पंजाब विधानसभा चुनाव: सीएम फेस घोषित करने पर राजनीतिक दलों को फायदा या नुकसान, क्या कहते हैं ट्रेंड?

पंजाब के विधानसभा चुनावों से पहले सीएम चेहरा घोषित करने का भी ट्रेंड रहा है। यह पैटर्न असरदार तो रहता है मगर इसे निर्णायक नहीं कहा जा सकता, क्योंकि मजबूत सीएम फेस के साथ-साथ जमीनी स्तर पर मजबूत संगठन और अनुकूल राजनीतिक माहौल भी जीत के लिए बड़ा आधार बनते हैं। कमजोर चेहरों और पार्टी विरोधी लहर की वजह से दलों ने नुकसान भी झेला है। साल 1997 से 2022 तक के विधानसभा चुनावों में ट्रेंड देखें तो अधिकतर दलों ने सीएम फेस पर ही चुनाव लड़े और उन्हें फायदा भी मिला। इन चुनावों में सीएम फेस के साथ-साथ मुद्दे भी अहम रहे। इसके अलावा दलों ने जातीय समीकरणों को भी साधते हुए अपने सीएम फेस घोषित किए। अब फरवरी 2027 में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव के दौरान भी दलों की ओर से सीएम फेस पर मंथन जारी है। अभी तक आम आदमी पार्टी अपना सीएम फेस घोषित कर चुकी है, जबकि भाजपा, कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल की रणनीति अबकी इस दिशा में अलग है। सीएम फेस के साथ चुनाव लड़ने के पैटर्न को यदि देखें तो साल 1997 में प्रकाश सिंह बादल शिअद-भाजपा गठबंधन के प्रमुख चेहरे थे। मुद्दे भी असरदार रहे, लिहाजा पार्टी को जीत हासिल हुई। साल 2002 के चुनाव में शिअद की ओर से बादल ही चेहरा थे, मगर कांग्रेस ने कैप्टन अमरिंदर सिंह को प्रमुख चेहरा बनाकर मैदान में उतारा। सत्ता विरोधी लहर भी थी। नतीजतन बादल हार गए और कैप्टन अमरिंदर सीएम बने।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Sep 02, 2026, 22:37 IST
पूरी ख़बर पढ़ें »




पंजाब विधानसभा चुनाव: सीएम फेस घोषित करने पर राजनीतिक दलों को फायदा या नुकसान, क्या कहते हैं ट्रेंड? #CityStates #Election #Chandigarh-punjab #Punjab #VidhanSabhaElection #VidhanSabhaElection2027 #ChiefMinisterialFace #SubahSamachar