खेतों में हरे हैं बाढ़ के जख्म: पंजाब में रेत में दबे खेत, रबी सीजन बेअसर; अब खरीफ पर भी गहराया संकट
पंजाब में पिछले साल अगस्त में आई बाढ़ के जख्म नौ माह बाद भी नहीं भरे हैं। फिरोजपुर, फाजिल्का और रावी-सतलुज किनारे के कई इलाकों में खेत आज भी रेत की मोटी परत से ढके हैं। रबी सीजन में किसान बुआई नहीं कर सके और अब खरीफ पर भी संकट मंडरा रहा है। बाढ़ का असर खत्म होने के बजाय खेती और उत्पादन पर लगातार गहराता जा रहा है। बाढ़ का असर सिर्फ एक सीजन तक सीमित नहीं रहा बल्कि इसके कारण कृषि उत्पादन पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ने की आशंका है। यही वजह है कि राज्य सरकार ने इस बार गेहूं उत्पादन का लक्ष्य 130 लाख मीट्रिक टन रखा है। वहीं पिछले साल धान का उत्पादन भी घटकर करीब 150 लाख मीट्रिक टन रह गया था। लाखों लोग प्रभावित, हजारों गांवों में तबाही का मंजर पिछले साल अगस्त में आई बाढ़ ने पंजाब के बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया था। करीब पांच लाख एकड़ में खड़ी धान की फसल बर्बाद हो गई थी। राज्य के 2,472 गांव प्रभावित हुए और लगभग 3.89 लाख लोग इस आपदा से प्रभावित हुए। इस दौरान 56 लोगों की जान चली गई। बाढ़ का असर सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं रहा। करीब 3,200 सरकारी स्कूल क्षतिग्रस्त हुए और 19 कॉलेज पूरी तरह मलबे में तब्दील हो गए। 1,400 से अधिक क्लीनिक और अस्पतालों को नुकसान पहुंचा। 8,500 किलोमीटर सड़कें टूट गईं और 2,500 पुल ढह गए। राज्य सरकार ने शुरुआती सर्वे में करीब 13,800 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया था और केंद्र से विशेष राहत पैकेज की मांग की थी। किसानों को राहत देने के लिए जिसका खेत उसकी रेत नीति लागू की गई, जिसके तहत किसानों को अपने खेतों से रेत निकालने की अनुमति दी गई। लेकिन जमीनी स्तर पर इस योजना का सीमित असर ही देखने को मिला है।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Apr 27, 2026, 15:34 IST
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