झूठ की मुद्रा: नेपाल के बैंक से जारी नोट ऐतिहासिक तथ्यों के खिलाफ, कूटनीतिक शिष्टाचार का उल्लंघन और दुस्साहस..

दो पड़ोसी देशों के बीच सीमा विवाद हो सकते हैं, लेकिन अगर कोई संप्रभु देश अपनी मुद्रा पर किसी अन्य संप्रभु देश के हिस्सों को अंकित करना शुरू कर दे, तो यह कूटनीतिक शिष्टाचार का उल्लंघन और दुस्साहस तो कहा ही जाएगा, दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी को भी उजागर करेगा। नेपाल इस वक्त यही कर रहा है, जिसके केंद्रीय बैंक द्वारा जारी सौ रुपये के नोटों पर छपे मानचित्र में कालापानी, लिपुलेख और लिंपियाधुरा क्षेत्रों को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया है, जबकि ऐतिहासिक तथ्य इन्हें भारत का बताते हैं। भारत के लिए यह स्वाभाविक ही आपत्तिजनक और अस्वीकार्य है, लेकिन इसके पीछे न्यस्त मंशाएं अधिक चिंतनीय हैं। यह वही नक्शा है, जिसे पिछली केपी शर्मा ओली सरकार ने मई, 2020 में मंजूरी दी थी। हालांकि, इस मामले में भारत का रुख शुरू से ही स्पष्ट रहा है। सुगौली की संधि (1816), ऐतिहासिक दस्तावेज, ब्रिटिशकालीन नक्शे, 1950 की भारत-नेपाल मैत्री संधि इत्यादि सब कुछ भारत के पक्ष में है। मुद्रा किसी भी देश की संप्रभुता का प्रतीक होती है और इस पर मानचित्र छापकर दूसरे देश के हिस्सों को इसमें दिखाना एक खतरनाक और आक्रामक कदम है, जो दक्षिण एशिया में शांति तथा सहयोग के माहौल को भी ठेस पहुंचा सकता है। दूसरा यह विवाद नेपाल की आंतरिक राजनीति से भी प्रेरित दिखता है, जहां सरकारें लोगों की भावनाओं को भड़का कर अपनी लोकप्रियता बनाए रखना चाहती हैं। नेपाल को उकसाने में चीन का हाथ होने की आशंका से भी इन्कार नहीं किया जा सकता। आखिर दशकों से भारत ही काठमांडू की मुद्रा छापता रहा था, लेकिन करीब एक दशक पहले उसने चीन से अपनी मुद्रा छपवानी शुरू कर दी। भारत और नेपाल के संबंध अपेक्षाकृत मधुर ही रहे हैं। दोनों देशों के बीच लगभग 1,850 किलोमीटर लंबी सीमा है, जो पांच भारतीय राज्यों-सिक्किम, पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड तक फैली है। ऐसे में, यह विवाद अनावश्यक ही है, क्योंकि पड़ोसियों के साथ सीमा विवाद से निपटने का सबसे अच्छा तरीका है कि कूटनीतिक रूप से उनसे जुड़ा जाए। इस तरह से मानचित्र जारी करना नेपाल की कूटनीतिक अपरिपक्वता ही कही जाएगी, तब तो और भी, जब नेपाली अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा भारत पर निर्भर है। नेपाल को समझना होगा कि सीमाएं पड़ोसी देशों के बीच भरोसे का सेतु होती हैं, और इसे मजबूत करने की जिम्मेदारी उसकी भी है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Nov 29, 2025, 03:28 IST
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