Delhi EV Plan: 40,000 करोड़ के मास्टर प्लान से दिल्ली होगी पॉल्यूशन फ्री, जानें क्या है सरकार का नया रोडमैप
Electric vehicle subsidy Delhi: दिल्ली की नई ईवी पॉलिसी 2024-2030 एक बड़े बदलाव का रोडमैप है। इसका मुख्य लक्ष्य जनवरी 2027 तक 100% ई-ऑटो और अप्रैल 2028 तक 100% इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर का रजिस्ट्रेशन है। सरकार ने ई-कारों से सीधी सब्सिडी हटाकर उसे स्क्रैपेज और टैक्स लाभों से जोड़ा है। चार्जिंग स्टेशन का जाल बिछाने से लेकर बैटरी रिसाइक्लिंग तक, सरकार ने पूरे इकोसिस्टम को मजबूत करने की तैयारी कर ली है। टू-व्हीलर (2W) वालों के लिए ऑफर चूंकि दिल्ली में 67 प्रतिशत वाहन टू-व्हीलर हैं, इसलिए सरकार इन पर सबसे ज्यादा फोकस कर रही है। पहले साल में 10 हजार प्रति kWh अधिकतम करीब 30 हजार रुपये तक का प्रोत्साहन मिलेगा। यह सब्सिडी धीरे-धीरे कम होती जाएगी, इसलिए जो जल्दी फैसला लेंगे, उन्हें ज्यादा फायदा होगा। ई-कार और स्क्रैपेज का नया गणित सरकार ने सीधे कैश सब्सिडी के बजाय स्क्रैपेज यानी की पुरानी गाड़ी कबाड़ में देने पर जोर दिया है। अगर आप अपनी पुरानी BS-IV कार कबाड़ में देते हैं और नई इलेक्ट्रिक कार लेते हैं, तो आपको एक लाख रुपये तक का फायदा मिल सकता है। 30 लाख रुपये से महंगी लग्जरी इलेक्ट्रिक कारों को इस दायरे से बाहर रखा गया है ताकि इसका फायदा आम आदमी तक पहुंचे। चार्जिंग की टेंशन अब खत्म दिल्ली ट्रांसको लिमिटेड को नोडल एजेंसी बनाया गया है। अब हर कंपनी के लिए अपने हर डीलर शोरूम पर कम से कम एक पब्लिक चार्जिंग स्टेशन लगाना अनिवार्य होगा। यानी, जहां आप बाइक या कार खरीदने जाएंगे, वहीं चार्जिंग की सुविधा भी मिलेगी। एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह नीति उन कंपनियों के लिए गेम-चेंजर है जिन्होंने ईवी टेक्नोलॉजी में पहले से निवेश किया है। टू-व्हीलर में: बजाज, टीवीएस और एथर जैसी कंपनियों के लिए यह एक बड़ा मौका है। कार सेगमेंट: टाटा मोटर्स और महिंद्रा सबसे आगे रहने की उम्मीद है। जापानी कंपनियों के लिए चेतावनी: जापानी ऑटो कंपनियों को अब अपनी ईवी स्ट्रैटेजी बहुत तेजी से बदलनी होगी, वरना वे इस दौड़ में पीछे छूट सकती हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक यह पॉलिसी पूरी तरह नोटिफाई नहीं होती, लोग नई गाड़ी खरीदने में थोड़ी हिचकिचाहट दिखा सकते हैं, लेकिन एक बार यह लागू हो गई, तो दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों की मार्केट में मांग बढ़ सकती है। दिल्ली का यह मॉडल पूरे देश के लिए एक लीड इंडिकेटर है। अगर यहां यह कामयाब हुआ, तो भारत के अन्य प्रदूषित शहर भी इसी रास्ते पर चल सकते हैं।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Apr 17, 2026, 10:17 IST
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