Delhi: एक दशक में पर्यावरण मुआवजा कोष के केवल 43% हिस्से का इस्तेमाल, जागरूकता पर खर्च किए 10 करोड़ से अधिक
दिल्ली की हवा, पानी और हरियाली को बेहतर बनाने के लिए पिछले तीन वित्तीय वर्षों में करीब 45 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। यह जानकारी पहली बार राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देश पर दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) की ओर से दाखिल हलफनामे में सामने आई है। हलफनामे के अनुसार, पर्यावरण क्षति मुआवजा (ईडीसी) फंड का सबसे बड़ा हिस्सा तालाबों और अन्य जलाशयों के पुनर्जीवन पर खर्च किया गया। इसके अलावा, वायु और जल गुणवत्ता की निगरानी, आधुनिक प्रयोगशालाओं के विकास, जागरूकता अभियानों और शोर प्रदूषण नियंत्रण पर भी राशि खर्च की गई। डीपीसीसी के प्रशासनिक अधिकारी पवन कुमार जयंत ने बताया कि हलफनामे में वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2024-25 तक के खर्च का विवरण दिया गया है। उनके अनुसार, वर्ष 2024-25 में अकेले तालाबों और अन्य जल निकायों के संरक्षण एवं पुनर्जीवन पर 1,962.95 लाख रुपये खर्च किए गए। इसका उद्देश्य राजधानी के जल स्रोतों का संरक्षण और पुनर्विकास करना था। हलफनामे के मुताबिक, पर्यावरण सुधार संबंधी परियोजनाओं पर खर्च में लगातार वृद्धि हुई है। वर्ष 2022-23 में 145.23 लाख रुपये (1.45 करोड़) खर्च किए गए थे। यह राशि 2023-24 में बढ़कर 784.59 लाख रुपये (7.84 करोड़) हो गई, जबकि 2024-25 में रिकॉर्ड 3,593.83 लाख रुपये (35.93 करोड़) खर्च किए गए। डीपीसीसी का कहना है कि पर्यावरण मुआवजा कोष का उपयोग एनजीटी के निर्देशों और निर्धारित नियमों के अनुरूप किया गया है। विभाग के अनुसार, तीनों वित्तीय वर्षों के खर्च का ऑडिट भी पूरा हो चुका है। ध्वनि प्रदूषण की निगरानी मजबूत करने के लिए डीपीसीसी ने नॉइज मॉनिटरिंग स्टेशन स्थापित करने पर 86.71 लाख रुपये खर्च किए। विभाग का कहना है कि राजधानी में पर्यावरण निगरानी व्यवस्था को तकनीकी रूप से मजबूत करने और प्रदूषण नियंत्रण उपायों को प्रभावी बनाने के लिए यह निवेश किया गया है। खुलासासिर्फ 43% हिस्सा इस्तेमाल किया सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत प्राप्त जानकारी से पता चला है कि डीपीसीसी ने पिछले एक दशक में पर्यावरण मुआवजा कोष का केवल 43 प्रतिशत ही खर्च किया है। पर्यावरण कार्यकर्ता अमित गुप्ता द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार, वर्ष 2015-16 से 2025-26 के बीच प्रदूषण फैलाने वाली संस्थाओं से वसूले गए जुर्माने के रूप में 158.88 करोड़ रुपये जमा हुए, जबकि इसी अवधि में केवल 68.07 करोड़ रुपये ही खर्च किए गए। यह फंड राजधानी में प्रदूषण कम करने और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यों के लिए निर्धारित है। जागरूकता पर 10 करोड़ से अधिक खर्च डीपीसीसी के अनुसार, पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने, प्रचार-प्रसार, विज्ञापन और प्रिंटिंग कार्यों पर तीन वर्षों में 1,030.20 लाख रुपये (10.30 करोड़) खर्च किए गए। वहीं, वायु और जल गुणवत्ता की निगरानी के लिए प्रयोगशालाओं को मजबूत बनाने तथा आधुनिक उपकरणों की खरीद पर 636.73 लाख रुपये खर्च हुए। पर्यावरण विशेषज्ञों और विभिन्न निगरानी समितियों के मानदेय पर भी 587.60 लाख रुपये खर्च किए गए।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Jul 05, 2026, 07:11 IST
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