रूस-ईरान पर शिकंजा कसने की तैयारी: अमेरिकी सीनेट में सहमति; भारत-चीन पर कैसे पड़ सकता है असर?
अमेरिकी सीनेटरों के एक द्विदलीय समूह ने मंगलवार को उस विधेयक को तेजीसे आगे बढ़ाने पर सहमति जताई, जो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस और ईरान से तेल खरीदने वाले बड़े देशों पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार देगा। इस कदम का असर भारत और चीन जैसे देशों पर भी पड़ सकता है। रूस के साथ अब ईरान को भी क्यों किया गया शामिल रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले इस विधेयक के प्रावधान, जिन्हें मूल रूप से दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने पेश किया था, अब ईरान के ऊर्जा और हथियार क्षेत्रों को मिलने वाली फंडिंग पर रोक लगाने तक विस्तारित कर दिए गए हैं। सीनेटरों ने इस कानून को लेकर क्या कहा डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन दोनों दलों के सीनेटरों ने संयुक्त बयान में कहा, 'हमें उस कानून पर सहमति की घोषणा करते हुए गर्व हो रहा है, जो रूसी तेल और गैस के खरीदारों को पुतिन की युद्ध मशीन को बढ़ावा देने से रोकेगा और ईरानी सरकार की आतंकवाद को समर्थन देने तथा अपने परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाने की क्षमता पर भी अंकुश लगाएगा।'विधेयक के पहले संस्करण में केवल रूस पर प्रतिबंध लगाने का प्रावधान था, लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सुझाव पर इसमें ईरान को भी शामिल कर लिया गया। इस द्विदलीय समझौते की घोषणा डेमोक्रेटिक सीनेटर जीन शाहीन और रिचर्ड ब्लूमेंथल के साथ रिपब्लिकन सीनेटर डार्लिन ग्राहम, केटी ब्रिट, रोजर विकर और जिम रिस्क ने की। लिंडसे ग्राहम की विरासत का जिक्र क्यों हुआ सीनेटरों ने कहा,'सीनेटर लिंडसे ग्राहम की विरासत का सम्मान करने का इससे बेहतर तरीका और कोई नहीं हो सकता कि इस द्विदलीय समझौते को आगे बढ़ाया जाए। हम मंगलवार को होने वाले प्रक्रियात्मक मतदान का इंतजार कर रहे हैं।' 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट-2026' को आगे बढ़ाने के लिए प्रक्रियात्मक मतदान मंगलवार शाम को प्रस्तावित है। अंतिम संस्कार के दिन ही घोषणा क्यों हुई इस समझौते की घोषणा उसी दिन की गई, जिस दिन 11 जुलाई को निधन वाले लिंडसे ग्राहम का अंतिम संस्कार नेशनल कैथेड्रल में हुआ। अंतिम संस्कार में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की और इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी मौजूद रहे। किस-किस पर लगेगा प्रतिबंधों का शिकंजा 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट-2026' रूस और यूक्रेन युद्ध में रूस का समर्थन करने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं पर प्राथमिक तथा द्वितीयक प्रतिबंध लगाने का प्रावधान करता है। किन लोगों और संस्थाओं को बनाया गया निशाना इन प्रतिबंधों के दायरे में रूसी सरकारी अधिकारी, ओलिगार्क (अत्यंत प्रभावशाली उद्योगपति), उनके परिवार के सदस्य, विदेशी सहयोगी, रूसी बैंक और वित्तीय संस्थान, साथ ही रूस की तथाकथित 'शैडो फ्लीट' यानी प्रतिबंधों से बचने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले गुप्त जहाज़ी बेड़े को शामिल किया गया है। भारत-चीन जैसे देशों पर असर कैसे पड़ सकता है यह कानून राष्ट्रपति को उन देशों से आयातित वस्तुओं पर लक्षित टैरिफ लगाने का अधिकार देता है, जो रूस से बड़े पैमाने पर तेल या गैस खरीदते हैं और उस पर लगे प्रतिबंधों को दरकिनार करने में मदद करते हैं। विधेयक की धारा-113 विशेष रूप से उन पांच देशों को निशाना बनाती है जो रूस से सबसे अधिक ईंधन खरीदते हैं या 'शैडो फ्लीट' के माध्यम से प्रतिबंधों से बचने में मदद करते हैं। ऐसे देशों पर अतिरिक्त 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जा सकता है। ईरान के खिलाफ क्या नया प्रावधान है ईरान के संदर्भ में यह विधेयक 'ईरान सैंक्शंस एक्ट' की अवधि को पांच वर्ष और बढ़ाकर वर्ष 2031 तक लागू रखने का प्रस्ताव करता है, जिससे आवश्यक द्वितीयक प्रतिबंध प्रभावी बने रहेंगे। ये भी पढ़ें:White House:ट्रंप की जेलेंस्की और नेतन्याहू से अलग-अलग मुलाकात, व्हाइट हाउस बोला- दोनों बैठकें रहीं सकारात्मक टैरिफ अधिकार की समय-सीमा क्यों तय की गई विधेयक में यह भी प्रावधान किया गया है कि नए टैरिफ लगाने का अधिकार केवल पांच वर्ष की सनसेट अवधि तक ही प्रभावी रहेगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यह व्यवस्था भविष्य में स्वतः अमेरिकी व्यापार नीति का स्थायी हिस्सा न बन जाए।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Jul 29, 2026, 02:20 IST
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