आशंका और आह्वान: एक चेतावनी है मौसम पर यूएन की रिपोर्ट, सचेत होना दुनिया का दायित्व

प्रशांत महासागर में अल-नीनो की स्थितियां तेजी से विकसित होने संबंधी संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की रिपोर्ट ने जहां पहले ही जलवायु परिवर्तन और चरम मौसमी घटनाओं के असर झेल रही दुनिया के समक्ष चिंताजनक स्थिति पैदा कर दी है, वहीं, पर्यावरणविदों और नीति-निर्माताओं की नींद भी उड़ा दी है। रिपोर्ट में मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) ने अनुमान लगाया है कि जून से अगस्त 2026 के बीच अल-नीनो के सक्रिय होने की लगभग 80 प्रतिशत और इसके नवंबर तक बने रहने की 90 प्रतिशत से अधिक आशंका है। अगर ऐसा होता है, तो आने वाले महीनों में न सिर्फ वैश्विक तापमान, बल्कि मौसम के अत्यधिक खराब होने का खतरा भी बढ़ सकता है। 2023-24 में आया अल-नीनो, अब तक दर्ज किए गए पांच सबसे मजबूत अल-नीनो में से एक था, जिसने 2024 में रिकॉर्ड-तोड़ वैश्विक तापमान में अहम भूमिका निभाई थी। ऐसे में, यह ताजा चेतावनी निस्संदेह बेहद परेशान करने वाली है, क्योंकि इसका व्यापक असर कृषि उत्पादकता, अर्थव्यवस्था, मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर पड़ सकता है। उल्लेखनीय है कि अल-नीनो एक ऐसी स्थिति है, जिसमें समुद्र का पानी असामान्य रूप से गर्म होने लगता है और वैश्विक हवाओं व बादलों का स्वरूप बदलकर दुनियाभर के मौसम के पैटर्न को असंतुलित कर देता है। भारत पर इसके कम या अधिक असर को लेकर कई बातें हो रही हैं। लेकिन, यह आशंका तो है ही कि इससे भारत में मानसून कमजोर रह सकता है और बारिश की कमी से गर्मी का दौर लंबा खिंच सकता है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने भी हाल ही में देश के कई हिस्सों में इस बार सामान्य से कम बारिश होने, भीषण गर्मी पड़ने और अप्रैल से जून के दौरान सामान्य से अधिक हीटवेव वाले दिनों की आशंका जताई थी। ऐसे में, विश्व मौसम संगठन की रिपोर्ट एक तरह से भारतीय मौसम विभाग की चेतावनी की ही पुष्टि करती है। बावजूद इसके कि जून की शुरुआत में पश्चिमी विक्षोभ के कारण हुई बारिश से आंशिक राहत मिली है और तापमान में कुछ कमी भी आई, इन चेतावनियों को हल्के में नहीं लिया जा सकता। लिहाजा, केंद्रीय कृषि मंत्री का यह कहना जायज है कि अब चुनौती केवल वर्षा के पूर्वानुमान की नहीं, बल्कि जमीनी स्तर की तैयारियों की भी है। पिछले कुछ वर्षों के अनुभव बताते हैं कि चरम या असामान्य मौसमी घटनाएं हमारे लिए अप्रत्याशित नहीं हैं, ऐसे में जरूरी है कि ताजा चेतावनी को भी भय पैदा करने वाली सूचना के बजाय समय रहते तैयारी का अवसर माना जाए।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jun 04, 2026, 02:54 IST
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