Zero Waste: दिल्ली नगर निगम का दावा- जीरो वेस्ट बनीं राजधानी की 826 कॉलोनियां, लैंडफिल पर घटेगा दबाव

राजधानी में कचरे के बढ़ते दबाव के बीच दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की जीरो वेस्ट कॉलोनी पहल अब व्यापक रूप ले रही है। शहर की 826 कॉलोनियां जीरो वेस्ट कॉलोनी के रूप में विकसित हो चुकी हैं। इन इलाकों में घरों से निकलने वाले कचरे को स्रोत पर ही अलग करने के साथ गीले कचरे का स्थानीय स्तर पर निस्तारण और सूखे कचरे को रीसाइक्लिंग के लिए भेजने की व्यवस्था की गई है। इस मॉडल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि कचरे को घर से उठाकर सीधे गाजीपुर, भलस्वा और ओखला लैंडफिल साइटों तक पहुंचाने के बजाय जहां संभव हो, वहीं उसका निस्तारण किया जा रहा है। इससे कचरा ढोने की जरूरत और परिवहन लागत कम होने के साथ लैंडफिल पर नए कचरे का दबाव घटाने में भी मदद मिल रही है। एमसीडी के अनुसार, जीरो वेस्ट मॉडल की शुरुआत घरों से होती है। लोगों को गीला और सूखा कचरा अलग रखने के लिए जागरूक किया जाता है। सब्जियों-फलों के छिलके, बचा भोजन और अन्य जैविक सामग्री से बनने वाली खाद का इस्तेमाल स्थानीय पार्कों और हरित क्षेत्रों में किया जा रहा है। प्लास्टिक, कागज, कांच और धातु जैसी सामग्री को रीसाइक्लिंग के लिए भेजा जाता है। कॉलोनियों में स्थानीय स्तर पर कचरा निस्तारण की व्यवस्था विकसित करने की पहल करीब पांच वर्ष पहले शुरू की गई थी। इसका आधार ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 में निर्धारित स्रोत पर कचरा पृथक्करण और वैज्ञानिक निस्तारण की व्यवस्था है। एमसीडी का लक्ष्य ऐसी व्यवस्था को अधिक से अधिक रिहायशी इलाकों तक पहुंचाना है, ताकि कचरे का बड़ा हिस्सा लैंडफिल तक पहुंचने से पहले ही संसाधन में बदला जा सके। नवजीवन विहार में रोज 125 किलो गीले कचरे की कंपोस्टिंग दक्षिण दिल्ली की नवजीवन विहार इस मॉडल की प्रमुख मिसाल है। स्थानीय निवासी रूबी के अनुसार, यहां करीब 280 परिवार रहते हैं। कॉलोनी में प्रतिदिन करीब 125 किलो रसोई के जैविक कचरे की कंपोस्टिंग की जाती है। इससे तैयार खाद का इस्तेमाल कॉलोनी के हरित क्षेत्रों में होता है। वहीं करीब 158 किलो सूखे कचरे में शामिल प्लास्टिक, कागज, धातु और कांच को अलग कर रीसाइक्लिंग के लिए भेजा जाता है। सर्वप्रिया विहार में कंपोस्ट पिट से बदलाव सर्वप्रिया विहार में गीले कचरे के स्थानीय निस्तारण के लिए कंपोस्ट पिट विकसित किया गया है। निवासी नवदीप के मुताबिक, रसोई और घरों से निकलने वाले जैविक कचरे को बाहर भेजने के बजाय कॉलोनी में ही खाद में बदला जा रहा है। उनका कहना है कि इस व्यवस्था से कचरे के परिवहन की जरूरत कम होती है और हम खुद जरूरत भर की खाद तैयार कर लेते हैं। सीआर पार्क में आरडब्ल्यूए की भूमिका अहम सीआर पार्क में आरडब्ल्यूए और स्थानीय निवासियों की भागीदारी से कचरा पृथक्करण को बढ़ावा दिया गया। निवासी मधु के अनुसार, जीरो वेस्ट व्यवस्था की सफलता के लिए घर से ही गीला और सूखा कचरा अलग करना जरूरी है। इसके बाद संग्रह और निस्तारण के दौरान दोनों को दोबारा मिलाए जाने से रोकना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। निजामुद्दीन पश्चिम में ऑर्गेनिक वेस्ट कन्वर्टर और कंपोस्टिंग मशीन का इस्तेमाल निजामुद्दीन पश्चिम में जगह की कमी को देखते हुए ऑर्गेनिक वेस्ट कन्वर्टर और कंपोस्टिंग मशीन का इस्तेमाल किया जा रहा है। निवासियों को कचरा पृथक्करण और कंपोस्टिंग के लिए प्रशिक्षण भी दिया गया है। स्थानीय निवासी फरहाद के मुताबिक, घनी आबादी वाले इलाकों में कंपोस्ट पिट के लिए पर्याप्त जगह नहीं होने पर मशीन आधारित व्यवस्था प्रभावी विकल्प बन रही है। सितंबर तक संख्या एक हजार पार करने का लक्ष्य : सत्या शर्मा एमसीडी की स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा का कहना है कि जीरो वेस्ट कॉलोनी बनाने में लोगों की भागीदारी निर्णायक है। पिछले दो माह में 150 कॉलोनियों को इस अभियान से जोड़ा गया है। उनका कहना है कि अगले माह के अंत तक जीरो वेस्ट कॉलोनियों की संख्या एक हजार से अधिक करने का लक्ष्य है। उन्होंने लोगों की भागीदारी को इस अभियान की सफलता की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बताया।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Aug 10, 2026, 01:40 IST
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