Criticism: हर आलोचना एक आईना है, जो कमियां नहीं बल्कि संभावनाएं दिखाती है; इसे अपनाकर खुद को बनाएं मजबूत
Criticism: हमारा मस्तिष्क हमें भावनात्मक रूप से सुरक्षित रखने की कोशिश करता है। इसलिए जब कोई आलोचना करता है, तो हम उसे सुधार नहीं, बल्कि अपने आत्म-सम्मान पर हमला समझ लेते हैं। इसी वजह से हम तुरंत सफाई देने या बहस करने लगते हैं। इसे ही मानसिक "रक्षा प्रणाली" कहते हैं। इससे बेहतर तरीके से निपटने के लिए पहले शांत रहें और पूरी बात ध्यान से सुनें। तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय थोड़ा सोचें कि सामने वाला क्या सुधार बता रहा है। आलोचना को बुरा मानने के बजाय सीखने का अवसर समझें। इससे आपका विकास होगा और आप अधिक परिपक्व व आत्मविश्वासी बनेंगे।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Feb 26, 2026, 13:05 IST
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