थव्यवस्था, रोजगार बाजार और तकनीकी आत्मनिर्भरता को नई दिशा दी है। अब भारत के नई पीढ़ी के स्टार्टअप एआई से अंतरिक्ष और डिफेंस तक पहुंच गए हैं। भारत आज दुनिया के तीसरे सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम के रूप में स्थापित हो चुका है। उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी), नीति आयोग और विभिन्न उद्योग संगठनों के अनुसार स्टार्टअप इंडिया अब नीति से आगे बढ़कर आर्थिक शक्ति का रूप ले चुका है। सरकारी रिकॉर्ड बताते हैं कि 2026 तक 2 लाख से अधिक डीपीआईआईटी-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप भारत में सक्रिय हैं। यह संख्या केवल पंजीकरण का आंकड़ा नहीं, बल्कि एक ऐसे इकोसिस्टम की पहचान है जिसमें इनोवेशन, निवेश और जोखिम लेने की क्षमता लगातार बढ़ी है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अनुसार इन स्टार्टअप्स ने अब तक 21 लाख से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार सृजित किए हैं, जबकि अप्रत्यक्ष रोजगार इससे कहीं अधिक माने जाते हैं। नीति आयोग के पूर्व सीईओ और वर्तमान नीति सलाहकार अमिताभ कांत का कहना है कि स्टार्टअप इंडिया ने भारत में जॉब सीकर से जॉब क्रिएटर बनने की मानसिकता को मजबूत किया है। उनके अनुसार बीते एक दशक में यह बदलाव शहरी सीमाओं से निकलकर छोटे शहरों तक पहुंचा है, जो किसी भी उभरती अर्थव्यवस्था के लिए निर्णायक संकेत है। ये भी पढ़ें:सुखोई-57 के लिए रास्ता खुला, रूस के फाइटर जेट पर विचार; 114 राफेल खरीद पर मुहर के बाद भी विकल्प खुले यूनिकॉर्न बूम और निवेश का बदला भूगोल भारत का यूनिकॉर्न सफर स्टार्टअप इंडिया की सफलता का सबसे ठोस पैमाना माना जाता है। 2014 में जहां भारत में केवल 4 यूनिकॉर्न थे, वहीं 2026 तक यह संख्या 125 तक पहुंच गई। इनका कुल वैल्यूएशन 350 अरब डॉलर से अधिक आंका गया है। यह जानकारी स्टार्टअप इंडिया डैशबोर्ड, प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल एसोसिएशन तथा नीति आयोग के संयुक्त विश्लेषण पर आधारित है। आईआईएम अहमदाबाद के प्रोफेसर और स्टार्टअप इकोसिस्टम विशेषज्ञ प्रो. अंशुल गुप्ता के मुताबिक भारत में यूनिकॉर्न्स का उभार केवल पूंजी प्रवाह का परिणाम नहीं है, बल्कि घरेलू बाजार की गहराई और डिजिटल अपनाने की तेज रफ्तार का भी नतीजा है। उनका कहना है कि भारत का उपभोक्ता आधार अब स्टार्टअप्स के लिए प्रयोगशाला की तरह काम कर रहा है। निजी स्टार्टअप्स की भागीदारी से रक्षा क्षेत्र अधिक प्रतिस्पर्धी भारतीय स्टार्टअप अब केवल इंटरनेट या ई-कॉमर्स तक सीमित नहीं है। एआई, डीप टेक, एग्रीटेक, फिनटेक, अंतरिक्ष और डिफेंस जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में तेजी से नई कंपनियां उभर रही हैं। इसरो और रक्षा मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि निजी स्टार्टअप्स की भागीदारी से भारत का अंतरिक्ष और रक्षा क्षेत्र अधिक प्रतिस्पर्धी और नवाचारी बना है। ये भी पढ़ें:'ईयू से मुक्त व्यापार समझौते से मजबूत होंगे भारत-इटली संबंध', इतालवी राजदूत बार्टोली का बयान चुनौती गति को बनाए रखने की स्टार्टअप इंडिया ने दस वर्ष पूरे कर वैश्विक मंच पर अपनी पहचान मजबूत की है। अब चुनौती इस गति को बनाए रखने और अगले दशक में इसे वैश्विक नेतृत्व में बदलने की है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jan 18, 2026, 05:41 IST
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