देवी भागवत से होती है अंतःकरण की शुद्धि : अनंतानंद
जागृति विहार एक्सटेंशन स्थित वेदांत आश्रम में देवी भागवत कथा का पाचवां दिन कुरुवंश, पांडवों और राजा परीक्षित की कथा सुनाई माई सिटी रिपोर्टरमेरठ। जागृति विहार एक्सटेंशन स्थित वेदांत आश्रम में वेदांत सत्संग समिति मेरठ के तत्वावधान में आयोजित देवी भागवत कथा सप्ताह के पांचवें दिन कथा व्यास महामंडलेश्वर स्वामी अनंतानंद सरस्वती ने कहा कि केवल कथा सुनने से ज्ञान स्थिर नहीं होता। शुद्ध अंतःकरण की निर्मलता आवश्यक है। अंतःकरण की शुद्धि त्याग, दान और सत्कर्मों से ही संभव है।उन्होंने कहा कि मंत्र जप मनुष्य की कामनाओं और विकारों पर विजय प्राप्त करने का सर्वोत्तम साधन है। मां भगवती का निर्वाण मंत्र समस्त विकारों का नाश करने में समर्थ है। इसमें मां सरस्वती का वाग्बीज, मां काली का काम बीज तथा मां लक्ष्मी का माया बीज समाहित है।कथा प्रसंग में कुरुवंश की उत्पत्ति, कुंती एवं माद्री से पांडवों के जन्म, राजा परीक्षित के जन्म, सर्पदंश से मृत्यु के श्राप, उनके पुत्र जनमेजय द्वारा उत्तंग मुनि के कहने पर यज्ञ तथा पिता की मुक्ति और शोक से निवृत्ति के लिए देवी भागवत कथा श्रवण के प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया।कथा में कर्णप्रिया विश्नोई ने व्यास पूजन किया। इस अवसर पर अलका गुप्ता, यशोदा गौड़, विमल संगारी, हिमांशु त्यागी, बीडी पांडेय आदि रहे।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Jul 20, 2026, 21:04 IST
देवी भागवत से होती है अंतःकरण की शुद्धि : अनंतानंद #DeviBhagavataPurifiesTheInnerSelf:Anantanand #SubahSamachar
