एक्सप्लेनर: 17 हजार फीट की ऊंचाई कम होने से लेकर हाईजैक के दावे तक, संकट के बीच उड़ते विमान में क्या-क्या हुआ?

फ्लाईदुबई की दुबई-तेल अवीव उड़ान में कॉकपिट के भीतर हुई घटना ने विमान सुरक्षा से जुड़े कई अहम सवाल खड़े किए हैं। मुख्य घटना सामने आ चुकी है, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि विमान की उड़ान के दौरान आपात संकेतों का क्या मतलब होता है, अचानक हजारों फीट ऊंचाई कम होना कितना गंभीर संकेत है और ऐसी स्थिति में विमान को सुरक्षित उतारने के लिए पायलट, केबिन क्रू और यात्रियों की भूमिका क्या हो सकती है। 1.7 हजार फीट की ऊंचाई अचानक कम होना क्या बताता है फ्लाइट ट्रैकिंग आंकड़ों के अनुसार विमान ने करीब दो मिनट से भी कम समय में 17 हजार फीट यानी पांच हजार मीटर से अधिक ऊंचाई खो दी। सामान्य उड़ान में विमान अपनी ऊंचाई और गति को नियंत्रित तरीके से बदलता है। इतनी तेजी से नीचे आना असामान्य स्थिति का संकेत माना जाता है।हालांकि केवल ऊंचाई में तेज गिरावट के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि विमान दुर्घटना की ओर जा रहा था। आपात स्थिति में पायलट जानबूझकर भी तेजी से नीचे आ सकते हैं, खासकर जब विमान को तत्काल किसी नजदीकी हवाईअड्डे पर उतारना हो। स्क्वॉक 7700 और 7500 क्या होते हैं विमान में ट्रांसपोंडर नाम की प्रणाली होती है, जो एयर ट्रैफिक कंट्रोल को विमान की पहचान और स्थिति से जुड़ी जानकारी भेजती है। पायलट जरूरत पड़ने पर विशेष चार अंकों के कोड के जरिए आपात स्थिति का संकेत दे सकते हैं। स्क्वॉक 7700 सामान्य आपात स्थिति के लिए इस्तेमाल होने वाला कोड है। इसका अर्थ है कि विमान को गंभीर समस्या का सामना करना पड़ रहा है और उसे तत्काल सहायता की जरूरत है।इसके बाद स्क्वॉक 7500 प्रसारित किया गया। यह कोड विमान के हाइजैक यानी अपहरण या गैरकानूनी हस्तक्षेप की स्थिति का संकेत देता है।इस घटना में दोनों कोड का सामने आना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पता चलता है कि विमान की स्थिति सामान्य आपात स्थिति से आगे बढ़कर सुरक्षा संबंधी गंभीर संकट में बदल गई थी। विमान जॉर्डन की ओर क्यों गया और फिर सऊदी अरब में क्यों उतरा उड़ान दुबई से तेल अवीव जा रही थी और सऊदी अरब के ऊपर से इस्राइल की ओर बढ़ रही थी। संकट पैदा होने के बाद विमान ने अपना मार्ग बदला और सऊदी अरब के उत्तर-पश्चिम में स्थित ताबुक की ओर मोड़ दिया।आपात स्थिति में विमान को हमेशा मूल गंतव्य तक पहुंचाने की कोशिश नहीं की जाती। प्राथमिकता होती है कि विमान को ऐसी जगह उतारा जाए जहां सुरक्षित लैंडिंग की सुविधा उपलब्ध हो और आपात सेवाएं तुरंत पहुंच सकें। कॉकपिट में एक पायलट के घायल होने के बाद विमान कैसे उड़ता रहा यही इस घटना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।विमान में एक से अधिक पायलट होते हैं। यदि एक पायलट घायल हो जाए या किसी कारण से विमान नहीं उड़ा पाए, तो दूसरा पायलट विमान का नियंत्रण संभाल सकता है। इस मामले में यात्रियों और चालक दल के सदस्यों के कॉकपिट तक पहुंचने और कथित हमलावर को काबू करने की जानकारी भी सामने आई है।यात्रियों में से एक ने बताया कि उसने विमान के नियंत्रण को संभालने की कोशिश की और बाद में दूसरे पायलट ने नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया।यह विवरण जांच का हिस्सा रहेगा, लेकिन इससे यह स्पष्ट होता है कि संकट की घड़ी में कॉकपिट क्रू, केबिन क्रू और यात्रियों की सामूहिक प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण रही। यात्री कॉकपिट तक कैसे पहुंच पाए आधुनिक यात्री विमानों में कॉकपिट सामान्य यात्रियों के लिए सुरक्षित क्षेत्र होता है। सामान्य परिस्थितियों में वहां प्रवेश अत्यंत नियंत्रित होता है। इस घटना में सामने आई जानकारी के अनुसार घायल पायलट कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफल हुआ। इसके बाद यात्री और चालक दल के सदस्य अंदर पहुंचे और हमलावर को काबू करने में मदद की। कॉकपिट सुरक्षा की वास्तविक प्रक्रिया, दरवाजा किस तरह खुला और उस समय विमान की स्थिति क्या थी इन सभी पहलुओं की पुष्टि आधिकारिक जांच के बाद ही हो सकेगी। क्या विमान को सचमुच हाइजैक किया गया था स्क्वॉक 7500 का इस्तेमाल होने का अर्थ है कि विमान से हाइजैक या गैरकानूनी हस्तक्षेप का आपात संकेत भेजा गया था। लेकिन इसका यह मतलब अपने आप नहीं है कि विमान पर पारंपरिक अर्थों में किसी बाहरी व्यक्ति ने कब्जा कर लिया था।इस घटना में कथित तौर पर विमान के एक पायलट पर ही दूसरे पायलट ने हमला किया था। इसलिए जांच एजेंसियों को यह पता लगाना होगा कि 7500 कोड किस परिस्थिति में सक्रिय किया गया और उस समय विमान के नियंत्रण की वास्तविक स्थिति क्या थी। यात्रियों की भूमिका इतनी महत्वपूर्ण क्यों रही विमान में संकट के दौरान यात्रियों ने कथित तौर पर हमलावर को पकड़ने में चालक दल की मदद की। एक यात्री ने बताया कि उसने हमलावर को पीछे से पकड़कर काबू किया, जबकि अन्य यात्रियों ने उसे बांधने में मदद की।हालांकि सामान्य परिस्थितियों में यात्रियों को कॉकपिट में हस्तक्षेप करने की जरूरत नहीं होती, लेकिन विमान में तत्काल सुरक्षा संकट पैदा होने पर यात्रियों और चालक दल की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण हो सकती है।इस घटना में यात्रियों के बयानों की स्वतंत्र पुष्टि और उनकी भूमिका का सटीक क्रम जांच का विषय रहेगा। लड़ाकू विमान क्यों भेजे गए घटना के दौरान इस्राइल और सऊदी अरब ने लड़ाकू विमान भेजे। इसका एक प्रमुख कारण ऐसे विमान की निगरानी और सुरक्षा सुनिश्चित करना होता है जिसकी स्थिति असामान्य हो और जिसके बारे में अपहरण या गंभीर सुरक्षा संकट का संकेत मिला हो।किसी विमान से स्क्वॉक 7500 जैसा संकेत मिलने पर संबंधित देश की सुरक्षा एजेंसियों के लिए स्थिति बेहद गंभीर हो जाती है।लड़ाकू विमान ऐसे मामले में विमान की पहचान, निगरानी और जरूरत पड़ने पर आगे की कार्रवाई के लिए भेजे जा सकते हैं। अब जांच में किन सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे घटना की जांच में मुख्य रूप से इन सवालों पर ध्यान रहेगा पायलट ने दूसरे पायलट पर हमला क्यों किया हमले से पहले कॉकपिट में क्या हुआ था हमलावर पायलट की मंशा क्या थी विमान ने इतनी तेजी से ऊंचाई क्यों खोई स्क्वॉक 7700 और 7500 किस क्रम और परिस्थिति में सक्रिय हुए विमान का नियंत्रण किस समय किसके पास था कॉकपिट का दरवाजा कैसे खुला यात्रियों और चालक दल ने हमलावर को कैसे काबू किया विमान को ताबुक ले जाने का फैसला कब और किस आधार पर किया गया घटना के पीछे आतंकवाद, व्यक्तिगत कारण या कोई अन्य वजह थी सबसे अहम बात: कारण अभी तय नहीं इस्राइल की ओर से घटना को आतंकवादी हमले के रूप में बताया गया है, लेकिन घटना की अंतिम वजह और हमलावर की मंशा की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि विमान ने गंभीर आपात स्थिति का सामना किया, लेकिन वह सुरक्षित रूप से ताबुक पहुंच गया। अब जांच का केंद्र यह पता लगाना है कि कॉकपिट में हमला क्यों हुआ और उस दौरान विमान के नियंत्रण तथा सुरक्षा व्यवस्था में वास्तव में क्या हुआ।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Oct 01, 2026, 10:00 IST
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