डूसू चुनाव : इस बार 1.01 अधिक के साथ 40.46 फीसदी मतदान, आज आएंगे नतीजे; विजय जुलूस पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव में शुक्रवार को 40.46 फीसदी मतदान हुआ, जो पिछले साल के 39.45 फीसदी से 1.01 फीसदी अधिक है। इस बार करीब 1.51 लाख छात्र मतदाता थे। चुनाव के लिए विश्वविद्यालय के 52 कॉलेजों और विभागों में मतदान केंद्र बनाए गए थे। अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पदों के लिए मैदान में कुल 20 उम्मीदवार हैं। शनिवार सुबह आठ बजे डीयू के मल्टीपर्पज हॉल में मतगणना शुरू होगी। दोपहर तक नतीजे घोषित होने की संभावना है। हाईकोर्ट ने विजय जुलूस निकालने पर पाबंदी लगा दी है। डीयू के 52 कॉलेज डूसू चुनाव से संबद्ध हैं। चुनावी रणनीति बनाने वाले संगठन उन कॉलेजों पर विशेष ध्यान देते हैं, जहां एक हजार या उससे अधिक मतदान होने की संभावना रहती है। ऐसे कॉलेजों में मजबूत प्रदर्शन को केंद्रीय पैनल के उम्मीदवारों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। यही वजह है कि प्रचार के दौरान प्रत्याशी और संगठन इन कॉलेजों में संपर्क अभियान तेज कर देते हैं। कालकाजी क्षेत्र के देशबंधु कॉलेज और रामानुजन कॉलेज में अपेक्षाकृत अधिक मतदान होता है। बड़ी संख्या में वोट पड़ने के कारण इन दोनों कॉलेजों के नतीजे डूसू चुनाव के व्यापक समीकरण को प्रभावित कर सकते हैं। साउथ कैंपस के शहीद भगत सिंह कॉलेज पर भी प्रमुख छात्र संगठनों की नजर रहती है। अदिति कॉलेज, श्यामा प्रसाद मुखर्जी कॉलेज, भगिनी निवेदिता कॉलेज, राजधानी कॉलेज और शिवाजी कॉलेज में भी मतदान का आंकड़ा एक हजार से ऊपर जाने पर यहां का प्रदर्शन अहम हो जाता है। इन कॉलेजों में मजबूत पकड़ केंद्रीय पैनल के उम्मीदवारों के कुल प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती है। नॉर्थ कैंपस के हिंदू कॉलेज, हंसराज कॉलेज, किरोड़ीमल कॉलेज और श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज में भी अपेक्षाकृत अधिक मतदान होता है। इनमें दो हजार से अधिक वोट पड़ने की स्थिति में इन कॉलेजों का योगदान केंद्रीय पैनल के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है। पूर्वी दिल्ली के वोट भी महत्वपूर्ण पूर्वी दिल्ली के श्यामलाल कॉलेज और विवेकानंद कॉलेज भी अधिक मतदान वाले कॉलेजों में शामिल हैं। यहां करीब एक हजार वोट पड़ने पर इनका असर उम्मीदवारों के कुल वोटों पर दिखाई दे सकता है। पिछले वर्षों के चुनावी पैटर्न में भी अधिक मतदान वाले कॉलेज संगठनों की रणनीति के केंद्र में रहे हैं। इसलिए मतदान के दिन इन कॉलेजों में प्रचार के साथ-साथ मतदाताओं को बूथ तक पहुंचाने की रणनीति पर भी विशेष जोर रहता है। आचार संहिता का उल्लंघन छात्र राजनीति के सबसे बड़े केंद्र माने जाने वाले दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (डूसू) चुनाव के दौरान आचार संहिता के उल्लंघन के कई मामले देखने को मिले। हाईकोर्ट की चेतावनियों के बावजूद चुनाव प्रचार के दौरान नियमों की अनदेखी और शक्ति प्रदर्शन का सिलसिला जारी रहा। नॉर्थ और साउथ कैंपस के अलावा आउट ऑफ कैंपस कॉलेजों के बाहर भी बड़ी संख्या में पर्चियां और पोस्टर नजर आए। उम्मीदवारों और उनके समर्थकों की ओर से मतदान के लिए जा रहे छात्रों को नाम और बैलेट नंबर वाली पर्चियां बांटी गईं। कई जगह समर्थकों ने सड़क पर पर्चियां उड़ाईं, जिससे कॉलेजों के बाहर की सड़कें कागजों से पट गईं। श्यामलाल कॉलेज के बाहर पर्चियां उड़ाने के साथ आतिशबाजी भी की गई। वहीं, महंगी गाड़ियों के काफिलों के कारण विश्वविद्यालय परिसर के आसपास यातायात प्रभावित हुआ और कई जगह जाम की स्थिति बनी। चुनाव प्रचार के दौरान निर्धारित सीमा से अधिक पम्फलेट, पोस्टर और पर्चियों के इस्तेमाल के आरोप भी सामने आए। छात्रावासों की ओर जाने वाले मार्गों और कॉलेजों के आसपास भी प्रचार सामग्री बिखरी दिखाई दी। इससे चुनाव आचार संहिता के पालन को लेकर सवाल उठे। विजय जुलूस पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद उम्मीदवारों और छात्रों के विजय जुलूस निकालने पर रोक लगादी है।कोर्ट ने चुनाव प्रचार के दौरान हथियार लहराने, लग्जरी कारों के काफिले निकालने और अन्य नियमों के उल्लंघन पर नाराजगी जताई। मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ ने 140 छात्र उम्मीदवारों को नोटिस जारी किया। एक दर्जन कॉलेजों के वोट बनाते हैं जीत-हार का समीकरण दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव में मुकाबला भले ही छात्र संगठनों के बीच दिखाई देता हो, लेकिन जीत-हार का समीकरण डीयू के करीब एक दर्जन ऐसे कॉलेजों में होने वाले मतदान से काफी हद तक प्रभावित होता है, जहां अन्य कॉलेजों की तुलना में मतदान अधिक रहता है। खासकर कालकाजी, दिल्ली देहात और पूर्वी दिल्ली के कॉलेजों के वोट उम्मीदवारों को बढ़त दिलाने में अहम भूमिका निभाते हैं। वहीं, ईवनिंग कॉलेजों में होने वाला मतदान कई बार जीत-हार के अंतर को प्रभावित करता है। सत्य निकेतन हादसा और पीजी हॉस्टल का सवाल रहा टॉप पर सू चुनाव में इस बार छात्रों के मुद्दे कॉलेज की चारदीवारी से बाहर तक नजर आए। साउथ कैंपस में मतदान के लिए पहुंचे छात्रों की बातचीत में सबसे अधिक चर्चा सत्य निकेतन हादसे की रही।पीजी में रहने वाले छात्रों ने सुरक्षित इमारत और बेहतर सुविधाओं की जरूरत बताई। वहीं, हॉस्टल की कमी, महिला सुरक्षा, मेट्रो पास, कॉलेज का इंफ्रास्ट्रक्चर और बढ़ी हुई फीस भी छात्रों के प्रमुख मुद्दों में शामिल रहे। साउथ कैंपस में छात्रों के बीच सत्य निकेतन हादसा चर्चा का प्रमुख विषय रहा। पीजी में रहने वाले छात्रों का कहना था कि हादसे के बाद रहने के लिए जगह चुनते समय अब किराया, कॉलेज से दूरी और सुविधाओं के साथ इमारत की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण हो गई है। मोती लाल नेहरू कॉलेज के छात्र रमन ने कहा कि सत्य निकेतन का हादसा अभी भी याद है। दिल्ली विश्वविद्यालय में हॉस्टल की कमी छात्रों के बीच लंबे समय से चर्चा का विषय है। छात्राओं से बातचीत में महिला सुरक्षा का मुद्दा भी प्रमुखता से सामने आया। छात्राओं ने कहा कि सुरक्षा केवल कॉलेज परिसर तक सीमित नहीं होनी चाहिए। दूरदराज से कॉलेज आने वाले छात्रों ने रियायती मेट्रो पास की मांग को भी अहम बताया। छात्रों का कहना था कि रोज मेट्रो से सफर करने में काफी खर्च होता है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Sep 19, 2026, 05:59 IST
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